शेयर बाजार में भारी गिरावट, निवेशकों में बेचैनी
हफ्ते के पहले कारोबारी दिन, सोमवार को भारतीय शेयर बाजार में भारी गिरावट देखने को मिली। अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते तनाव का सीधा असर बाजार के सेंटिमेंट पर पड़ा, जिससे निवेशकों में बिकवाली हावी रही।
शुरुआती कारोबार में ही बाजार ने बड़ी गिरावट के संकेत दे दिए थे। अधिकतर सेक्टोरल सूचकांक लाल निशान में कारोबार करते दिखे, जिससे बाजार का सेंटिमेंट कमजोर नजर आया।
सेंसेक्स और निफ्टी का हाल
सोमवार को बीएसई का 30 शेयरों वाला प्रमुख सूचकांक सेंसेक्स 606 अंक की बड़ी गिरावट के साथ 76,963.35 पर खुला।
सुबह 9 बजकर 28 मिनट पर यह 617 अंक की गिरावट के साथ ट्रेड करता दिखा। वहीं, नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (NSE) का निफ्टी इस दौरान 182 अंक यानी 0.75 फीसदी की गिरावट के साथ 24,023 पर कारोबार कर रहा था।
सेक्टोरल सूचकांकों में बिकवाली
सेक्टोरल सूचकांकों की बात करें तो शुरुआती कारोबार में मीडिया को छोड़कर लगभग सभी सेक्टर लाल निशान पर थे।
निफ्टी ऑटो में 0.89%, निफ्टी एफएमसीजी में 0.44%, निफ्टी मेटल में 0.83% और निफ्टी फार्मा में 0.44% की गिरावट देखी गई।
इसके अलावा, निफ्टी प्राइवेट बैंक 0.51%, निफ्टी रियल्टी 0.59%, निफ्टी हेल्थकेयर 0.50% और निफ्टी ऑयल एंड गैस 0.33% की कमजोरी के साथ कारोबार कर रहे थे।
शेयर बाजार में गिरावट के 6 बड़े कारण
बाजार विशेषज्ञों के अनुसार, आज की गिरावट के पीछे कई घरेलू और अंतरराष्ट्रीय कारण जिम्मेदार हैं। आइए इन 6 प्रमुख कारणों को विस्तार से जानते हैं।
1. ईरान-अमेरिका के बीच बढ़ा तनाव
मिडिल ईस्ट में हालात एक बार फिर बिगड़ते दिख रहे हैं। अमेरिका और ईरान के बीच हमलों और जवाबी कार्रवाई का सिलसिला तेज हो गया है।
ईरान ने खाड़ी देशों में अपने हमले बढ़ा दिए हैं, जबकि अमेरिका ने भी नए सैन्य हमले किए हैं। इससे पहले दोनों देशों के बीच बनी अस्थायी शांति से बाजार को कुछ राहत मिली थी, लेकिन अब हालात फिर तनावपूर्ण हो गए हैं। इसका सीधा असर निवेशकों के सेंटिमेंट पर पड़ा है।
2. कच्चे तेल की कीमतों में उछाल
बढ़ते तनाव के बीच ईरान ने होर्मुज स्ट्रेट को बंद करने का दावा किया है, जो दुनिया के सबसे अहम समुद्री मार्गों में से एक है।
यहां से वैश्विक तेल और गैस की बड़ी हिस्सेदारी गुजरती है। हालांकि, अमेरिका का कहना है कि यह मार्ग अभी खुला है, लेकिन इस अनिश्चितता ने तेल बाजार को हिला दिया है।
ब्रेंट क्रूड की कीमत करीब 4% बढ़कर 79 डॉलर प्रति बैरल के आसपास पहुंच गई, जबकि डब्ल्यूटीआई क्रूड 74 डॉलर प्रति बैरल के ऊपर निकल गया। अगर तेल लंबे समय तक महंगा रहता है, तो भारत के आयात बिल पर दबाव बढ़ सकता है।
3. भारतीय रुपये पर दबाव
कच्चे तेल की कीमतों में आई तेजी का असर भारतीय मुद्रा पर भी साफ दिखा। सोमवार को रुपया डॉलर के मुकाबले करीब 0.40% की कमजोरी के साथ 95.70 पर खुला।
पिछले कारोबारी सत्र में यह 95.32 पर बंद हुआ था। एक्सपर्ट्स का मानना है कि निवेशकों की नजर अगले सप्ताह आने वाले अमेरिका के महंगाई के आंकड़ों पर भी रहेगी।
4. अमेरिकी बॉन्ड यील्ड में तेजी
बाजार की चिंता सिर्फ मिडिल ईस्ट तक ही सीमित नहीं है। अमेरिका में सरकारी बॉन्ड की यील्ड भी तेजी से बढ़ी है।
10 साल की अमेरिकी ट्रेजरी यील्ड बढ़कर 4.585% पर पहुंच गई है। जब बॉन्ड पर रिटर्न बढ़ता है, तो कई निवेशक शेयर बाजार से पैसा निकालकर बॉन्ड में निवेश करना पसंद करते हैं, जिससे इक्विटी बाजार पर अतिरिक्त दबाव बनता है।
5. एशियाई बाजारों का कमजोर प्रदर्शन
सोमवार को सिर्फ भारतीय बाजार ही नहीं, बल्कि ज्यादातर एशियाई शेयर बाजार भी लाल निशान में कारोबार करते दिखे।
दक्षिण कोरिया का कोस्पी 7% से ज्यादा टूट गया, जबकि जापान का निक्की करीब 2% फिसला। चीन का शंघाई कंपोजिट लगभग 1.5% नीचे रहा। हांगकांग का हैंग सेंग भी गिरावट के साथ कारोबार करता नजर आया।
6. दो दिन की तेजी के बाद मुनाफावसूली
बाजार में गिरावट की एक बड़ी वजह मुनाफावसूली भी मानी जा रही है। पिछले दो कारोबारी सत्रों में सेंसेक्स करीब 1,066 अंक और निफ्टी 325 अंक चढ़े थे।
ऐसे में कई निवेशकों ने इस बढ़त का फायदा उठाते हुए अपने शेयर बेच दिए। जब वैश्विक माहौल पहले से ही कमजोर हो, तो ऐसी मुनाफावसूली गिरावट को और तेज कर देती है।
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