जयपुर | यमुना जल को लेकर राजस्थान और हरियाणा के बीच 32 साल पुराना विवाद सुलझ गया है। इस ऐतिहासिक समझौते के बाद प्रदेश की राजनीति गरमा गई है। भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने इसे एक बड़ी उपलब्धि बताते हुए पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत को सीएम भजनलाल शर्मा के स्वागत समारोह के लिए आमंत्रित किया है।
यमुना जल समझौता: भाजपा का गहलोत को निमंत्रण
भाजपा के वरिष्ठ नेता राजेंद्र राठौड़ ने सोमवार को एक प्रेसवार्ता में यह जानकारी दी। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा मंगलवार सुबह जयपुर पहुंचेंगे, जहां एयरपोर्ट पर उनका भव्य स्वागत किया जाएगा।
राठौड़ ने बताया कि इस अभिनंदन समारोह के लिए पूर्व सीएम अशोक गहलोत को भी विशेष रूप से आमंत्रित किया गया है। उन्होंने गहलोत का पुराना बयान याद दिलाया।
भाजपा प्रदेशाध्यक्ष मदन राठौड़ ने भी एक्स पर पोस्ट कर गहलोत से अपनी घोषणा का सम्मान करने की अपील की। उन्होंने कहा कि यह जनहित का मामला है और उन्हें राजनीति से ऊपर उठना चाहिए।
क्या कहा था पूर्व सीएम गहलोत ने?
पिछले सप्ताह जोधपुर में मीडिया से बातचीत के दौरान अशोक गहलोत ने यमुना जल समझौते पर अपनी बात रखी थी। उन्होंने अपने पुराने वादे को दोहराया था।
"मैंने पहले भी कहा था और आज फिर दोहराता हूं कि जिस दिन आप राजस्थान में यमुना का पानी ले आएंगे, मैं खुद मुख्यमंत्री निवास पर आकर आपको माला पहनाऊंगा। मैं अपने इस वादे पर आज भी पूरी तरह कायम हूं।"
हालांकि, उन्होंने यह भी जोड़ा कि सिर्फ बैठकों से बात नहीं बनेगी, बल्कि जमीन पर पानी आना ज्यादा महत्वपूर्ण है।
कांग्रेस के दोहरे रवैये पर साधा निशाना
राजेंद्र राठौड़ ने इस मौके पर कांग्रेस पर दोहरे मापदंड अपनाने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि हरियाणा विधानसभा चुनाव के दौरान कांग्रेस ने अपने घोषणा पत्र में यमुना का पानी दूसरे राज्यों को नहीं देने का वादा किया था।
राठौड़ ने कहा कि गहलोत उसी घोषणा पत्र के आधार पर हरियाणा में कांग्रेस के लिए प्रचार कर रहे थे, जो उनके दोहरे रवैये को स्पष्ट रूप से दिखाता है।
32 साल बाद ऐतिहासिक समझौता
यमुना जल बंटवारे पर यह सहमति 32 साल के लंबे इंतजार के बाद बनी है। सोमवार को दिल्ली में गृहमंत्री अमित शाह की मौजूदगी में इस पर अंतिम मुहर लगी।
राजस्थान के मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा और हरियाणा के मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने मेमोरंडम ऑफ एग्रीमेंट (एमओए) पर हस्ताक्षर किए। इस दौरान केन्द्रीय जल शक्ति मंत्री सीआर पाटिल भी मौजूद थे।
यह समझौता 1994 के मूल समझौते को लागू करने के विवाद को सुलझाने के लिए किया गया है। इससे राजस्थान के शेखावाटी क्षेत्र को बड़ी राहत मिलने की उम्मीद है।
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