कोलकाता | पश्चिम बंगाल में विधानसभा चुनाव के मद्देनजर प्रशासन और निर्वाचन आयोग पूरी तरह से अलर्ट मोड पर नजर आ रहे हैं। मुख्य निर्वाचन अधिकारी (सीईओ) ने एक महत्वपूर्ण और सख्त निर्देश जारी किया है।
इस निर्देश का प्राथमिक उद्देश्य चुनाव प्रक्रिया के दौरान कानून-व्यवस्था को बनाए रखना है। आयोग चाहता है कि किसी भी तरह की गड़बड़ी या हिंसा को मतदान से पहले ही रोका जा सके।
बाइक रैलियों पर लगा पूर्ण प्रतिबंध
प्रशासन ने मतदान शुरू होने से ठीक 48 घंटे पहले मोटरसाइकिलों के व्यापक इस्तेमाल पर कड़ी निगरानी रखने का फैसला किया है। विशेष रूप से बाइक रैलियों को पूरी तरह प्रतिबंधित कर दिया गया है।
निर्वाचन आयोग का मानना है कि बाइक जुलूस अक्सर माहौल बिगाड़ने का काम करते हैं। कई बार इनका उपयोग मतदाताओं पर अनुचित दबाव बनाने या उन्हें डराने-धमकाने के लिए भी किया जाता है।
रात के समय आवाजाही के कड़े नियम
नए आदेश के तहत मतदान से पहले की रातों में, यानी रात 10 बजे से सुबह 6 बजे तक मोटरसाइकिल चलाने पर रोक रहेगी। यह नियम सुरक्षा व्यवस्था को पुख्ता करने के लिए लागू किया गया है।
हालांकि, प्रशासन ने मानवीय आधार पर कुछ रियायतें भी दी हैं। मेडिकल इमरजेंसी या परिवार के किसी बेहद जरूरी काम के लिए मोटरसाइकिल के उपयोग की अनुमति दी जाएगी।
पिलियन राइडिंग और अन्य पाबंदियां
दिन के समय, यानी सुबह 6 बजे से शाम 10 बजे तक भी नियम काफी सख्त रहेंगे। इस दौरान बाइक पर पीछे बैठने (पिलियन राइडिंग) की अनुमति सामान्य परिस्थितियों में नहीं होगी।
बीमार व्यक्तियों को अस्पताल ले जाने, बच्चों को स्कूल पहुंचाने या अन्य पारिवारिक आपात स्थितियों में ही पीछे बैठने की छूट मिलेगी। इसके लिए स्थानीय पुलिस से लिखित अनुमति लेना अनिवार्य हो सकता है।
मतदान दिवस और चुनावी कार्यक्रम
मतदान वाले दिन प्रशासन ने जनता को थोड़ी राहत दी है। परिवार के सदस्य एक साथ बाइक पर बैठकर अपने नजदीकी मतदान केंद्र तक वोट डालने के लिए जा सकते हैं।
पश्चिम बंगाल में यह विधानसभा चुनाव दो चरणों में आयोजित किया जाएगा। पहले चरण की वोटिंग 23 अप्रैल को होगी, जबकि दूसरे चरण का मतदान 29 अप्रैल को संपन्न कराया जाएगा।
चुनावों के नतीजे 4 मई को घोषित किए जाएंगे। जिला प्रशासन और पुलिस बल को इन सभी नियमों का सख्ती से पालन कराने की जिम्मेदारी सौंपी गई है ताकि निष्पक्ष चुनाव सुनिश्चित हों।