यमुना जल समझौते पर पारदर्शिता को लेकर उठे सवाल
यमुना जल संघर्ष समिति के संयोजक यशवर्धन सिंह ने यमुना जल परियोजना को लेकर सरकार की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं। उन्होंने सरकार से पारदर्शिता की मांग करते हुए कई महत्वपूर्ण मुद्दों को उठाया है।
सिंह ने राजस्थान के जल संसाधन मंत्री सुरेश रावत के उस बयान को चुनौती दी है, जिसमें उन्होंने कहा था कि राजस्थान और हरियाणा के बीच हुआ समझौता (MOA) एक सार्वजनिक पोर्टल पर उपलब्ध है।
समझौते के दस्तावेज़ सार्वजनिक नहीं
यशवर्धन सिंह ने स्पष्ट किया कि यदि ऐसा है, तो सरकार को उस पोर्टल का नाम बताना चाहिए। उन्होंने कहा, "स्वयं केंद्रीय जल आयोग (CWC), अपर यमुना रिवर बोर्ड (UYRB) तथा राजस्थान सरकार के आधिकारिक पोर्टलों पर इस दस्तावेज़ को खोजा, लेकिन यह कहीं भी उपलब्ध नहीं मिला।"
इस मामले में जानकारी प्राप्त करने के प्रयासों का उल्लेख करते हुए उन्होंने बताया कि 29 मई 2026 को अपर यमुना रिवर बोर्ड के समक्ष एक आरटीआई (Registration No. UYRBD/R/E/26/00011) दायर की गई थी।
इस आरटीआई के माध्यम से परियोजना की वर्तमान स्थिति और संबंधित दस्तावेज़ों की जानकारी मांगी गई थी, लेकिन आज तक इसका कोई उत्तर प्राप्त नहीं हुआ है।
न्यायालय में भी स्थिति स्पष्ट नहीं
सिंह ने इस बात पर भी जोर दिया कि वर्ष 2017 से राजस्थान उच्च न्यायालय में लंबित उनकी जनहित याचिका की हालिया सुनवाई के दौरान भी राज्य सरकार ने कोई ठोस जानकारी नहीं दी।
उन्होंने कहा कि सरकार ने न तो नए MOA की प्रति न्यायालय के समक्ष प्रस्तुत की और न ही परियोजना की अद्यतन स्टेटस रिपोर्ट दाखिल की। यह सरकार की मंशा पर सवाल खड़े करता है।
सरकार से सीधी मांग
यशवर्धन सिंह ने सरकार की पारदर्शिता पर सवाल उठाते हुए कहा, "यदि सरकार वास्तव में मानती है कि यह परियोजना शेखावाटी के लिए ऐतिहासिक है, तो फिर पारदर्शिता से परहेज़ क्यों?"
समिति ने सरकार से कुछ स्पष्ट मांगें की हैं:
- नवीनतम MOA की प्रमाणित प्रति तत्काल सार्वजनिक की जाए।
- राजस्थान उच्च न्यायालय में लंबित जनहित याचिका में MOA एवं विस्तृत स्टेटस रिपोर्ट प्रस्तुत की जाए।
- सरकार शपथपूर्वक बताए कि निर्माण कार्य किस तिथि से शुरू होगा।
उन्होंने अंत में कहा कि यमुना जल परियोजना किसी राजनीतिक दल का नहीं, बल्कि शेखावाटी के लाखों लोगों के जल अधिकार का विषय है। उन्होंने जोर देकर कहा, "लोकतंत्र में जनता को जानकारी देना सरकार का कर्तव्य है, कृपा नहीं। पारदर्शिता से ही विश्वास बनता है।"