राजस्थान | राजस्थान के राजनीतिक गलियारों से इस वक्त की सबसे बड़ी और चौकाने वाली खबर सामने आई है। ग्रामीण अंचलों में होने वाले पंचायत राज चुनावों से ठीक पहले कांग्रेस पार्टी के भीतर चल रही अंदरूनी कलह अब खुलकर सड़क पर आ गई है।
विश्वेंद्र सिंह का कांग्रेस से इस्तीफा
राज्य के कद्दावर नेता और पूर्व कैबिनेट मंत्री विश्वेंद्र सिंह ने पार्टी के प्रदेश नेतृत्व से चल रहे लंबे गतिरोध के बीच बड़ा कदम उठाया है।
उन्होंने गांधी जयंती यानी 2 अक्टूबर को कांग्रेस पार्टी की प्राथमिक सदस्यता से अपना इस्तीफा सौंप दिया है।
मारवाड़-ब्रज क्षेत्र के एक बड़े राजनीतिक चेहरे के रूप में पहचाने जाने वाले विश्वेंद्र सिंह के इस अचानक आए इस्तीफे से राज्य में भूचाल आ गया है।
पंचायत चुनाव से पहले बड़ा झटका
इसे पंचायत चुनाव से ठीक पहले कांग्रेस के लिए एक बहुत बड़ा झटका माना जा रहा है।
विश्वेंद्र सिंह कई दशकों तक 'हाथ' का दामन थामे रहे थे, लेकिन अब उन्होंने पार्टी से अलग होने का फैसला किया है।
इस्तीफे के पीछे के गंभीर कारण
अपने इस्तीफे के पीछे की वजहों को स्पष्ट करते हुए विश्वेंद्र सिंह ने पार्टी के शीर्ष नेतृत्व पर गंभीर सवाल उठाए हैं।
उन्होंने स्थानीय संगठन की कार्यशैली पर भी अपनी नाराजगी जाहिर की है।
सिंह ने कहा कि उन्होंने जीवन भर अपने इष्ट और अंतरात्मा की आवाज सुनकर ही बड़े फैसले लिए हैं।
चापलूसी की संस्कृति पर प्रहार
उन्होंने खुलकर अपनी पीड़ा जाहिर करते हुए कहा कि वर्तमान समय में पार्टी के भीतर चापलूसी की संस्कृति पनप रही है।
विश्वेंद्र सिंह के अनुसार, पार्टी में निष्ठावान कार्यकर्ताओं की लगातार अनदेखी की जा रही है।
इस स्थिति से उनका अंतर्मन बेहद व्यथित और आहत महसूस कर रहा था।
स्थानीय निकाय चुनावों से बढ़ी दूरियां
पिछले कुछ दिनों से भरतपुर और डीग जिलों के स्थानीय निकाय चुनावों को लेकर विवाद चल रहा था।
पार्टी के प्रदर्शन और टिकट वितरण को लेकर चल रही बयानबाजी के बाद से ही दूरियां काफी बढ़ गई थीं।
विश्वेंद्र सिंह और प्रदेश संगठन के बीच का यह मतभेद अब इस बड़े अलगाव के रूप में सामने आया है।
गोविंद सिंह डोटासरा की प्रतिक्रिया
प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष गोविंद सिंह डोटासरा ने इस पूरे घटनाक्रम पर अपनी प्रतिक्रिया दी है।
डोटासरा ने कहा है कि कांग्रेस पार्टी पूरी तरह से एकजुट है।
उन्होंने आरोप लगाया कि कुछ लोग बाहर से प्रायोजित बयानों के जरिए भ्रम फैलाने की कोशिश कर रहे हैं।
त्यागपत्र में छलका नेता का दर्द
कांग्रेस अध्यक्ष को भेजे गए अपने त्यागपत्र में विश्वेंद्र सिंह ने तीखे शब्दों का इस्तेमाल किया है।
उन्होंने पार्टी की मौजूदा कार्यसंस्कृति पर कड़े प्रहार करते हुए अपनी निष्ठा का जिक्र किया।
जिस पार्टी के लिए उन्होंने अपना पूरा जीवन न्यौछावर कर दिया, यदि आज उसी पार्टी में निष्ठा, ईमानदारी और कर्तव्यपरायणता का यह सिला मिलता है, तो वह अंदर से पूरी तरह हिल गए हैं।
विश्वेंद्र सिंह का यह इस्तीफा राजस्थान की राजनीति में आने वाले दिनों में बड़े बदलाव के संकेत दे रहा है।
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