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राजस्थान

सिरोही: अस्पताल में महिला की मौत: सिरोही जनाना अस्पताल में महिला की मौत: परिजनों ने लगाया इलाज में देरी और खून की कमी का आरोप, व्यवस्थाओं पर उठे सवाल

गणपत सिंह मांडोली

सिरोही के जनाना अस्पताल में नवी देवी नामक महिला की मौत के बाद अस्पताल प्रशासन पर सवाल खड़े हो रहे हैं। परिजनों का आरोप है कि समय पर रक्त उपलब्ध न होने और इलाज में देरी के कारण महिला की जान गई।

HIGHLIGHTS

  • सिरोही के जनाना अस्पताल में नवी देवी नामक महिला की उपचार के दौरान मौत हो गई।
  • परिजनों का आरोप है कि अस्पताल में समय पर खून की व्यवस्था नहीं हो पाई थी।
  • मृतका के पति ने डॉक्टरों पर इलाज में लापरवाही और देरी करने का गंभीर आरोप लगाया।
  • हाल ही में स्वास्थ्य मंत्री ने इस अस्पताल का निरीक्षण कर व्यवस्था सुधारने के निर्देश दिए थे।
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सिरोही | राजस्थान के सिरोही जिले के मुख्य जनाना अस्पताल से स्वास्थ्य सेवाओं की बदहाली की एक हृदयविदारक खबर सामने आई है। यहां एक महिला की उपचार के दौरान मौत हो गई। मृतका की पहचान नवी देवी के रूप में की गई है। महिला की मृत्यु के पश्चात उसके परिजनों ने अस्पताल प्रबंधन और ड्यूटी पर तैनात डॉक्टरों पर गंभीर आरोप लगाए हैं।

खून के लिए रात भर भटकते रहे परिजन

परिजनों का आरोप है कि भर्ती महिला के शरीर में खून की काफी कमी थी। डॉक्टरों ने परिवार को तुरंत खून की व्यवस्था करने का निर्देश दिया था। परिवार के सदस्य रात भर ब्लड बैंक और अन्य जगहों पर खून के लिए भटकते रहे। लेकिन दुर्भाग्यवश समय पर रक्त की व्यवस्था नहीं हो सकी। खून की कमी और समय पर उचित उपचार न मिलने के कारण महिला की स्थिति लगातार बिगड़ती चली गई। अंततः उसने अस्पताल के बिस्तर पर ही दम तोड़ दिया।

अस्पताल की व्यवस्थाओं पर उठे सवाल

इस दुखद घटना के बाद अस्पताल की आपातकालीन चिकित्सा व्यवस्था पर सवाल उठने लगे हैं। परिजनों ने इलाज में जानबूझकर देरी करने का आरोप लगाया है। मृतका के पति रताराम ने रोते हुए बताया कि अस्पताल में कोई भी उनकी सुनने वाला नहीं था। उन्होंने डॉक्टरों से कई बार मिन्नतें कीं, लेकिन राहत नहीं मिली। स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि अस्पताल में पर्याप्त स्टॉक और त्वरित रिस्पॉन्स सिस्टम होता, तो एक मासूम जान बचाई जा सकती थी।

मंत्री के निर्देशों का नहीं हुआ असर

गौरतलब है कि हाल ही में प्रदेश के स्वास्थ्य मंत्री गजेंद्र सिंह खींवसर ने इसी अस्पताल का औचक निरीक्षण किया था। उन्होंने अधिकारियों को फटकार लगाई थी। मंत्री ने स्पष्ट निर्देश दिए थे कि मरीजों को मिलने वाली सुविधाओं में कोई कोताही न बरती जाए। हालांकि, इस घटना ने दावों की हकीकत बयां कर दी है।

जांच की उठ रही है मांग

पीएमओ डॉ. वीरेंद्र महात्मा ने इस मामले में कहा है कि वे तथ्यों की जांच करवा रहे हैं। उन्होंने उचित कार्रवाई का आश्वासन भी दिया है। फिलहाल, क्षेत्र में तनाव का माहौल है और लोग स्वास्थ्य विभाग से जवाब मांग रहे हैं। परिजनों ने मांग की है कि दोषियों के खिलाफ सख्त कदम उठाए जाएं। स्वास्थ्य सेवाओं को मजबूत करना अब प्रशासन के लिए एक बड़ी चुनौती बन गया है। इस घटना ने सरकारी अस्पतालों की विश्वसनीयता पर फिर से गहरी चोट की है।

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