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Ahmedabad Plane Crash: एक साल बाद भी नहीं भरे जख्म, इकलौते जीवित बचे यात्री ने कहा- ‘मुझे कभी शांति नहीं मिल सकती’

बलजीत सिंह शेखावत · 12 जून 2026, 10:59 दोपहर

अहमदाबाद: देश को झकझोर देने वाले अहमदाबाद विमान हादसे को आज, 12 जून 2026 को एक साल पूरा हो गया। पिछले वर्ष इसी दिन हुए इस भीषण हादसे ने पूरे देश को स्तब्ध कर दिया था। यह दुर्घटना भारत के इतिहास के सबसे घातक विमान हादसों में से एक मानी जाती है, जिसमें कुल 260 लोगों की जान चली गई थी।

हादसे में एयर इंडिया के बोइंग 787-8 ड्रीमलाइनर विमान में सवार 242 लोगों में से 241 यात्रियों और क्रू सदस्यों की मौत हो गई थी। वहीं, विमान जिस मेडिकल हॉस्टल पर जाकर दुर्घटनाग्रस्त हुआ था, वहां मौजूद 19 लोगों ने भी अपनी जान गंवाई थी। इस भयावह हादसे में विमान में सवार केवल एक यात्री, विश्वास कुमार रमेश, जीवित बच पाए थे।

‘मुझे कभी पूरी तरह शांति नहीं मिल सकती’

हादसे की पहली बरसी पर अपनी भावनाएं साझा करते हुए विश्वास कुमार रमेश ने कहा, “मुझे नहीं लगता कि मुझे कभी भी पूरी तरह से शांति मिल सकती है। इस हादसे में मैंने जो कुछ झेला और जो खोया है, उसके साथ मुझे जीवन भर जीना होगा।”

विश्वास विमान की 11A सीट पर बैठे थे। विशेषज्ञों और प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार उनकी जान बचना किसी चमत्कार से कम नहीं माना जाता। हादसे के बाद उनकी जीवित बचने की कहानी पूरी दुनिया में चर्चा का विषय बनी थी।

टेकऑफ के कुछ मिनट बाद हुआ था हादसा

एयर इंडिया का यह विमान अहमदाबाद से लंदन के लिए रवाना हुआ था। हालांकि उड़ान भरने के कुछ ही मिनट बाद विमान तकनीकी समस्या का शिकार हो गया और एयरपोर्ट के निकट स्थित एक मेडिकल हॉस्टल पर जा गिरा। दुर्घटना के बाद हुए भीषण विस्फोट और आग ने बड़े पैमाने पर तबाही मचाई थी।

अभी भी जारी है हादसे की जांच

हादसे की जांच अभी तक पूरी नहीं हो सकी है। पहले उम्मीद जताई जा रही थी कि 12 जून 2026 को अंतिम जांच रिपोर्ट जारी कर दी जाएगी, लेकिन एयरक्राफ्ट एक्सीडेंट इन्वेस्टिगेशन ब्यूरो (AAIB) ने स्पष्ट किया है कि इंजन संबंधी जांच पूरी न होने के कारण रिपोर्ट में करीब तीन महीने की देरी हो सकती है।

बताया गया है कि विमान के इंजनों की विस्तृत जांच अमेरिका स्थित GE Aerospace के विशेषज्ञों द्वारा की जा रही है। ऐसे में अब अंतिम जांच रिपोर्ट सितंबर 2026 तक जारी होने की संभावना है।

पीड़ित परिवारों की मांग- सार्वजनिक किया जाए ब्लैक बॉक्स डेटा

इस बीच हादसे में जान गंवाने वाले यात्रियों के परिवारों ने कुछ महीने पहले प्रधानमंत्री Narendra Modi को पत्र लिखकर ब्लैक बॉक्स डेटा सार्वजनिक करने की मांग की थी। परिवारों ने कॉकपिट वॉइस रिकॉर्डर (CVR) के डेटा को भी सार्वजनिक किए जाने की अपील की है।

पीड़ित परिवारों का कहना है कि वे मुआवजे से ज्यादा हादसे की असली वजह जानना चाहते हैं। पत्र में उन्होंने लिखा कि ब्लैक बॉक्स और सीवीआर डेटा सार्वजनिक होने से दुर्घटना के कारणों को समझने में मदद मिलेगी और पीड़ित परिवारों को जवाब मिल सकेंगे।

परिवारों ने यह भी कहा है कि यदि राष्ट्रीय या कानूनी कारणों से पूरा डेटा सार्वजनिक नहीं किया जा सकता, तो कम से कम इसे प्रभावित परिवारों के साथ निजी तौर पर साझा किया जाना चाहिए।

एक साल बाद भी कायम हैं सवाल

हादसे को एक वर्ष बीत जाने के बावजूद दुर्घटना के वास्तविक कारणों को लेकर कई सवाल अब भी अनुत्तरित हैं। अंतिम जांच रिपोर्ट का इंतजार न केवल पीड़ित परिवारों को है, बल्कि पूरे देश की निगाहें भी इस रिपोर्ट पर टिकी हुई हैं, ताकि इस त्रासदी के पीछे की सच्चाई सामने आ सके।

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