अजमेर | अजमेर के जिला कलेक्टर ने 'वंदे गंगा जल संरक्षण' अभियान के दौरान आना सागर झील की स्वच्छता को लेकर एक चौंकाने वाला बयान दिया है। उनके इस दावे ने शहर में नई बहस छेड़ दी है।
कलेक्टर साहब का ‘उल्टा चश्मा’: अजमेर: आना सागर को बताया दुनिया की सबसे स्वच्छ झील!
कलेक्टर ने आना सागर की तुलना विदेशी झीलों से की, जबकि गंदगी से मरीं मछलियाँ।
HIGHLIGHTS
- कलेक्टर ने आना सागर झील को दुनिया की सबसे स्वच्छ झीलों में से एक बताया।
- पत्रकारों द्वारा गंदगी का मुद्दा उठाने पर कलेक्टर ने नजरिए का हवाला दिया।
- झील की सफाई और ऑक्सीजन लेवल के लिए प्रशासन करोड़ों रुपये खर्च कर रहा है।
- सफाई के दावों के बीच झील में मछलियों के मरने से प्रशासन पर सवाल उठे।
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कलेक्टर का ‘उल्टा चश्मा’ और विदेशी झीलें
जब पत्रकारों ने झील में पसरी गंदगी का मुद्दा उठाया, तो कलेक्टर साहब ने इसे देखने के नजरिए का फर्क बताया। उन्होंने कहा कि स्थानीय होने के नाते आपको केवल कमियां ही नजर आती हैं।
कलेक्टर महोदय ने पत्रकारों को सुझाव दिया कि उन्हें अंतरराष्ट्रीय स्तर की झीलों का भ्रमण करना चाहिए। तभी वे समझ पाएंगे कि आना सागर वास्तव में दुनिया की सबसे साफ झीलों में से एक है।
इस बयान पर पत्रकारों के बीच दबी जुबान में चर्चा शुरू हो गई। कुछ ने तंज कसते हुए कहा कि शायद साहब रूस और कैमरून की विवादित झीलों का दौरा करके आए हैं।
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"आप जब दूसरे देशों में जाकर देखेंगे तब पता लगेगा कि आना सागर दुनिया की ‘क्लीनेस्ट’ झीलों में से एक है।"
करोड़ों का बजट और जमीनी हकीकत
प्रशासन का दावा है कि नगर निगम झील के रखरखाव पर करोड़ों रुपये खर्च कर रहा है। इस भीषण गर्मी में भी टीमें स्वच्छता बनाए रखने के लिए दिन-रात मेहनत कर रही हैं।
झील में ऑक्सीजन का स्तर बनाए रखने के लिए फव्वारे भी चलाए जा रहे हैं। लेकिन विडंबना देखिए, करोड़ों के खर्च के बावजूद झील में मछलियों के मरने का सिलसिला जारी है।
कलेक्टर ने प्रेस वार्ता के अंत में हाथ झाड़ते हुए सारा दोष जनता पर मढ़ दिया। उन्होंने नागरिकों से अपील की कि वे खुद जिम्मेदारी समझें और झील को गंदा न करें।
यह स्थिति प्रशासनिक दावों और धरातल की सच्चाई के बीच के बड़े अंतर को दर्शाती है। अब देखना होगा कि जनता की भागीदारी और सरकारी बजट मिलकर आना सागर की तस्वीर कब बदलते हैं।
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