जयपुर | राजस्थान विधानसभा अध्यक्ष वासुदेव देवनानी ने राजधानी के नृसिंह मंदिर में एक विशेष सेवा कार्य की शुरुआत की। उन्होंने अशोका फाउंडेशन द्वारा आयोजित 150वें निशुल्क नेत्र चिकित्सा शिविर का दीप प्रज्वलित कर शुभारंभ किया। इस अवसर पर देवनानी ने कहा कि समाज सेवा के क्षेत्र में स्वास्थ्य शिविरों की भूमिका बहुत महत्वपूर्ण है। विशेषकर नेत्र शिविरों से निर्धन वर्ग को नई रोशनी मिलती है। यह एक सराहनीय पहल है।
सेवा और साधना का अनूठा संगम
देवनानी ने नेत्र चिकित्सा को केवल एक सामाजिक कार्य नहीं, बल्कि आध्यात्मिक साधना करार दिया। उनका मानना है कि जब किसी की आंखों में रोशनी लौटती है, तो वह व्यक्ति ईश्वर की कृपा का अनुभव करता है। उन्होंने कहा कि जब सेवा और साधना एकाकार हो जाते हैं, तब समाज में सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है। यह प्रयास मानवता के प्रति हमारी जागरूकता को दर्शाता है। इससे व्यक्ति अपने जीवन को नए सिरे से देखता है।
सामूहिक प्रयासों से बनेगा सशक्त भारत
स्पीकर ने जोर देकर कहा कि समाज में स्थायी परिवर्तन केवल सरकारी योजनाओं से नहीं आता। इसके लिए हर व्यक्ति के भीतर निस्वार्थ सेवा और कर्तव्य का भाव होना जरूरी है। जब पूरा समाज जागरूक होकर आगे बढ़ता है, तभी राष्ट्र संस्कारवान और समृद्ध बनता है। उन्होंने लोगों से आह्वान किया कि वे सेवा के इस पावन दीपक को प्रज्वलित रखें। सामूहिक प्रयासों से ही हम एक बेहतर समाज का निर्माण कर सकते हैं।
150 शिविरों की गौरवशाली उपलब्धि
देवनानी ने इस 150वें शिविर को सेवा यात्रा का एक महत्वपूर्ण पड़ाव बताया। उन्होंने कहा कि यह मील का पत्थर हमें और अधिक लोगों की मदद करने के लिए प्रेरित करता है। इस कार्यक्रम के दौरान उन्होंने नृसिंह मंदिर में पूजा-अर्चना भी की। उन्होंने प्रदेश की खुशहाली, सुख और समृद्धि के लिए मंगल कामना की। उन्होंने कहा कि सेवा का मार्ग ही जीवन का सबसे श्रेष्ठ मार्ग है और इसे जारी रखना चाहिए।
अंत में, उन्होंने शिविर में अपनी सेवाएं दे रहे डॉक्टरों और स्वयंसेवकों का आभार व्यक्त किया। उन्होंने इन प्रयासों को पूरे समाज के लिए एक महान प्रेरणास्रोत बताया। उन्होंने कहा कि ऐसे लोग ही समाज की असली पूंजी हैं।