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शिव को क्यों प्रिय है बिल्वपत्र?: श्रावण में शिव को क्यों चढ़ाते हैं बिल्वपत्र? जानें मान्यता

desk · 02 अगस्त 2026, 01:32 दोपहर
श्रावण मास में भगवान शिव को बिल्वपत्र अर्पित करने से दरिद्रता दूर होती है। पंडित विनोद शास्त्री ने बताया कि इस मास में पूजन से भक्तों को दोगुना फल प्राप्त होता है।

श्रावण का महीना शुरू होते ही शिव मंदिरों में बिल्वपत्र की मांग काफी बढ़ जाती है। यह केवल एक परंपरा नहीं है, बल्कि इसके पीछे एक गहरी धार्मिक मान्यता छिपी है, जिसके बारे में बहुत कम लोग ही जानते हैं। आइए जानते हैं कि आखिर भगवान शिव को बिल्वपत्र क्यों चढ़ाया जाता है और इसका क्या महत्व है।

श्रावण मास का विशेष महत्व

सनातन धर्म में श्रावण मास का एक विशेष स्थान है। इसे भगवान शिव का सबसे प्रिय महीना माना जाता है। इस वर्ष, श्रावण मास 30 जुलाई, गुरुवार से शुरू हो रहा है और यह 28 अगस्त तक चलेगा।

इस पवित्र महीने में भगवान शिव के साथ-साथ माता गौरी की पूजा करने से विशेष फल की प्राप्ति होती है। भक्तों को उनकी पूजा का दोगुना लाभ मिलता है, क्योंकि इस दौरान शिव-शक्ति की उपासना एक साथ होती है, जिससे उनकी कृपा प्राप्त होती है।

श्रावण के महत्वपूर्ण योग

इस वर्ष श्रावण में कई शुभ योग बन रहे हैं। 3 अगस्त को सोमवार, 10 अगस्त को सोम प्रदोष, 12 अगस्त को हरियाली अमावस्या, 17 अगस्त को सोमवार और नाग पंचमी का योग है। इसके अलावा, 24 अगस्त को एकादशी और सोमवार का योग तथा 28 अगस्त को रक्षाबंधन का त्योहार मनाया जाएगा।

रुद्राभिषेक और पार्थिव शिवलिंग का महत्व

धर्माधिकारी पंडित विनोद शास्त्री ने बताया कि सभी देवताओं की आत्मा में रुद्र का वास है और सभी देवता रुद्र की आत्मा हैं। इसी कारण श्रावण मास में भगवान शिव की पूजा करने से विशेष फल की प्राप्ति होती है।

इस वर्ष श्रावण मास गुरुवार से प्रारंभ हो रहा है। इस महीने में भगवान शिव का महा अभिषेक करने का विशेष महत्व है। घर में मिट्टी के पार्थिव शिवलिंग बनाकर उनकी पूजा करने से भी अनंत गुना फल प्राप्त होता है।

सोमवार के व्रत का आरंभ

बहुत से लोग श्रावण मास के सोमवार के व्रतों को बहुत महत्वपूर्ण मानते हैं। इसी महीने से सोलह सोमवार के व्रत भी शुरू किए जाते हैं। इस सोमवार से कई लोगों ने अपने सोलह सोमवार के व्रत प्रारंभ कर दिए हैं।

क्या बिल्वपत्र चढ़ाने से दरिद्रता दूर होती है?

पंडित विनोद शास्त्री के अनुसार, श्रावण मास में प्रतिदिन रुद्राभिषेक और पार्थिव शिव पूजा करने से सभी मनोकामनाएं पूरी होती हैं।

भगवान शिव का अलग-अलग वस्तुओं से रुद्राभिषेक करने से विभिन्न कामनाओं की सिद्धि होती है। इनमें दूध, दही, घी, शक्कर, शहद, भांग, इत्र, भस्म, सरसों का तेल और गन्ने का रस आदि शामिल हैं।

ऐसी मान्यता है कि भगवान शिव को बिल्वपत्र अर्पित करने से दरिद्रता दूर होती है। यही कारण है कि जो श्रद्धालु महालक्ष्मी की कृपा चाहते हैं, वे भगवान शिव को अधिक से अधिक बेलपत्र अर्पित करते हैं।

सोमवार का विशेष पूजन

सोमवार का दिन भगवान शिव का सबसे प्रिय दिन माना जाता है। इस दिन भगवान शिव का विशेष पूजन और अभिषेक किया जाता है। जो भक्त श्रावण के पूरे महीने भगवान शिव की पूजा-अर्चना करते हैं, उनकी सभी इच्छाएं पूरी हो जाती हैं।

धर्माधिकारी पंडित विनोद शास्त्री ने बताया कि भगवान शिव का अभिषेक, महामृत्युंजय जाप और पंचाक्षर मंत्र का जाप करने से रोग, व्याधि, महामारी, कष्ट और असाध्य रोगों से मुक्ति मिलती है। भगवान शिव प्रसन्न होकर अकाल मृत्यु पर भी शीघ्र सफलता प्रदान करते हैं। शिव मंत्र और पूजन अमोघ एवं मोक्षदायी माने जाते हैं।

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