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राजस्थान

बीकानेर की बेटियों का फुटबॉल कमाल: रेगिस्तान में बकरियां चराने वाली बेटियां बनीं फुटबॉल स्टार

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ढींगसरी गांव की बेटियों ने कोच के त्याग से फुटबॉल में रचा इतिहास।

HIGHLIGHTS

  • मुन्नी भांभू भारतीय अंडर-17 महिला फुटबॉल टीम की मुख्य गोलकीपर बनीं।
  • कोच विक्रम सिंह राजवी ने एकेडमी के लिए अपनी 15 बीघा पुश्तैनी जमीन बेची।
  • राजस्थान ने 60 साल बाद नेशनल फुटबॉल ट्रॉफी जीती, टीम में 12 लड़कियां ढींगसरी की थीं।
  • गांव में सवा करोड़ की लागत से आधुनिक हॉस्टल और ट्रेनिंग सेंटर बनाया गया है।
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बीकानेर | राजस्थान के बीकानेर का ढींगसरी गांव आज नई मिसाल है। यहां की बेटियां, जो कभी रेगिस्तान में बकरियां चराती थीं, आज फुटबॉल के मैदान में अंतरराष्ट्रीय स्तर पर देश का नाम रोशन कर रही हैं।

मुन्नी भांभू इस गांव की वह चमकती सितारा हैं, जिन्होंने 27 साल बाद राजस्थान से भारतीय महिला फुटबॉल टीम में जगह बनाई। वह आज अंडर-17 टीम की मुख्य गोलकीपर के रूप में खेल रही हैं।

मुन्नी की यह यात्रा आसान नहीं थी। संसाधनों के अभाव में उन्होंने फटे जूतों के साथ अभ्यास शुरू किया था। आज उन्हें 'SAFF U-19 महिला चैंपियनशिप' में सर्वश्रेष्ठ गोलकीपर का पुरस्कार मिल चुका है।

कोच विक्रम सिंह राजवी का ऐतिहासिक त्याग

इस बदलाव की नींव कोच विक्रम सिंह राजवी ने रखी। साल 2020 में जब गांव के लड़कों ने खेल में रुचि नहीं दिखाई, तो उन्होंने बेटियों को मैदान में उतारने का साहसिक फैसला लिया।

शुरुआत में गांव वालों ने लड़कियों के शॉर्ट्स पहनकर खेलने का कड़ा विरोध किया। कोच ने समाज की सोच बदलने के लिए अपने ही परिवार की महिलाओं को मैदान पर तैनात किया था।

बेटियों के सपनों को उड़ान देने के लिए कोच ने अपनी 15 बीघा पुश्तैनी जमीन बेच दी। उस राशि से उन्होंने गांव में ही दो आधुनिक फुटबॉल मैदान और विश्वस्तरीय सुविधाएं विकसित कीं।

"कई परिवारों ने लड़कियों को मैदान में भेजने से मना कर दिया था। काफी समझाने के बाद ही बेटियों को खेलने भेजने के लिए ग्रामीण राजी हुए।" - विक्रम सिंह राजवी

60 साल बाद लौटा गांव का गौरव

साल 2024 में राजस्थान की लड़कियों ने 60 साल बाद नेशनल फुटबॉल ट्रॉफी जीतकर इतिहास रच दिया। इस विजेता टीम की 22 खिलाड़ियों में से 12 बेटियां अकेले इसी ढींगसरी गांव की थीं।

यह एक सुखद संयोग था कि कोच विक्रम सिंह के पिता और अर्जुन अवॉर्डी मगन सिंह राजवी ने 60 साल पहले जो नेशनल ट्रॉफी जीती थी, उसे अब गांव की बेटियों ने हासिल किया।

समाज और सरकार का मिला साथ

आज ढींगसरी में 100 से अधिक बेटियां ट्रेनिंग ले रही हैं। स्थानीय व्यापारियों और केंद्र सरकार के सहयोग से यहां करीब सवा करोड़ की लागत का आधुनिक हॉस्टल और सोलर प्लांट भी स्थापित किया गया है।

केंद्रीय मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत और पूर्व मंत्री देवी सिंह भाटी जैसे नेताओं के प्रयासों से इस एकेडमी को बड़ी मदद मिली है। अब यहां की बेटियों को ब्रांडेड स्पोर्ट्स किट उपलब्ध कराई जा रही है।

राजस्थान टीम की कप्तान संजू राजवी कहती हैं कि अब गांव के लोगों की सोच बदल गई है। लोग अब कम उम्र में शादी करने के बजाय अपनी बेटियों को खेल के मैदान में भेजना चाहते हैं।

ढींगसरी की इन बेटियों ने साबित कर दिया कि अटूट हौसले से रेगिस्तान में भी कामयाबी की फसल उगाई जा सकती है। आज यह गांव पूरे देश के लिए फुटबॉल की नई नर्सरी बन गया है।

*Edit with Google AI Studio

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