जयपुर | राजस्थान विधानसभा अध्यक्ष डॉ. वासुदेव देवनानी ने हाल ही में जयपुर के राजस्थान इंटरनेशनल सेंटर में आयोजित निर्वाण विश्वविद्यालय के प्रथम दीक्षांत समारोह में शिरकत की। यहाँ उन्होंने युवाओं को भविष्य के लिए प्रेरित किया।
विज्ञान और आध्यात्म का संगम: वासुदेव देवनानी का युवाओं को मंत्र: तकनीक को संस्कृति से जोड़ें
जयपुर में निर्वाण विश्वविद्यालय के दीक्षांत समारोह में विधानसभा अध्यक्ष ने युवाओं को किया प्रेरित।
HIGHLIGHTS
- विधानसभा अध्यक्ष डॉ. वासुदेव देवनानी ने निर्वाण विश्वविद्यालय के प्रथम दीक्षांत समारोह को संबोधित किया।
- युवाओं से विज्ञान को आध्यात्म और तकनीक को संस्कृति से जोड़ने का आह्वान किया गया।
- भारत को स्वास्थ्य गुरु बनाने के लिए आरोग्य संस्कृति विकसित करने पर जोर दिया गया।
- विशिष्ट अतिथि जवाहर सिंह बेढ़म ने शिक्षा की गुणवत्ता और भारतीय मूल्यों पर प्रकाश डाला।
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उन्होंने जोर देकर कहा कि आज की युवा पीढ़ी में पूरी दुनिया को नई दिशा देने की अद्भुत क्षमता है। शिक्षा के साथ मानवीय मूल्यों का संगम ही देश का भविष्य स्वर्णिम बनाएगा।
विज्ञान और आध्यात्म का अद्भुत संगम
डॉ. देवनानी ने युवाओं से आह्वान किया कि वे विज्ञान को आध्यात्म के साथ जोड़ें। उन्होंने कहा कि तकनीक को संस्कृति और आधुनिकता को मानवता के साथ जोड़ना आज की सबसे बड़ी जरूरत है।
उनके अनुसार, जब युवा इन मूल्यों को आत्मसात करेंगे, तभी विकास सही मायने में सार्थक होगा। भारत की प्राचीन विधाओं और आधुनिक तकनीक का मेल ही हमें विश्व गुरु बनाएगा।
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डॉ. देवनानी ने याद दिलाया कि भारत ने ही विश्व को शून्य, आयुर्वेद, और योग जैसी महान सौगातें दी हैं। ध्यान और आध्यात्म का विज्ञान हमारी जड़ों में रचा-बसा है।
विश्व मंच पर उभरता नया भारत
आज भारत अंतरिक्ष, डिजिटल तकनीक और चिकित्सा के क्षेत्र में अग्रणी भूमिका निभा रहा है। रक्षा अनुसंधान और कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) में हमारी प्रगति पूरी दुनिया देख रही है।
अध्यक्ष ने कहा कि यह केवल तकनीकी उपलब्धियों का प्रमाण नहीं है। यह उस चेतना का प्रमाण है जो ज्ञान को हमेशा मानव कल्याण और सेवा से जोड़ती आई है।
उन्होंने विद्यार्थियों को समझाया कि डिग्री केवल कागज का एक टुकड़ा नहीं है। यह असल में समाज और मानवता के प्रति एक अत्यंत पवित्र और बड़ा दायित्व है।
शिक्षा और जीवन निर्माण का दर्शन
निर्वाण विश्वविद्यालय के दर्शन "ज्ञानार्जन को जीवन-निर्माण से जोड़ना" की उन्होंने सराहना की। उन्होंने कहा कि शिक्षा का उद्देश्य केवल नौकरी पाना नहीं, बल्कि चरित्र निर्माण होना चाहिए।
