नीलू की कलम से: यहूदी

यहूदी
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यहूदियों से घृणा और मजाक के किस्सों से यूरोपीय साहित्य भरा पड़ा है। हमारे पहले प्रधानमंत्री हेरो में पढ़ाई के दौरान स्वीकार करते हैं कि उनके साथ पढ़ने वाले यहूदी लड़कों से सब नफरत करते थे। ऐसा भाव उनके स्वयं के मन में भी था जिसका वे कोई कारण नहीं मानते।

राजस्थानी में एक कहावत है 'बैर नहीं तो दैर ले ल' मतलब किसीसे वैर नहीं है तो देकर (उधार देकर) ले ले। विश्व इतिहास पर दृष्टि डालें तो यहूदियों ने यह काम बखूबी किया।

एक ऐसी जाति जिसका न कोई घर था, न कोई राज्य था और न ही संगठित धर्म बल्कि पश्चिमी दुनिया में बादशाहत रखने वाले ईसाई धर्म के तो वे जन्मजात शत्रु वैसे ही थे क्योंकि मसीही किताब के अनुसार उन्होंने ही उनके यीशु की जान ली थी।

यीशु ने भविष्यवाणी की- “लोग तुम्हें दुख दिलाने के लिए पकड़वाएँगे और तुम्हें मा₹ डालेंगे और तुम मेरे नाम की वजह से सब लोगों की नफ ₹त का शिकार बनोगे।”—मत्ती 24:9.
यही सच हुआ।

एक समय में उनके प्रति यह नफरत इस पराकाष्ठा पर पहुंच गई कि उन्हें चुन चुनकर मौत के मुंह में धकेल दिया गया। गैस चेंबर वाले किस्से किसीसे छिपे नहीं है। फिल्म Schind लर्स लिस्ट इसे बखूबी बयां करती है।

फिर भी वे जहां गए अपने बुद्धि कौशल से धन और संपत्ति  पा गए । उन्हें ज़मीन रखने से, व्यापार संघों से, व्यवसाय करने से रोक दिया गया था। वे केवल साहूकार और फेरीवाले, यानी व्यापारी बन सकते थे।

लिहाजा उन्होंने खूब उधारी दी, ब्याज बटोरा( बिना ब्याज उन्हें वापस कौन देता)  और धन के साथ मुफ्त नफरत कमाई। मर्चेंट ऑफ वेनिस का शैलॉक याद आया होगा जिसके प्रति शेक्सपियर का गुस्सा उसे ईसाई बनाने के आदेश पर खतम होता है।

यहूदियों से घृणा और मजाक के किस्सों से यूरोपीय साहित्य भरा पड़ा है। हमारे पहले प्रधानमंत्री हेरो में पढ़ाई के दौरान स्वीकार करते हैं कि उनके साथ पढ़ने वाले यहूदी लड़कों से सब नफरत करते थे। ऐसा भाव उनके स्वयं के मन में भी था जिसका वे कोई कारण नहीं मानते।

आज भी दबी जबान उन्हें नस्लीय टिप्पणीयों का शिकार होना पड़ जाता है। एलन मस्क और जार्ज सोरोस विवाद इसका ताजा उदाहरण है। हालांकि सोरोस खुद कोई दूध का धुला नहीं। खैर..
आखिर नियोजित नाश के बाद भी यहूदी उठ कैसे गया?

दरअसल यहूदी परंपरा ने हमेशा पुस्तक, अध्ययन और सीखने या अच्छी शिक्षा प्राप्त करने के महत्व पर जोर दिया है। चूंकि वे सबसे बाद में नौकरी पर रखे गए और सबसे पहले निकाले गए, इसलिए उनका झुकाव स्वतंत्र होने की ओर रहा। इसका मतलब था अपना खुद का व्यवसाय चलाना। 

आज भी विश्व के अरबपतियों में यहूदियों का प्रतिनिधित्व अधिक है। यहूदी दुनिया का 0.2% है, फिर भी शीर्ष 50 अरबपतियों में से 18% हैं। फोर्ब्स की सूची में केवल 25% सबसे अमीर अमेरिकी यहूदी हैं।

