CEC नियुक्ति पर अभिषेक का हमला: चुनाव आयोग की नियुक्ति पर अभिषेक बनर्जी ने उठाए सवाल
टीएमसी सांसद अभिषेक बनर्जी ने मुख्य चुनाव आयुक्त की नियुक्ति प्रक्रिया की निष्पक्षता पर सवाल उठाए हैं। उन्होंने चुनाव आयोग के कामकाज की न्यायिक जांच की मांग की है।
HIGHLIGHTS
- अभिषेक बनर्जी ने मुख्य चुनाव आयुक्त की नियुक्ति प्रक्रिया की निष्पक्षता पर सवाल उठाए हैं।
- टीएमसी सांसद ने CEC ज्ञानेश कुमार को हटाने और कोर्ट की निगरानी में जांच की मांग की।
- सुप्रीम कोर्ट में 2023 के नियुक्ति कानून को चुनौती देने वाली याचिकाओं पर सुनवाई जारी है।
- चुनाव आयोग ने दो आयुक्तों के बीच कथित असहमति की खबरों को सिरे से खारिज कर दिया है।
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तृणमूल कांग्रेस (TMC) के वरिष्ठ नेता और सांसद अभिषेक बनर्जी ने मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) की नियुक्ति प्रक्रिया पर तीखा हमला बोला है।
उन्होंने कहा कि यदि किसी व्यक्ति को सीधे प्रधानमंत्री द्वारा नियुक्त किया जाता है, तो यह स्वाभाविक है कि वह प्रधानमंत्री के लिए ही काम करेगा।
बनर्जी का यह बयान चुनाव आयोग की संस्थागत स्वतंत्रता को लेकर विपक्ष द्वारा उठाए जा रहे गंभीर सवालों के बीच आया है।
जांच और जवाबदेही की मांग
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अभिषेक बनर्जी ने मौजूदा विवाद के बीच मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को उनके पद से तत्काल हटाने की मांग की है।
उन्होंने चुनाव आयोग के कामकाज की अदालत की निगरानी में उच्च स्तरीय जांच कराने पर जोर दिया है।
टीएमसी सांसद के अनुसार, लोकतांत्रिक प्रक्रिया से जुड़े इन गंभीर सवालों की गहनता से जांच होनी चाहिए।
उन्होंने स्पष्ट किया कि इस पूरे मामले में जिम्मेदार लोगों की जवाबदेही तय की जानी अत्यंत आवश्यक है।
सुप्रीम कोर्ट में नियुक्ति कानून को चुनौती
मुख्य चुनाव आयुक्त और अन्य चुनाव आयुक्तों की नियुक्ति प्रक्रिया का मामला वर्तमान में देश की सर्वोच्च अदालत में लंबित है।
सुप्रीम कोर्ट में 'मुख्य चुनाव आयुक्त और अन्य चुनाव आयुक्त (नियुक्ति, सेवा की शर्तें और कार्यकाल) अधिनियम, 2023' को चुनौती दी गई है।
इस नए कानून की सबसे विवादित विशेषता यह है कि इसमें नियुक्ति करने वाली चयन समिति से भारत के मुख्य न्यायाधीश को बाहर रखा गया है।
संविधान पीठ को भेजने पर विचार
23 सितंबर 2026 को सुप्रीम कोर्ट की दो सदस्यीय पीठ ने इस महत्वपूर्ण मामले पर सुनवाई की थी।
सुनवाई के दौरान इस मामले को पांच न्यायाधीशों वाली संविधान पीठ के पास भेजने के सवाल पर न्यायाधीशों की अलग-अलग राय सामने आई।
चुनाव आयोग के भीतर कथित असहमति का विवाद
हाल ही में मीडिया रिपोर्टों में चुनाव आयोग के भीतर आंतरिक मतभेदों और असहमति का दावा किया गया था।
इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के मुताबिक, चुनाव आयुक्त संधू और जोशी ने कई महत्वपूर्ण प्रशासनिक मुद्दों पर अपनी आपत्तियां दर्ज कराई थीं।
आयुक्तों की मुख्य आपत्तियां
- मतदाता पंजीकरण की पूरी प्रक्रिया पर सवाल उठाए गए।
- मतदाता सूची से नाम हटाने और उन्हें पुनः बहाल करने के तरीके पर आपत्ति।
- मतदाताओं से जुड़ी अपीलों के निपटारे में पारदर्शिता की कमी।
- चुनावी डेटाबेस की निगरानी और उसकी सुरक्षा को लेकर चिंताएं।
रिपोर्ट में यह भी दावा किया गया कि कुछ महत्वपूर्ण मामलों में दोनों आयुक्तों ने फैसलों की जानकारी न दिए जाने पर सवाल उठाए थे।
चुनाव आयोग का आधिकारिक स्पष्टीकरण
चुनाव आयोग ने आंतरिक असहमति और मतभेदों के इन सभी दावों को सिरे से खारिज कर दिया है।
आयोग ने आधिकारिक बयान में स्पष्ट किया कि उसके सभी अंतिम निर्णय तीनों चुनाव आयुक्तों की सर्वसम्मति से ही लिए गए हैं।
आयोग के अनुसार, किसी भी संस्थागत विचार-विमर्श के दौरान अलग-अलग सुझाव, टिप्पणियां या आपत्तियां आना एक सामान्य प्रक्रिया का हिस्सा है।
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