माउंट आबू अब हुआ 'आबू राज': राजस्थान के इकलौते हिल स्टेशन माउंट आबू का नाम बदला, अब 'आबू राज' के नाम से जाना जाएगा

राजस्थान सरकार ने माउंट आबू का नाम बदलकर 'आबू राज' करने का ऐतिहासिक निर्णय लिया है। मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा की इस घोषणा से स्थानीय लोगों और जनप्रतिनिधियों में भारी उत्साह है।

माउंट आबू | राजस्थान के पर्यटन मानचित्र पर एक विशिष्ट स्थान रखने वाले माउंट आबू के लिए आज का दिन ऐतिहासिक साबित हुआ है। राज्य के मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने विधानसभा में एक बड़ी घोषणा करते हुए इस विश्वप्रसिद्ध हिल स्टेशन का नाम बदलकर ‘आबू राज’ करने का निर्णय लिया है। इस फैसले के बाद से ही आबू पर्वत सहित पूरे सिरोही जिले में हर्षोल्लास का माहौल है।

ऐतिहासिक मांग हुई पूरी

माउंट आबू का नाम बदलने की मांग दशकों पुरानी थी। स्थानीय लोगों, संतों और विद्वानों का मानना था कि 'माउंट' शब्द औपनिवेशिक विरासत का प्रतीक है, जबकि 'आबू राज' इस क्षेत्र की प्राचीन अस्मिता और गौरवशाली इतिहास को दर्शाता है। क्षेत्रीय विधायक समाराम गरासिया और राज्य मंत्री ओटा राम देवासी ने इस मांग को शासन के समक्ष प्रमुखता से रखा था। इसके अलावा, क्षेत्र के सामाजिक संगठनों और धार्मिक संस्थाओं ने भी इस बदलाव के लिए निरंतर प्रयास किए थे, जिसे अब सरकार ने स्वीकार कर लिया है।

सांस्कृतिक और धार्मिक महत्व

‘आबू राज’ नाम केवल एक प्रशासनिक बदलाव नहीं है, बल्कि यह क्षेत्र की सांस्कृतिक और धार्मिक जड़ों से गहरा जुड़ाव रखता है। स्थानीय निवासियों का कहना है कि यह नाम पौराणिक कथाओं और ऐतिहासिक ग्रंथों में वर्णित आबू क्षेत्र की गरिमा को पुनर्जीवित करेगा। इससे क्षेत्र की एक नई पहचान बनेगी जो हमारी आने वाली पीढ़ियों को अपनी मिट्टी के गौरव से जोड़े रखेगी।

पर्यटन और विकास पर सकारात्मक प्रभाव

विशेषज्ञों का मानना है कि इस नाम परिवर्तन से क्षेत्र के पर्यटन क्षेत्र में भी सकारात्मक बदलाव देखने को मिलेंगे।

  • पर्यटन ब्रांडिंग में 'आबू राज' नाम से एक नई और विशिष्ट पहचान मिलेगी।
  • धार्मिक और आध्यात्मिक पर्यटन को बढ़ावा मिलेगा, क्योंकि यह नाम भारतीय संस्कृति के अधिक निकट है।
  • स्थानीय हस्तशिल्प और लोक संस्कृति को वैश्विक स्तर पर एक नया और मजबूत मंच प्राप्त होगा।

जनता में उत्साह और जश्न का माहौल

जैसे ही विधानसभा से नाम बदलने की आधिकारिक खबर आई, माउंट आबू के बाजारों में लोग सड़कों पर उतर आए। लोगों ने ढोल-नगाड़ों के साथ आतिशबाजी की और एक-दूसरे का मुंह मीठा कराकर बधाई दी। स्थानीय जनप्रतिनिधियों ने मुख्यमंत्री का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि यह निर्णय क्षेत्र के विकास में मील का पत्थर साबित होगा। इस ऐतिहासिक फैसले ने न केवल स्थानीय निवासियों की भावनाओं को सम्मान दिया है, बल्कि यह राजस्थान की समृद्ध विरासत को संजोने की दिशा में एक साहसिक कदम है।