नोटिस की अवधि समाप्त, जवाब के बजाय सोशल मीडिया पर हमला
राजस्थान कांग्रेस के भीतर चल रहा अंदरूनी घमासान थमने का नाम नहीं ले रहा है। पूर्व मंत्री विश्वेंद्र सिंह के तेवर लगातार आक्रामक बने हुए हैं।
प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष गोविंद सिंह डोटासरा और पार्टी लाइन से अलग बयानों के बाद उन्हें कारण बताओ नोटिस जारी किया गया था।
अनुशासन समिति ने उन्हें सात दिन के भीतर अपना जवाब देने को कहा था। यह समय सीमा अब समाप्त हो चुकी है।
तयशुदा अवधि पूरी होने के बाद भी पूर्व मंत्री ने नोटिस का कोई आधिकारिक जवाब नहीं दिया है। इससे चर्चाओं का बाजार गर्म है।
सोशल मीडिया पर साझा किया तीखा संदेश
नोटिस पर चुप्पी साधने के बाद विश्वेंद्र सिंह ने सोशल मीडिया पर एक लंबी और तीखी पोस्ट साझा कर सियासी गलियारों में नया भूचाल ला दिया है।
उनकी इस नवीनतम पोस्ट ने पार्टी के भीतर चल रही बैचेनी को और अधिक बढ़ा दिया है।
इसमें उन्होंने संगठन की कार्यप्रणाली और मौजूदा राजनीतिक हालातों पर बेहद बेबाक टिप्पणियां की हैं।
'रामभरोसे' हुई राजस्थान कांग्रेस
सिंह ने लिखा कि जिस पार्टी ने 60 साल देश पर राज किया, आज राजस्थान में उसका कोई धनी-धोरी नहीं बचा है।
उन्होंने आरोप लगाया कि पार्टी के नेता जिस डाल पर बैठते हैं, उसी को काटने का काम कर रहे हैं।
सिंह के अनुसार, आज की तारीख में स्वाभिमानी व्यक्तियों का इस संगठन में दम घुट रहा है।
बड़े खेद के साथ कहने/लिखने को मजबूर हूं कि जिस पार्टी ने 60 साल तक देश पर राज किया उसका आज की तारीख में राजस्थान में कोई धनी धोरी नहीं है, वह राम भरोसे हो गई है।
संगठन की कार्यप्रणाली पर उठाए सवाल
विश्वेंद्र सिंह ने प्रदेश कांग्रेस के कर्ताधर्ताओं को अहम और वहम की राजनीति से बाहर निकलने की नसीहत दी है।
उन्होंने पार्टी की वर्तमान स्थिति पर निम्नलिखित गंभीर आरोप लगाए हैं:
- पार्टी में अब वरिष्ठता का कोई मान-सम्मान नहीं बचा है।
- युवाओं के लिए मार्गदर्शन करने वाली कोई सोच दिखाई नहीं देती।
- नारी शक्ति को आगे बढ़ाने की दिशा में कोई ठोस योजना नहीं है।
- नेता आपसी जंग में उलझे हुए हैं और संगठन की जड़ों को नुकसान पहुंचा रहे हैं।
जनता के भरोसे राजनीतिक भविष्य
सिंह ने अपने लंबे राजनीतिक सफर का जिक्र करते हुए कहा कि उन्होंने हमेशा ईमानदारी और निष्ठा से जिम्मेदारी निभाई है।
उन्होंने स्पष्ट किया कि विधायक, सांसद और मंत्री के रूप में उन्होंने स्वच्छ राजनीति की है।
उन्होंने अपने जीवन के आदर्शों और उसूलों के बारे में विस्तार से जानकारी साझा की है:
- झूठ, फरेब और बेईमानी से कोसों दूर रहकर धर्म की राह पर चले।
- जो बोला मुंह पर बोला और जो किया वह हमेशा जनहित में किया।
- अपने पुरखों की मान-मर्यादा को ध्यान में रखकर ही फैसले लिए।
- चापलूसी कभी नहीं की और हमेशा एक अनुशासित सिपाही बने रहे।
इष्ट देव और जनता के प्रति समर्पण
विश्वेंद्र सिंह ने खुद को 'श्री गिरिराज धनी' का सेवक बताते हुए कहा कि वे हमेशा सत्य की राह पर अडिग रहे हैं।
उन्होंने अपने राजनीतिक भविष्य का फैसला पूरी तरह से भरतपुर संभाग की देवतुल्य जनता पर छोड़ दिया है।
सिंह ने कहा कि जनता का जो भी आदेश होगा, वह उन्हें पूरी तरह शिरोधार्य होगा।
उन्होंने भरतपुर संभाग की जनता को प्रणाम करते हुए अपने इष्ट देव और भोले बाबा का स्मरण किया है।
अब देखना यह है कि अनुशासन समिति की अनदेखी के बाद पार्टी आलाकमान उनके खिलाफ क्या कदम उठाता है।
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