नई दिल्ली | संसद के विशेष सत्र की शुरुआत काफी हंगामेदार रही। केंद्रीय कानून मंत्री अर्जुन राम मेघवाल ने सदन में संविधान (131वां संशोधन) विधेयक, 2026 पेश किया। इस विधेयक का मुख्य उद्देश्य महिलाओं को आरक्षण देना और देश में नए सिरे से परिसीमन लागू करना है। मत विभाजन के बाद सदन ने इसे प्रारंभिक स्वीकृति दे दी। विधेयक पेश होते ही सदन में सत्तापक्ष और विपक्ष के बीच तीखी बहस छिड़ गई। विशेष रूप से गृह मंत्री अमित शाह और सपा नेता अखिलेश यादव के बीच जुबानी जंग देखी गई।
महिला आरक्षण और परिसीमन बिल पेश: संसद में महिला आरक्षण और परिसीमन बिल पेश: लोकसभा की सीटें बढ़कर होंगी 815, दक्षिण भारत में भारी विरोध
संसद के विशेष सत्र में महिला आरक्षण और परिसीमन विधेयक पेश किया गया। इसके तहत लोकसभा की कुल सीटें 815 करने का प्रस्ताव है, जिससे राजनीतिक गलियारों में हलचल मच गई है।
HIGHLIGHTS
- लोकसभा की कुल सीटें 815 करने का प्रस्ताव, जिनमें 272 सीटें महिलाओं के लिए आरक्षित होंगी।
- केंद्रीय मंत्री अर्जुन राम मेघवाल ने संविधान (131वां संशोधन) विधेयक, 2026 सदन में पेश किया।
- दक्षिण भारतीय राज्यों ने परिसीमन का कड़ा विरोध किया, सीएम एमके स्टालिन ने जलाई बिल की कॉपी।
- संसद में अमित शाह और अखिलेश यादव के बीच तीखी बहस, विपक्ष ने संघीय ढांचे पर उठाए सवाल।
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लोकसभा की सीटों में बड़ा इजाफा
सरकार ने प्रस्ताव दिया है कि सभी राज्यों की सीटों में लगभग 50 प्रतिशत की वृद्धि की जाएगी। इसके बाद लोकसभा की कुल सदस्य संख्या 815 हो जाएगी। इन 815 सीटों में से 272 सीटें महिलाओं के लिए आरक्षित करने का प्रावधान है। सरकार का तर्क है कि वर्तमान अनुपात को बरकरार रखते हुए प्रतिनिधित्व बढ़ाया जाएगा। सरकार ने इस सत्र में तीन बड़े बिल पेश किए हैं। इनमें महिला आरक्षण, परिसीमन और केंद्र शासित प्रदेशों के कानूनों में संशोधन से जुड़े महत्वपूर्ण विधेयक शामिल हैं।
विपक्ष के सवाल और दक्षिण का विरोध
विपक्ष ने बिल का समर्थन तो किया, लेकिन इसकी टाइमिंग पर सवाल उठाए। विपक्षी नेताओं का कहना है कि यह कदम देश के संघीय ढांचे को नुकसान पहुंचा सकता है। दक्षिण भारतीय राज्यों, विशेषकर तमिलनाडु और केरल ने परिसीमन का कड़ा विरोध किया है। उनका मानना है कि जनसंख्या नियंत्रण में बेहतर प्रदर्शन का उन्हें नुकसान होगा। तमिलनाडु के मुख्यमंत्री एमके स्टालिन ने विरोध स्वरूप विधेयक की प्रतियां जलाईं। उन्होंने इसे दक्षिण भारत की राजनीतिक ताकत को कम करने की साजिश करार दिया।
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जनसांख्यिकीय दंड की चिंता
दक्षिण के राज्यों को डर है कि 2011 की जनगणना के आधार पर परिसीमन होने से उत्तर प्रदेश और बिहार जैसे राज्यों की सीटें काफी बढ़ जाएंगी। इससे संसद में दक्षिण का प्रभाव कम होगा और फंड आवंटन में भी भेदभाव की स्थिति पैदा हो सकती है। फिलहाल यह मुद्दा राष्ट्रीय राजनीति के केंद्र में बना हुआ है।