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राजस्थान

अलवर: नेमप्लेट पर सियासी घमासान: अलवर में नेमप्लेट विवाद: कलेक्टर ने जिला प्रमुख को निकाला बाहर

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अलवर में बैठक के दौरान नेमप्लेट न होने पर जिला प्रमुख को बाहर जाने का फरमान सुनाया गया।

HIGHLIGHTS

  • अलवर के मिनी सचिवालय में बैठक के दौरान नेमप्लेट न होने पर विवाद छिड़ गया।
  • कलेक्टर ने जिला प्रमुख को कमरे से बाहर जाने का आदेश दिया, जिससे स्थिति तनावपूर्ण हो गई।
  • केंद्रीय मंत्री भूपेंद्र यादव ने दखल देते हुए जिला प्रमुख को वापस बैठक में बिठाया।
  • कलेक्टर और जिला प्रमुख के बीच पुरानी अनबन को इस घटना की मुख्य वजह माना जा रहा है।
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अलवर | राजस्थान के अलवर जिले में एक हाई-प्रोफाइल बैठक के दौरान अजीबोगरीब स्थिति पैदा हो गई। मिनी सचिवालय में आयोजित इस मीटिंग में जिला प्रमुख छिल्लर साहब को उनके नाम की नेम-प्लेट न होने के कारण बाहर का रास्ता दिखा दिया गया।

बैठक में केंद्रीय मंत्री भूपेंद्र यादव, मुख्य सचिव और कई विधायक मौजूद थे। सबकी टेबल पर नेम-प्लेट लगी थी, लेकिन जिला प्रमुख के लिए कोई जगह तय नहीं की गई थी, जिससे वे काफी असहज महसूस कर रहे थे।

जब छिल्लर साहब अपनी जगह ढूंढ रहे थे, तब कलेक्टर साहिबा ने स्पष्ट शब्दों में फरमान सुनाया कि जिनकी नेम-प्लेट नहीं लगी है, वे कमरे से बाहर चले जाएं। यह सुनते ही जिला प्रमुख को गहरा धक्का लगा।

नेमप्लेट के बहाने चली 'सियासी चाल'

अपमानित होकर जब जिला प्रमुख बाहर निकले, तभी केंद्रीय मंत्री भूपेंद्र यादव वहां पहुंचे। उन्होंने छिल्लर साहब को बाहर खड़ा देख कारण पूछा और फिर उन्हें सम्मानपूर्वक अपने साथ वापस मीटिंग हॉल के अंदर ले गए।

नाम में क्या रखा है, यह शेक्सपियर ने कहा था, लेकिन अलवर की इस बैठक में नाम और नेम-प्लेट ही स्वाभिमान की लड़ाई बन गई।

मंत्री जी ने उन्हें एक गैर-हाजिर विधायक की कुर्सी पर बैठने का इशारा किया। इस पूरे घटनाक्रम ने कलेक्टर और जिला प्रमुख के बीच चल रही खींचतान को सार्वजनिक कर दिया है, जिससे प्रशासनिक गलियारों में हलचल है।

पुरानी अनबन का परिणाम?

सूत्रों के अनुसार, कलेक्टर और जिला प्रमुख के बीच पहले से ही अनबन चल रही थी। हाल ही में एक साधारण सभा की बैठक में कलेक्टर की अनुपस्थिति पर जिला प्रमुख ने कड़ी नाराजगी जताई थी।

माना जा रहा है कि नेम-प्लेट का यह विवाद उसी पुरानी रंजिश का एक नया अध्याय है। अब जिला प्रशासन और स्थानीय जनप्रतिनिधियों के बीच का यह टकराव पूरे राजस्थान के राजनीतिक गलियारों में चर्चा का विषय बना हुआ है।

इस घटना ने ब्यूरोक्रेसी और राजनीति के बीच की बढ़ती खाई को उजागर किया है। अब देखना यह है कि आने वाले समय में जिले के विकास कार्यों पर इस आपसी खींचतान का क्या असर पड़ता है।

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