राजस्थान

वासुदेव देवनानी का नारी शक्ति को संदेश: विकसित भारत में नारी की भूमिका अहम: विधानसभा अध्यक्ष देवनानी

जोगेन्द्र सिंह शेखावत · 03 मई 2026, 10:50 दोपहर
राजस्थान विधानसभा अध्यक्ष डॉ. वासुदेव देवनानी ने छात्राओं को सफलता, संस्कार और नेतृत्व का मंत्र दिया।

जयपुर | राजस्थान विधानसभा अध्यक्ष डॉ. वासुदेव देवनानी ने शनिवार को जयपुर के एस.एस. जैन सुबोध पी.जी. महिला महाविद्यालय में आयोजित “पिनाकल -2026” कार्यक्रम को संबोधित किया। इस अवसर पर उन्होंने छात्राओं को जीवन के महत्वपूर्ण सूत्र दिए।

डॉ. देवनानी ने कहा कि युवाओं को अपना लक्ष्य स्वयं तय करना चाहिए। उन्हें अपनी रुचि के विषयों का चुनाव करना चाहिए ताकि वे भविष्य में किसी भी प्रकार की कुंठा का शिकार न हों।

उन्होंने संवाद के महत्व पर जोर देते हुए कहा कि युवाओं को अपने परिवार से निरंतर बातचीत करनी चाहिए। मन के भावों को परिवार के सदस्यों को बताने में कभी संकोच नहीं करना चाहिए।

विकसित भारत और नारी शक्ति का संकल्प

विधानसभा अध्यक्ष ने स्पष्ट किया कि एक विकसित भारत के निर्माण में नारी की सहभागिता अत्यंत महत्वपूर्ण है। उन्होंने युवतियों का आह्वान किया कि वे समाज में होने वाले अन्याय के प्रति हमेशा सावधान रहें।

उन्होंने छात्राओं को संस्कारवान बनने और अपनी गौरवशाली भारतीय संस्कृति को कभी न भूलने की प्रेरणा दी। उन्होंने कहा कि हमें अपने परिवार, समाज और राष्ट्र के गौरव के लिए जीना चाहिए।

देवनानी ने सामाजिक मूल्यों पर जोर देते हुए कहा कि टूटते हुए घरों को रोकना आज की बड़ी जरूरत है। समाज के मूल्यों के प्रति हमें अपनी दृढ़ता को हमेशा बनाए रखना होगा।

भारत की विश्व गुरु के रूप में पहचान

डॉ. देवनानी ने गर्व के साथ कहा कि भारत सर्वोपरि है। हम दुनिया में किसी भी देश से कम नहीं हैं। भारत प्राचीन काल से ही विश्व गुरु था, है और हमेशा रहेगा।

उन्होंने वार्षिक उत्सव को परिश्रम, प्रतिभा और संस्कार के समन्वय का उत्सव बताया। यह आयोजन छात्राओं को उत्कृष्टता के शिखर की ओर बढ़ने की नई प्रेरणा प्रदान करता है।

सुबोध संस्थान की सराहना करते हुए उन्होंने कहा कि यह संस्थान केवल किताबी शिक्षा ही नहीं दे रहा है। बल्कि यह जीवन मूल्यों और आत्मविश्वास का निर्माण कर समाज को सशक्त बना रहा है।

शिक्षा और प्राचीन विदुषी महिलाओं की विरासत

स्पीकर देवनानी ने नारी शिक्षा के व्यापक प्रभाव पर चर्चा की। उन्होंने कहा कि जब एक नारी शिक्षित होती है, तो उसका प्रभाव पूरे समाज और आने वाली पीढ़ियों पर पड़ता है।

उन्होंने गार्गी और मैत्रेयी जैसी महान विदुषी महिलाओं का उदाहरण दिया। प्राचीन काल में इन महिलाओं ने शास्त्रार्थ और ज्ञान-विमर्श में महत्वपूर्ण भूमिका निभाकर समाज का मार्गदर्शन किया था।

डॉ. देवनानी ने विश्वास दिलाया कि यदि युवा मर्यादा, अनुशासन और समर्पण के साथ कार्य करेंगे, तो देश का विकास स्वतः ही हो जाएगा। सफलता के लिए प्रतिबद्धता बहुत जरूरी है।

"आज की नारी अब घर की चारदीवारी तक ही सीमित नहीं है। वह संसद और विधानसभाओं में अपनी सशक्त उपस्थिति दर्ज करा रही है और नीतियों को नई दिशा दे रही है।"

नेतृत्व की अग्रिम पंक्ति में नारी

विज्ञान, तकनीक, सेना, खेल और प्रशासन जैसे हर क्षेत्र में आज की नारी अपनी पहचान बना रही है। अब समय आ गया है कि नारी केवल सहभागी न रहे, बल्कि नेतृत्व करे।

उन्होंने कहा कि भारतीय संस्कृति में नारी को दुर्गा, सरस्वती और लक्ष्मी के रूप में पूजनीय माना गया है। जहाँ नारी का सम्मान होता है, वहीं ईश्वरीय शक्तियों और देवत्व का वास होता है।

शिक्षा के उद्देश्य पर बात करते हुए उन्होंने कहा कि इसे केवल अंक प्राप्त करने का जरिया न मानें। शिक्षा सोचने की क्षमता और सामाजिक जिम्मेदारी विकसित करने का एक बड़ा माध्यम है।

तकनीक और नैतिकता का संतुलन

वर्तमान समय को आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और तकनीकी नवाचार का दौर बताते हुए उन्होंने युवाओं को सचेत किया। उन्होंने नवाचार और नैतिकता के बीच संतुलन बनाए रखने का आह्वान किया।

देवनानी ने कहा कि भारत अब विश्व नेतृत्व की ओर तेजी से कदम बढ़ा रहा है। इस गौरवशाली यात्रा में हमारे देश के युवाओं की भूमिका सबसे अधिक महत्वपूर्ण होने वाली है।

उन्होंने नेतृत्व को परिभाषित करते हुए कहा कि यह केवल पद प्राप्त करना नहीं है। वास्तविक नेतृत्व दूसरों को प्रेरित करना और अपनी जिम्मेदारियों को पूरी ईमानदारी से निभाना है।

कार्यक्रम के अंत में डॉ. देवनानी ने उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाली छात्राओं को सम्मानित किया। उन्होंने महाविद्यालय परिवार को सफल आयोजन के लिए बधाई दी और छात्राओं के उज्ज्वल भविष्य की कामना की।

इस अवसर पर एन आर कोठारी, एस एस बोथरा, आईएएस अल्पा चौधरी और मेजर नीति बंसल सहित कई गणमान्य लोग उपस्थित थे। प्राचार्य श्रीमती स्वाति जैन ने महाविद्यालय का वार्षिक प्रतिवेदन प्रस्तुत किया।

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