बीकानेर | नगर निगम महापौर चुनाव में कांग्रेस के स्पष्ट बहुमत के बावजूद मुकाबला बेहद रोचक और त्रिकोणीय हो गया है। कांग्रेस के अधिकृत प्रत्याशी के सामने पार्टी के ही एक अन्य पार्षद ने नामांकन दाखिल कर दिया है, जिससे पार्टी के भीतर सेंधमारी की चुनौती खड़ी हो गई है।
बीकानेर मेयर चुनाव में ट्विस्ट: बहुमत के बावजूद कांग्रेस में बगावत, त्रिकोणीय मुकाबला
बीकानेर नगर निगम में कांग्रेस के 42 पार्षद होने के बावजूद मेयर चुनाव रोचक हो गया है। पार्टी के ही पार्षद नवरतन डागा ने अधिकृत प्रत्याशी अनिल कल्ला के खिलाफ नामांकन भर दिया है, जिससे मुकाबला त्रिकोणीय बन गया है।
HIGHLIGHTS
- बीकानेर मेयर चुनाव में बहुमत के बावजूद कांग्रेस में बगावत।
- अधिकृत प्रत्याशी अनिल कल्ला के खिलाफ नवरतन डागा ने भरा पर्चा।
- सदस्यीय निगम में कांग्रेस के 42, भाजपा के 27 पार्षद हैं।
- निर्दलीय पार्षदों के रुख पर टिका है चुनाव का पूरा गणित।
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इस स्थिति ने भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के लिए भी अवसर के द्वार खोल दिए हैं, जो अब कांग्रेस के आंतरिक मतभेद का फायदा उठाने की कोशिश कर सकती है।
कांग्रेस में सेंधमारी की चुनौती
80 सदस्यीय बीकानेर नगर निगम में कांग्रेस के पास 42 पार्षदों के साथ स्पष्ट बहुमत है। पार्टी ने वार्ड 73 से निर्वाचित अनिल कल्ला को अपना अधिकृत महापौर प्रत्याशी बनाया है। अनिल कल्ला पूर्व मंत्री डॉ. बीडी कल्ला के भतीजे हैं।
लेकिन कांग्रेस की एकजुटता पर तब सवाल खड़े हो गए जब वार्ड 50 से जीते नवरतन डागा ने भी निर्दलीय के तौर पर अपना नामांकन दाखिल कर दिया। इस कदम को पार्टी के भीतर असंतोष और महापौर पद की दावेदारी से जोड़कर देखा जा रहा है।
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क्या है पूरा चुनावी समीकरण?
निगम में कांग्रेस के 42, भाजपा के 27, निर्दलीय 10 और आरएलपी का एक पार्षद है। संख्या बल के हिसाब से कांग्रेस की जीत तय मानी जा रही थी, लेकिन अब समीकरण बदल गए हैं।
भाजपा ने डॉ. सुरेंद्र सिंह शेखावत को अपना प्रत्याशी बनाया है। अब भाजपा की रणनीति कांग्रेस के वोटों में विभाजन कराने और निर्दलीय व अन्य पार्षदों को अपने पक्ष में करने पर टिकी है। यदि कांग्रेस के वोटों में बिखराव होता है, तो चुनाव का परिणाम कुछ भी हो सकता है।
नाम वापसी पर टिकी निगाहें
चुनाव प्रक्रिया के अनुसार, 17 सितंबर को नामांकन पत्रों की जांच होगी और 18 सितंबर नाम वापसी की अंतिम तारीख है। मतदान 21 सितंबर को होगा।
अब सभी की निगाहें 18 सितंबर पर टिकी हैं, जब यह स्पष्ट होगा कि नवरतन डागा अपना नामांकन वापस लेते हैं या नहीं। अगर वह मैदान में बने रहते हैं, तो मुकाबला त्रिकोणीय बना रहेगा और कांग्रेस के लिए अपने पार्षदों को एकजुट रखना सबसे बड़ी चुनौती होगी।