अरावली संरक्षण: सुप्रीम कोर्ट में आज फिर होगी बड़ी सुनवाई: अरावली पर्वतमाला मामले में सुप्रीम कोर्ट में आज फिर सुनवाई, 100 मीटर की ऊंचाई वाले नियम पर लगी है रोक
अरावली पर्वतमाला मामले में सुप्रीम कोर्ट आज फिर सुनवाई करेगा। कोर्ट ने पिछली बार पहाड़ियों की ऊंचाई संबंधी विवादास्पद नियम पर रोक लगा दी थी।
नई दिल्ली | अरावली पर्वतमाला के संरक्षण और उसकी परिभाषा को लेकर छिड़े कानूनी विवाद में आज सुप्रीम कोर्ट में एक बार फिर महत्वपूर्ण सुनवाई होने जा रही है। मुख्य न्यायाधीश (CJI) सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली पीठ इस मामले पर संज्ञान लेकर सुनवाई कर रही है। पिछली सुनवाई के दौरान, अदालत ने केंद्रीय पर्यावरण मंत्रालय की विशेषज्ञ समिति की उस सिफारिश पर रोक लगा दी थी, जिसमें केवल 100 मीटर या उससे अधिक ऊंचाई वाली पहाड़ियों को ही अरावली का हिस्सा मानने का सुझाव दिया गया था।
अदालत ने स्पष्ट किया था कि विशेषज्ञ समिति की सिफारिशों और अदालत की पिछली टिप्पणियों के गलत अर्थ निकाले जा रहे हैं, जिन्हें स्पष्ट करने की आवश्यकता है। सुप्रीम कोर्ट ने निर्देश दिया था कि अगली सुनवाई तक ये सिफारिशें प्रभावी नहीं होंगी। दरअसल, 20 नवंबर 2025 को आए इस नए सुझाव के बाद राजस्थान, हरियाणा और दिल्ली-एनसीआर में बड़े पैमाने पर विरोध प्रदर्शन शुरू हो गए थे।
पर्यावरणविदों और विपक्षी दलों का तर्क है कि यदि छोटी पहाड़ियों को अरावली की श्रेणी से बाहर कर दिया गया, तो इससे अवैध खनन को बढ़ावा मिलेगा। यह पारिस्थितिकी तंत्र के लिए एक गंभीर खतरा पैदा कर सकता है। अरावली पर्वतमाला को गोदावर्मन और एम.सी. मेहता जैसे ऐतिहासिक मामलों के तहत व्यापक कानूनी संरक्षण प्राप्त है।
विपक्ष ने आरोप लगाया है कि यह नियम भू-माफियाओं को लाभ पहुंचाने के लिए लाया गया है। वहीं, केंद्र सरकार ने इन आरोपों को खारिज करते हुए कहा है कि विपक्ष भ्रम फैला रहा है और सरकार अरावली के संरक्षण के प्रति पूरी तरह प्रतिबद्ध है। 1985 से चल रहे इस पुराने मामले में आज की सुनवाई अरावली के भविष्य और पर्यावरण संतुलन के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण मानी जा रही है।