राजनीति

बंगाल चुनाव: 111 सीटों का महासंग्राम: पश्चिम बंगाल चुनाव: प्रेसिडेंसी डिवीजन की 111 सीटें तय करेंगी सत्ता का भविष्य, क्या ममता बनर्जी बचा पाएंगी अपना अभेद्य किला?

बलजीत सिंह शेखावत · 17 अप्रैल 2026, 02:35 दोपहर
पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव में प्रेसिडेंसी डिवीजन की 111 सीटें निर्णायक भूमिका निभाएंगी। बीजेपी और टीएमसी के बीच इस क्षेत्र में वर्चस्व की जंग तेज हो गई है।

कोलकाता | पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव की रणभेरी बज चुकी है। राज्य में दो चरणों में 23 और 29 अप्रैल को मतदान होना है। इस चुनाव में प्रेसिडेंसी डिवीजन की 111 सीटें सत्ता की दिशा तय करने में सबसे महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगी। वोटों की गिनती 4 मई को की जाएगी।

प्रेसिडेंसी डिवीजन का राजनीतिक इतिहास

पश्चिम बंगाल की राजनीति में प्रेसिडेंसी डिवीजन हमेशा से ही निर्णायक रहा है। 2006 के विधानसभा चुनाव में वाम मोर्चे ने यहाँ की 111 में से 72 सीटों पर कब्जा किया था। उस समय वामपंथियों का इस क्षेत्र पर एकछत्र राज हुआ करता था।2011 में ममता बनर्जी के नेतृत्व में टीएमसी ने यहाँ 89 सीटें जीतकर इतिहास रचा। इसी जीत ने बंगाल में 34 साल पुराने वामपंथी शासन को उखाड़ फेंका था। इसके बाद 2016 में टीएमसी ने अपनी स्थिति और बेहतर की और 91 सीटों पर जीत दर्ज की।

2021 के चुनाव और बीजेपी का प्रदर्शन

2021 के विधानसभा चुनाव में बीजेपी ने राज्य स्तर पर शानदार प्रदर्शन करते हुए 77 सीटें जीतीं। लेकिन प्रेसिडेंसी डिवीजन में उसे केवल 14 सीटों से ही संतोष करना पड़ा। यही कारण था कि बीजेपी सत्ता के करीब पहुंचकर भी दूर रह गई।इस क्षेत्र में टीएमसी ने 96 सीटों पर जीत हासिल कर अपनी बादशाहत बरकरार रखी। बीजेपी की मुख्य सफलता केवल नदिया जिले तक ही सीमित रही, जहाँ उसने 14 में से 9 सीटें जीती थीं। बाकी जिलों में टीएमसी का जादू बरकरार रहा।

वोट बैंक और अल्पसंख्यक समीकरण

हावड़ा, उत्तर और दक्षिण 24 परगना जैसे जिलों में अल्पसंख्यक आबादी काफी अधिक है। राजनीतिक रूप से यह क्षेत्र टीएमसी का सबसे मजबूत वोट बैंक माना जाता है। पार्टी का दावा है कि ये सीटें उसका सबसे मजबूत गढ़ हैं।हालांकि, इस बार हुमायूं कबीर और असदुद्दीन ओवैसी जैसे नेताओं की सक्रियता से मुस्लिम वोटों में बिखराव की संभावना जताई जा रही है। अगर अल्पसंख्यक वोटों में सेंध लगती है, तो ममता बनर्जी के लिए सत्ता की राह कठिन हो सकती है।

मतुआ समुदाय और बीजेपी की रणनीति

बीजेपी मतुआ समुदाय के प्रभाव वाले क्षेत्रों में लगातार सेंध लगाने की कोशिश कर रही है। नदिया और उत्तर 24 परगना में उसे कुछ हद तक सफलता भी मिली है। 2024 के लोकसभा चुनाव के रुझानों ने बीजेपी को नई उम्मीद दी है।लोकसभा चुनाव के आंकड़ों के अनुसार, बीजेपी 21 विधानसभा क्षेत्रों में बढ़त बनाने में सफल रही है। वहीं टीएमसी अभी भी 90 सीटों पर अपनी पकड़ बनाए हुए है। दक्षिण 24 परगना और कोलकाता में बीजेपी अभी भी संघर्ष कर रही है।

निष्कर्ष: कौन जीतेगा बंगाल?

ज्योति बसु से लेकर ममता बनर्जी तक, सभी मुख्यमंत्रियों ने इसी क्षेत्र से अपनी राजनीतिक शक्ति प्राप्त की है। दक्षिण बंगाल का यह गढ़ ही तय करेगा कि 4 मई को किसकी ताजपोशी होगी।बीजेपी के लिए सबसे बड़ी चुनौती दक्षिण 24 परगना और हावड़ा में खाता खोलने की है। वहीं ममता बनर्जी के लिए अपने इस अभेद्य किले को सुरक्षित रखना सबसे बड़ी प्राथमिकता है। पूरा देश अब 4 मई के नतीजों का इंतजार कर रहा है।

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