राजस्थान वोटर लिस्ट विवाद: राजस्थान में मतदाता सूची पर घमासान: डोटासरा और जूली ने सरकार पर लगाया वोट चोरी का आरोप
राजस्थान कांग्रेस ने मतदाता सूची पुनरीक्षण में धांधली का आरोप लगाते हुए प्रशासन और बीजेपी सरकार को घेरा है।
जयपुर | राजस्थान की सियासत में इन दिनों मतदाता सूची पुनरीक्षण को लेकर एक बड़ा विवाद खड़ा हो गया है। प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष गोविंद सिंह डोटासरा और नेता प्रतिपक्ष टीकाराम जूली ने सरकार पर गंभीर आरोप लगाए हैं।
डोटासरा ने जयपुर में एक संयुक्त प्रेस कॉन्फ्रेंस को संबोधित करते हुए प्रशासन पर वोट चोरी का आरोप मढ़ा। उन्होंने कहा कि प्रदेश में लोकतंत्र के साथ खिलवाड़ किया जा रहा है।
अधिकारियों को सख्त चेतावनी
पीसीसी चीफ डोटासरा ने अपने तीखे अंदाज में जिला कलेक्टर्स को सीधी चेतावनी जारी की है। उन्होंने कहा कि अगर नियमों के विरुद्ध जाकर कोई गड़बड़ी की गई तो अंजाम बुरा होगा।
डोटासरा ने साफ तौर पर कहा कि वे गलत काम करने वाले अधिकारियों की पुंगी बजा देंगे। उन्होंने आरोप लगाया कि बीजेपी कार्यकर्ता बीएलओ पर निरंतर दबाव बना रहे हैं।
उन्होंने लक्ष्मणगढ़ विधानसभा क्षेत्र का उदाहरण देते हुए एक स्थानीय बीजेपी कार्यकर्ता का जिक्र किया। डोटासरा का दावा है कि वह कार्यकर्ता बीएलओ के पास जबरन फॉर्म फेंककर नाम जुड़वा रहा है।
ओटीपी और बल्क फॉर्म का खेल
कांग्रेस अध्यक्ष ने प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान एक बहुत ही चौंकाने वाला खुलासा किया है। उन्होंने बताया कि कुछ अधिकारी बीएलओ का ओटीपी लेकर खुद ही काम कर रहे हैं।
डोटासरा के अनुसार इस ओटीपी के जरिए बल्क में मतदाताओं के नाम जोड़े जा रहे हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि हर बूथ पर 50 नए नाम जोड़ने का एक गुप्त लक्ष्य दिया गया है।
कांग्रेस का आरोप है कि प्रशासन पहले ही तय कर चुका है कि किसका नाम काटना है और किसका जोड़ना है। इसे उन्होंने सीधे तौर पर लोकतंत्र की हत्या करार दिया है।
डोटासरा ने प्रदेशभर के कांग्रेस कार्यकर्ताओं और बीएलए को कल सुबह 11 बजे सक्रिय होने का निर्देश दिया है। उन्होंने सभी को एसडीएम कार्यालय पहुंचकर बल्क फॉर्म्स की जानकारी मांगने को कहा है।
टीकाराम जूली के गंभीर सवाल
नेता प्रतिपक्ष टीकाराम जूली ने भी इस मामले में आंकड़ों के जरिए सरकार की घेराबंदी की है। उन्होंने अपने खुद के निर्वाचन क्षेत्र का हवाला देते हुए कुछ चौंकाने वाले तथ्य रखे।
जूली ने कहा कि वे करीब 28 हजार वोटों के अंतर से चुनाव जीते थे। अब उनके क्षेत्र में ठीक उतने ही यानी 28 हजार वोट काट दिए गए हैं जो एक बड़ा संदेह पैदा करता है।
उन्होंने प्रशासन से सवाल किया कि ये नए नाम जोड़ने वाले फॉर्म आखिर कौन जमा कर रहा है। जूली ने मांग की है कि सभी सरकारी दफ्तरों के सीसीटीवी फुटेज तुरंत जब्त किए जाएं।
बिना मोबाइल नंबर के फर्जीवाड़ा
टीकाराम जूली ने आरोप लगाया कि 500-500 की संख्या में प्रिंटेड फॉर्म्स के जरिए नाम काटने की साजिश हो रही है। इन फॉर्म्स पर अनिवार्य मोबाइल नंबर तक अंकित नहीं हैं।
उन्होंने कहा कि नियमों के अनुसार मतदाता सूची के फॉर्म में मोबाइल नंबर होना बहुत जरूरी है। जूली ने इसे एक सुनियोजित फर्जीवाड़ा करार दिया है और उच्च स्तरीय जांच की मांग की है।
नेता प्रतिपक्ष ने कहा कि अगर बीजेपी को इसी तरह चुनाव जीतना है तो फिर चुनाव कराने की जरूरत ही क्या है। उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि फिर तो चुनाव की लोकतांत्रिक प्रक्रिया ही बंद कर देनी चाहिए।
भविष्य में होगी कड़ी कार्रवाई
जूली ने कलेक्टर्स को आगाह किया कि वे बीजेपी नेताओं को फॉर्म वापस ले जाने की अनुमति न दें। उन्होंने कहा कि ये फॉर्म अब सरकारी संपत्ति बन चुके हैं और इनका बाहर जाना पूरी तरह अवैध है।
उन्होंने अधिकारियों को याद दिलाया कि सत्ता हमेशा एक जैसी नहीं रहती है। जो अधिकारी आज गलत काम कर रहे हैं उन्हें भविष्य में जवाबदेही तय होने पर बख्शा नहीं जाएगा।
कांग्रेस पार्टी ने इस मुद्दे को लेकर अब जनता के बीच जाने का फैसला किया है। आने वाले दिनों में इस मामले को लेकर राजस्थान की राजनीति और अधिक गरमाने के पूरे आसार हैं।