सीमा पर ईंट भट्ठा सुरक्षा को खतरा: बीकानेर में भारत-पाकिस्तान सीमा के पास ऊंची चिमनी से सुरक्षा को खतरा, कलेक्टर ने एसडीएम से मांगा जवाब

बीकानेर में भारत-पाकिस्तान सीमा के पास ऊंची चिमनी से सुरक्षा को खतरा, कलेक्टर ने एसडीएम से मांगा जवाब
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Highlights

  • सीमा से मात्र ढाई किलोमीटर की दूरी पर 100 फीट से ऊंची चिमनी का निर्माण हुआ है।
  • सुरक्षा एजेंसियों ने इसे पाकिस्तानी ड्रोन और तस्करों के लिए सटीक लैंडमार्क बताया है।
  • बिना पुलिस वेरिफिकेशन के बाहरी राज्यों के श्रमिकों की मौजूदगी ने खतरा बढ़ाया है।
  • बीकानेर कलेक्टर ने खाजूवाला एसडीएम से निर्माण की अनुमति पर रिपोर्ट मांगी है।

बीकानेर | राजस्थान के बीकानेर जिले में भारत-पाकिस्तान अंतरराष्ट्रीय सीमा के पास एक ईंट भट्ठे के निर्माण ने देश की सुरक्षा के लिए गंभीर चुनौती पैदा कर दी है। खाजूवाला क्षेत्र में सीमा से महज ढाई किलोमीटर की दूरी पर 100 फीट से भी ऊंची चिमनी खड़ी कर दी गई है। सुरक्षा एजेंसियों ने इस विशाल निर्माण पर कड़ी आपत्ति दर्ज कराते हुए इसे राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए बड़ा खतरा बताया है। यह चिमनी पाकिस्तान की सीमा चौकियों से साफ दिखाई देती है जिससे तस्करी की आशंका बढ़ गई है।

ड्रोन तस्करी के लिए आसान लैंडमार्क

सुरक्षा एजेंसियों को अंदेशा है कि पाकिस्तानी खुफिया एजेंसियां और तस्कर इस ऊंची चिमनी को एक लैंडमार्क के रूप में इस्तेमाल कर सकते हैं। इससे ड्रोन के जरिए हथियारों और मादक पदार्थों की सटीक डिलीवरी करना बेहद आसान हो जाएगा। गौरतलब है कि खाजूवाला और आसपास के सीमावर्ती क्षेत्रों में पहले भी ड्रोन के जरिए हेरोइन और अवैध हथियारों की तस्करी के कई मामले सामने आ चुके हैं। ऐसी स्थिति में इतनी ऊंची संरचना तस्करों के नेविगेशन को और भी सुगम बना देगी।

श्रमिकों का वेरिफिकेशन और सुरक्षा चूक

इस ईंट भट्ठे पर काम करने वाले बाहरी राज्यों के श्रमिकों का पुलिस वेरिफिकेशन नहीं होना भी एक बड़ी समस्या है। संवेदनशील सीमावर्ती क्षेत्र में बिना जांच के बाहरी लोगों का रहना सुरक्षा के लिहाज से खतरनाक माना जा रहा है। सबसे बड़ा सवाल यह उठ रहा है कि अंतरराष्ट्रीय सीमा के इतने करीब इस तरह के निर्माण की अनुमति आखिर स्थानीय स्तर पर कैसे दे दी गई। स्थानीय सरपंच द्वारा एनओसी जारी करना और प्रशासन की अनदेखी अब जांच के घेरे में है।

कलेक्टर ने मांगी तथ्यात्मक रिपोर्ट

मामला संज्ञान में आने के बाद बीकानेर और श्रीगंगानगर के जिला कलेक्टर सक्रिय हो गए हैं। बीकानेर कलेक्टर ने खाजूवाला एसडीएम से इस पूरे मामले पर तथ्यात्मक रिपोर्ट तलब की है। प्रशासन अब यह जांच कर रहा है कि सीमा के इतने नजदीक निर्माण कार्य की स्वीकृति किन परिस्थितियों में दी गई। सुरक्षा एजेंसियां इस चिमनी को हटाने या इसकी ऊंचाई कम करने की मांग कर रही हैं ताकि सीमा पार से होने वाली संदिग्ध गतिविधियों पर लगाम लगाई जा सके।

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