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राजनीति

CM भजनलाल का बड़ा फैसला: नागौर लिग्नाइट माइंस तुरंत शुरू होगी

जोगेन्द्र सिंह शेखावत

राजस्थान के मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने कागजी अड़चनों के कारण बंद पड़ी नागौर लिग्नाइट माइंस को तत्काल शुरू करने के निर्देश दिए हैं, जिससे भीलवाड़ा के टेक्सटाइल हब को राहत मिलेगी।

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HIGHLIGHTS

  • मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने नागौर की आरएसएमएम लिग्नाइट माइंस को तत्काल प्रभाव से शुरू करने के निर्देश दिए हैं।
  • कागजी अड़चनों और अनुमतियों के नवीनीकरण में देरी के कारण माइंस का संचालन लंबे समय से ठप पड़ा था।
  • इस फैसले से भीलवाड़ा के कपड़ा उद्योग को ₹6,000 प्रति टन की दर पर सस्ता लिग्नाइट उपलब्ध हो सकेगा।
  • भीलवाड़ा को प्रतिमाह 50 हजार टन लिग्नाइट मिलने से ईंधन संकट और उत्पादन लागत में कमी आएगी।
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भीलवाड़ा | राजस्थान के मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने प्रदेश के कपड़ा उद्योग को बड़ी राहत देते हुए एक महत्वपूर्ण निर्णय लिया है। उन्होंने नागौर स्थित आरएसएमएम लिग्नाइट माइंस को तत्काल प्रभाव से दोबारा शुरू करने के प्रशासनिक निर्देश जारी किए हैं।

भीलवाड़ा के टेक्सटाइल हब पर गहराता संकट

देश के प्रमुख टेक्सटाइल हब भीलवाड़ा का कपड़ा प्रोसेस उद्योग इन दिनों ईंधन की कमी और आसमान छूती कीमतों से जूझ रहा है। ईंधन की उपलब्धता घटने से उत्पादन लागत में बेतहाशा बढ़ोतरी हुई है।

लागत बढ़ने के कारण भीलवाड़ा के उद्यमियों के लिए वैश्विक और घरेलू बाजार में प्रतिस्पर्धा करना चुनौतीपूर्ण हो गया था। इसी संकट के बीच नागौर माइंस का बंद होना दोहरी मार साबित हुआ।

कागजी अड़चनों के कारण ठप था संचालन

नागौर स्थित राजस्थान स्टेट माइंस एंड मिनरल्स लिमिटेड (आरएसएमएम) की लिग्नाइट माइंस की नीलामी प्रक्रिया पहले ही पूरी हो चुकी थी। हालांकि, प्रशासनिक और पर्यावरणीय अनुमतियों के नवीनीकरण में देरी से काम रुक गया।

यदि समय रहते आवश्यक कागजी प्रक्रिया पूरी कर ली जाती, तो माइंस के संचालन में यह गतिरोध उत्पन्न नहीं होता। माइंस बंद होते ही बाजार में स्थानीय लिग्नाइट की किल्लत पैदा हो गई।

ईंधन की कीमतों का गणित और उद्यमियों को राहत

भीलवाड़ा के कपड़ा उद्योगों में ऊर्जा के लिए मुख्य रूप से घरेलू कोयले और बीकानेर के लिग्नाइट का उपयोग होता है। वर्तमान में इनकी कीमतें ₹8,500 से ₹12,000 प्रति टन तक पहुंच गई हैं।

इसके विपरीत, नागौर के लिग्नाइट की कीमत मात्र ₹6,000 प्रति टन होने का अनुमान है। नागौर से भीलवाड़ा की दूरी कम होने के कारण परिवहन खर्च में भी बड़ी बचत होगी।

आयातित कोयले की किल्लत और बीकानेर पर दबाव

इंडोनेशिया से आयात होने वाले कोयले की आपूर्ति वैश्विक कारणों से बुरी तरह प्रभावित हुई है। अंतरराष्ट्रीय बाजार में कोयले की कमी से स्थानीय स्तर पर बीकानेर की माइंस पर दबाव बढ़ गया था।

  • भीलवाड़ा में प्रतिमाह लगभग 75 हजार टन कोयले और लिग्नाइट की खपत होती है।
  • नागौर से प्रतिमाह लगभग 50 हजार टन लिग्नाइट मिलने की उम्मीद है।
  • इससे उत्पादन लागत में कमी आएगी और उद्योगों को संजीवनी मिलेगी।

लघु उद्योग भारती ने उठाया मुद्दा

लघु उद्योग भारती के प्रतिनिधिमंडल ने राष्ट्रीय संगठन महामंत्री प्रकाश चंद्र के माध्यम से मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा से विशेष आग्रह किया था। उन्होंने मुख्यमंत्री को वस्तुस्थिति से अवगत कराया।

मुख्यमंत्री ने उद्योगों के हित में संवेदनशीलता दिखाते हुए नागौर माइंस को तत्काल शुरू कराने के निर्देश दिए हैं। इससे संकट से जूझ रहे कपड़ा उद्योग को बड़ी राहत मिलने की उम्मीद जगी है।

*Edit with Google AI Studio

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