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राजस्थान

12 जिलों की प्यास बुझाने का मास्टरप्लान: राजस्थान में नदियों को जोड़ने की तैयारी, 12 जिलों को मिलेगा पानी

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पश्चिमी राजस्थान के 12 जिलों में पानी की किल्लत दूर करने के लिए नदियों को जोड़ने की योजना पर मंथन।

HIGHLIGHTS

  • पश्चिमी राजस्थान के 12 जिलों में पेयजल और सिंचाई संकट दूर करने के लिए नदियों को जोड़ने की योजना पर काम शुरू हुआ है।
  • सिंधु जल समझौते के तहत उत्तर भारत की नदियों के अतिरिक्त पानी को मरुधरा लाने के लिए 60 से ज्यादा विधायकों ने मांग की है।
  • परियोजना के पहले चरण में घग्गर नहर के पानी को हनुमानगढ़ से जोधपुर की जोजरी नदी में मिलाने का प्रस्ताव रखा गया है।
  • माही नदी को लूणी से जोड़ने और नर्मदा नहर विस्तार के जरिए बाड़मेर-जैसलमेर तक पानी पहुंचाने की तैयारी की जा रही है।
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जोधपुर | पश्चिमी राजस्थान के 12 जिलों के लिए एक बड़ी खुशखबरी सामने आ रही है। उत्तर भारत की नदियों का अतिरिक्त पानी अब इस रेतीले इलाके तक पहुंचाने की तैयारी जोर-शोर से शुरू हो गई है।

सिंधु जल समझौते के तहत रोके गए पानी को अब जोधपुर सहित कई अन्य जिलों तक लाने की मांग तेज हो गई है। इससे न केवल पेयजल संकट दूर होगा, बल्कि खेती की तस्वीर भी बदलेगी।

नदियों को जोड़ने की बड़ी तैयारी

जल संसाधन विभाग अब इस महत्वाकांक्षी परियोजना की डीपीआर तैयार करने पर गंभीरता से विचार कर रहा है। मुख्यमंत्री के हालिया दौरे के बाद इस दिशा में तेजी से मंथन शुरू हुआ है।

इस प्रस्ताव में घग्गर, यमुना, सतलुज और रावी जैसी प्रमुख नदियों के अतिरिक्त जल को मोड़ने की बात कही गई है। इसके लिए व्यवहार्यता रिपोर्ट तैयार कराने की मांग विधायकों ने उठाई है।

करीब 60 से अधिक विधायकों ने इस संबंध में हस्ताक्षर कर सरकार को पत्र सौंपा है। उनका कहना है कि पूर्वी राजस्थान की तरह पश्चिमी राजस्थान को भी प्राथमिकता मिलनी चाहिए।

दो चरणों में पूरा होगा काम

पहले चरण में घग्गर नहर परियोजना के वर्षा जल को हनुमानगढ़ से कच्ची नहर के जरिए जोधपुर की जोजरी नदी में मिलाने की योजना है। इससे स्थानीय जलस्तर में सुधार होगा।

दूसरे चरण में यमुना नहर परियोजना के माध्यम से हरियाणा के तेजवाला फीडर से वर्षा जल को सोनीपत के पास से जोजरी नदी तक लाया जाएगा। यह कदम सिंचाई के लिए क्रांतिकारी साबित होगा।

माही नदी को लूणी से जोड़ने और नर्मदा नहर के विस्तार पर भी काम चल रहा है। इससे बाड़मेर, जैसलमेर और जालोर जैसे जिलों को सीधा लाभ मिलने की पूरी उम्मीद जताई गई है।

पश्चिमी राजस्थान के किसानों और आम जनता के लिए पानी की उपलब्धता सुनिश्चित करना हमारी सर्वोच्च प्राथमिकता होनी चाहिए, ताकि क्षेत्र का सर्वांगीण विकास हो सके।

सर्वे में शामिल होंगे विशेषज्ञ

इस पूरे सर्वे के लिए जोधपुर और बीकानेर के कृषि विश्वविद्यालयों के साथ-साथ जेएनवीयू के भूगोल और भूगर्भ विभागों की मदद लेने का भी प्रस्ताव रखा गया है।

जालोर के रास्ते गुजरात से पानी लाने वाली डब्ल्यूआरसीपी परियोजना पर भी काम चल रहा है। हालांकि, कुछ तकनीकी आपत्तियों के कारण फिलहाल इसकी गति थोड़ी धीमी बनी हुई है।

इस परियोजना के सफल होने पर फलोदी, बालोतरा, पाली, नागौर और श्रीगंगानगर जैसे जिलों की प्यास बुझेगी। यह राजस्थान के इतिहास में जल प्रबंधन का सबसे बड़ा मील का पत्थर साबित हो सकता है।

अंततः, यदि यह परियोजना धरातल पर उतरती है, तो पश्चिमी राजस्थान का रेगिस्तान हरा-भरा हो जाएगा। यह न केवल आर्थिक समृद्धि लाएगा, बल्कि पलायन जैसी समस्याओं का भी स्थायी समाधान करेगा।

*Edit with Google AI Studio

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