डॉ. देवनानी ने छात्रों से आरोग्य संस्कृति विकसित करने का आग्रह किया। उन्होंने कहा कि राजस्थान की मिट्टी से उपजा नवाचार और मानवीय मूल्यों का संगम पूरे विश्व को प्रभावित करेगा।
अपनी सफलता को इतना ऊँचा बनाइए कि वह केवल आपका परिचय न बने, बल्कि भारत की आत्मा का परिचय बने।
उन्होंने विद्यार्थियों से कहा कि वे अपने जीवन के लक्ष्यों को व्यापक बनाएं। सफलता तभी सार्थक है जब वह राष्ट्र के गौरव को बढ़ाए और समाज के काम आए।
प्राचीन गौरव की ओर वापसी
समारोह में विशिष्ट अतिथि गृह राज्य मंत्री जवाहर सिंह बेढ़म ने भी अपने विचार साझा किए। उन्होंने प्राचीन भारतीय विश्वविद्यालयों की गौरवशाली परंपरा का उल्लेख किया।
उन्होंने कहा कि एक समय था जब पूरी दुनिया से लोग भारत पढ़ने आते थे। आज हमें उसी मूल की ओर लौटने और शिक्षा की गुणवत्ता सुधारने की आवश्यकता है।
बेढ़म ने जोर दिया कि हमें ऐसे संस्थान बनाने चाहिए जहाँ विदेशी छात्र भारतीय दर्शन और आध्यात्म को समझने आएं। यह हमारी सांस्कृतिक विरासत को पुनर्जीवित करने का समय है।
प्रो. कैलाश सोडाणी ने भी विद्यार्थियों को संबोधित किया। उन्होंने शोध और नवाचार के क्षेत्र में नई सोच के साथ आगे बढ़ने की प्रेरणा दी। उन्होंने कहा कि युवा वैज्ञानिकों की नई सोच ही समाज को दिशा देगी।
शोध और नवाचार पर विशेष ध्यान
विश्वविद्यालय के चेयरमैन डॉ. एस.एल. सिहाग ने अतिथियों का स्वागत किया। उन्होंने कहा कि दीक्षांत समारोह विद्यार्थियों के वर्षों के कड़े परिश्रम और अनुशासन का एक उत्सव है।
कुलपति प्रो. एस. एल. गोदारा ने विश्वविद्यालय की उपलब्धियों पर प्रकाश डाला। उन्होंने बताया कि संस्थान गुणवत्तापूर्ण शिक्षा और शोध के बेहतर अवसर प्रदान करने के लिए हमेशा प्रयासरत है।
उपकुलपति प्रो. भावना देथा ने इस समारोह को विश्वविद्यालय के लिए ऐतिहासिक उपलब्धि बताया। उन्होंने कहा कि विद्यार्थियों की सफलता ही असल में किसी भी संस्थान की असली पहचान होती है।
कुलसचिव डॉ. सी. एम. राजोरिया ने कार्यक्रम की सुव्यवस्थित व्यवस्थाओं की जानकारी दी। समारोह में सुरक्षा और पंजीकरण से लेकर बैठक तक के सभी इंतजाम पुख्ता किए गए थे।
सफलता की मुस्कान और गर्व का क्षण
इस दीक्षांत समारोह में विभिन्न संकायों के शोधार्थियों को पीएचडी की उपाधि दी गई। साथ ही स्नातक और स्नातकोत्तर के छात्र-छात्राओं को भी डिग्रियां प्रदान की गईं।
पूरे परिसर में उत्सव जैसा माहौल नजर आया। विद्यार्थियों के चेहरे पर अपनी मेहनत की सफलता की मुस्कान थी, तो वहीं अभिभावकों की आँखों में गर्व के आँसू साफ दिख रहे थे।
यह दीक्षांत समारोह विद्यार्थियों के जीवन का एक मील का पत्थर साबित होगा। यहाँ से निकले युवा न केवल अपने करियर में चमकेंगे, बल्कि समाज को भी एक नई दिशा देंगे।
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