यहूदी अमेरिकी आबादी का 2% हैं।।इतिहास में यहूदी समुदाय की साक्षरता दर उनके समकालीनों की तुलना में बहुत अधिक रही है।

यहूदी अरबपति एक ऐसी संस्कृति में पले-बढ़े, जिसने शिक्षा और व्यक्तिगत सफलता के महत्व पर जोर दिया। एक ऐसी संस्कृति जिसमें शिक्षा प्राप्त करना केवल आदर्श नहीं था, यह  एक धार्मिक अपेक्षा थी।

एक ऐसी संस्कृति जो व्यवसाय शुरू करने और पैसा कमाने को महत्व देती है, क्योंकि जब बाकी सब विफल हो जाता है तो पैसा काम आता है।

चूँकि मुसलमानों और ईसाइयों  के हाथों कत्लेआम या नरसंहार में यहूदियों को बहुत अधिक पीड़ा झेलनी पड़ी, इसलिए वे जोखिम के प्रति सामान्य प्रतिक्रियाओं से कुछ हद तक अधिक प्रतिरक्षित हो गए।  

हॉलीवुड, रियल एस्टेट, हेज फंड और हाईटेक सॉफ्टवेयर जैसे गूगल, फेसबुक और ओरेकल सभी में यहूदियों का वर्चस्व  हैं। तकनीक बड़ी रकम देती है, लेकिन इसमें जोखिम भी अधिक है।

उनकी इस समृद्धि के पीछे एक मनोविज्ञान भी काम करता है। यहूदी मानते हैं कि दुनिया में समृद्ध होकर जीना उनकी नियति में लिखा है। दुनिया में जीवित रहने के लिए पैसे की जरूरत है।

वे मानते हैं कि उनके सफल होने की संभावना अधिक है। वे एक व्यवसाय शुरू करते है तो सफल होने तक की जिद्द से करते हैं, क्योंकि उन्हें लगता है कि उनकी सफलता की नियति है जो उन्हें  ईश्वर प्रदत्त  है।

धन को लेकर पश्चिमी निशाने पर तो वे शुरू से थे। आज धर्म के लिए अ  रबों और musal मानों के निशाने पर भी आ गए। हालांकि दोनों आपस में भाईबंध हैं । माना जाता है कि यहूदी अब्राहम के पुत्र इसहाक की सन्तान हैं और अरब अब्राहम के पुत्र इसमाएल की।

इजरायल का निर्माण अरब देशों के लिए असहनीय था किंतु नियतिवादी यहूदी अपनी जन्मभूमि ले पड़ा तो ले पड़ा। अब इसकी दशा भले  'जिमि दसनन्हि महुँ जीभ' जैसी है किंतु हौंसले फोलादी हैं। पैसा था ही, जमीन ले ली और शस्त्र खरीद लिए। अब कुण केवे ब्याव भूंडो!

इजरायल की गुप्तचर व्यवस्था का पूरी दुनिया में कोई सानी नहीं मगर इस बार लगता है कि मौसाद चूक गई है। इतने बड़े हमले की कानोंकान खबर नहीं और आपकी नींद रॉकेट से टूटती है तो निश्चित ही आप निश्चिंत हो गए हैं। यह शत्रुओं से घिरे देश के लिए शुभ नहीं क्योंकि इणी चूकी कि धार लगी।

पावर और पैसा भले आपके पास है मगर उनके पास पब्लिक है। आपका एक एक आदमी कीमती है जबकि उनके तो हजार भी स्वर्ग जाने के लिए तैयार खड़े हैं। वे कभी कम न पड़ेंगे। 

फिर भी दुनिया को इजराइल की इच्छा शक्ति पर भरोसा है। कल जब नेतन्याहू ने कहा 'वी आर एट वा र एंड वी विल विन इट' तभी समझ गए थे कि कुचरनीबाजों की सफाई सुनिश्चित है।

ऊपरवाले का शुक्र है कि अभी यहां कड़ी निन्दा का फैशन नहीं है, इनका नजरिया साफ है। जाप्ता बढ़िया ही होगा।

नीलू शेखावत 
#Isreal  #pelestine

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