भरतपुर | राजस्थान की राजनीति में एक बार फिर हलचल तेज हो गई है। कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और पूर्व कैबिनेट मंत्री विश्वेन्द्र सिंह ने शुक्रवार को सोशल मीडिया पर एक पोस्ट के जरिए अपनी ही पार्टी के संगठन पर सीधा हमला बोल दिया, जिससे भरतपुर और डीग की कांग्रेस राजनीति में भूचाल आ गया है।
विश्वेन्द्र सिंह के तीखे सवाल
विश्वेन्द्र सिंह ने भरतपुर जिला कांग्रेस अध्यक्ष दिनेश सूपा और डीग जिला कांग्रेस अध्यक्ष राजीव सिंह की कार्यशैली को सीधे निशाने पर लिया। उन्होंने अपनी पोस्ट में गंभीर आरोप लगाते हुए संगठन की सक्रियता पर सवाल खड़े किए।
उनकी पोस्ट के बाद जिले की कांग्रेस राजनीति में नई चर्चाओं का दौर शुरू हो गया है। कार्यकर्ताओं के बीच यह संदेश गया है कि पार्टी के भीतर सब कुछ ठीक नहीं चल रहा है।
कार्यकर्ताओं की अनदेखी का आरोप
विश्वेन्द्र सिंह ने अपनी नाराजगी जाहिर करते हुए कहा कि आम कांग्रेस कार्यकर्ताओं की कोई सुनवाई नहीं हो रही है। उन्होंने लिखा कि संगठन लगातार अपने जमीनी कार्यकर्ताओं से दूर होता जा रहा है।
विश्वेन्द्र सिंह ने कहा, "भरतपुर और डीग दोनों जिला कांग्रेस कमेटियों के जिला मुख्यालय पर आज तक पार्टी का स्थायी कार्यालय तक नहीं है।"
उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि दोनों जिलाध्यक्ष कांग्रेस के शीर्ष नेता राहुल गांधी का जन्मदिन तक याद नहीं रख सके, जो संगठन की कार्यप्रणाली पर एक बड़ा प्रश्नचिह्न है।
राजनीतिक गलियारों में चर्चा तेज
विश्वेन्द्र सिंह की इस सार्वजनिक टिप्पणी के बाद राजनीतिक गलियारों में चर्चाएं तेज हो गई हैं। माना जा रहा है कि जिला कार्यकारिणी के गठन में उनके समर्थकों को उचित स्थान न मिलने से वे नाराज थे।
उनकी यह नाराजगी अब संगठनात्मक असंतोष के रूप में सामने आई है। कई कार्यकर्ता भी इस बात से चिंतित हैं कि अगर वरिष्ठ नेता ही असंतुष्ट हैं तो पार्टी आगामी चुनावों में कैसे मजबूत होगी।
सांसद की जीत में थी अहम भूमिका
गौरतलब है कि भरतपुर और डीग की सात विधानसभा सीटों पर कांग्रेस का एक भी विधायक नहीं है। हालांकि, भरतपुर लोकसभा सीट से कांग्रेस की संजना जाटव सांसद हैं और उनकी जीत में विश्वेन्द्र सिंह की भूमिका को काफी महत्वपूर्ण माना जाता है।
उधर, विश्वेन्द्र सिंह के आरोपों पर जिलाध्यक्षों ने कोई औपचारिक प्रतिक्रिया नहीं दी है। हालांकि, भरतपुर अध्यक्ष दिनेश सूपा ने राहुल गांधी का जन्मदिन मनाने की अखबारों की कटिंग साझा कर एक मौन जवाब देने की कोशिश की है।
इस पूरे घटनाक्रम ने कांग्रेस की आंतरिक कलह को उजागर कर दिया है। आने वाले निकाय और पंचायत चुनावों से पहले पार्टी के लिए यह एक बड़ी चुनौती हो सकती है, क्योंकि एकजुटता के बिना चुनावी राह आसान नहीं होगी।
*Edit with Google AI Studio