आपातकाल और विजया राजे की पैरोल
आपातकाल के दौरान कई नेताओं के साथ विजया राजे सिंधिया भी गिरफ्तार कर ली गई थीं।
उनकी बेटी यशोधरा राजे सिंधिया 21 साल की हो चुकी थीं। एक मां होने के नाते उन्हें बेटी की शादी की भारी चिंता थी।
इसी बीच विजया राजे को मेडिकल ग्राउंड पर पैरोल पर जेल से रिहाई मिल गई।
'जेल गई राजनीतिक कारणों से थी, बाहर घरेलू वजह से निकली थी।'
जेल से बाहर आने के बाद दो प्रमुख चिंताएं
जेल से निकलने के बाद विजया राजे की दो बड़ी चिंताएं सामने थीं।
- अपनी संपत्ति को सरकारी कब्जे से बचाना।
- बेटी यशोधरा राजे की शादी करवाना।
पैरोल के दौरान वह अधिकतर समय दिल्ली में बिता रही थीं। दिल्ली में उनके पास पूरे परिवार के साथ रहने लायक जगह नहीं थी।
वे अपनी सिरैमिक फैक्ट्री के मैनेजर के बंगले का इस्तेमाल करती थीं।
दतिया प्रवास और संन्यास का विचार
विजया राजे कुछ समय के लिए दतिया अपने गुरु-महाराज से मिलने गईं।
वहां उन्हें सुकून मिला और अपने लिए कुछ कमरे बनवाए। उन्हें लगा कि सब कुछ छोड़कर संन्यास ले लिया जाए।
दिल्ली लौटकर उन्होंने वकील को संपत्ति अधिकार छोड़ने के दस्तावेज बनाने को कहा।
वकील तीन हफ्तों तक नहीं आया और इस बीच उनका संन्यास का विचार भी समाप्त हो गया।
यशोधरा और सिद्धार्थ की प्रेम कहानी
यशोधरा मुंबई के मशहूर कार्डियोलॉजिस्ट डॉ. कीर्तिलाल भंसाली के सबसे छोटे बेटे सिद्धार्थ से विवाह करना चाहती थीं।
सिद्धार्थ ने उस समय डॉक्टर की डिग्री हासिल की थी और अस्पताल में इंटर्न थे। दोनों की मुलाकात बंबई के रेस कोर्स में हुई थी।
विजया राजे इस रिश्ते के पक्ष में नहीं थीं और उन्होंने एक अन्य लड़का भी चुना।
'मैंने फैसला कर लिया है। शादी सिद्धार्थ से करूंगी।'
यशोधरा ने साफ कह दिया था कि यदि सिद्धार्थ से शादी नहीं हुई, तो वह जिंदगी भर विवाह नहीं करेंगी।
शादी की मंजूरी और चुनाव परिणाम
अंततः विजया राजे को बेटी की जिद के आगे झुकना पड़ा और सिद्धार्थ से शादी तय हुई।
शादी 9 मार्च 1977 को हुई और 20 मार्च को बंबई में भंसाली परिवार ने रिसेप्शन दिया।
उसी दिन आपातकाल के बाद हुए चुनावों के नतीजे आ रहे थे, जिसमें इंदिरा गांधी को राज नारायण ने हरा दिया था।
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