नई दिल्ली | नई दिल्ली में होने वाला आगामी BRICS शिखर सम्मेलन इस बार केवल वैश्विक दक्षिण की राजनीति और अर्थव्यवस्था तक ही सीमित नहीं रहेगा। चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग के संभावित भारत दौरे ने इस आयोजन की अहमियत को कई गुना बढ़ा दिया है।
मोदी-शी की मुलाकात?: 7 साल बाद दिल्ली में मिलेंगे मोदी-शी? BRICS पर नजर
नई दिल्ली में होने वाले BRICS शिखर सम्मेलन में चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग के आने की उम्मीद है। 2020 की गलवान झड़प के बाद यह भारतीय धरती पर पीएम मोदी और शी की पहली संभावित द्विपक्षीय बैठक होगी।
HIGHLIGHTS
- चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग के 12-13 सितंबर को नई दिल्ली में BRICS शिखर सम्मेलन में शामिल होने की उम्मीद है।
- के बाद यह शी की पहली भारत यात्रा और 2020 की गलवान झड़प के बाद भारतीय धरती पर पहली द्विपक्षीय बैठक होगी।
- दोनों देशों के बीच सीमा पर तनाव कम करने और व्यापारिक संबंधों को आगे बढ़ाने पर चर्चा हो सकती है।
- BRICS अब 11 देशों का समूह बन गया है, जो दुनिया की लगभग आधी आबादी का प्रतिनिधित्व करता है।
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BRICS शिखर सम्मेलन और मोदी-शी की मुलाकात
लगभग सात साल के अंतराल के बाद भारतीय धरती पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और शी जिनपिंग के बीच एक संभावित द्विपक्षीय मुलाकात होने जा रही है। इसके बीच सबसे बड़ा सवाल यह है कि क्या दोनों देश सीमा पर तनाव कम होने के बाद अपने रिश्तों को व्यापार, निवेश और तकनीक के अगले स्तर तक ले जाने में सफल होंगे।
सात साल बाद भारत आएंगे शी जिनपिंग
Reuters के अनुसार, चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग के 12-13 सितंबर को नई दिल्ली में आयोजित होने वाले 18वें BRICS शिखर सम्मेलन में भाग लेने की प्रबल उम्मीद है। समाचार एजेंसी ने बताया कि बीजिंग स्थित चीन के विदेश मंत्रालय द्वारा उनके भारत दौरे की औपचारिक घोषणा जल्द ही की जा सकती है।
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संभावित कार्यक्रम के अनुसार, शी शनिवार दोपहर को दिल्ली पहुंच सकते हैं। शाम करीब छह बजे भारत मंडपम में उनकी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मुलाकात संभव है। यदि यह बैठक होती है, तो इसका कूटनीतिक महत्व अत्यंत महत्वपूर्ण होगा।
यह 2019 के बाद शी की पहली भारत यात्रा होगी। साथ ही, 2020 में गलवान घाटी में हुई हिंसक झड़प के बाद दोनों नेताओं की भारतीय जमीन पर यह पहली संभावित द्विपक्षीय बैठक भी होगी।
गलवान के बाद रिश्तों की नई कसौटी
जून 2020 में पूर्वी लद्दाख की गलवान घाटी में हुई हिंसक झड़प ने भारत-चीन संबंधों को एक गहरे संकट में डाल दिया था। इस घटना के बाद वास्तविक नियंत्रण रेखा (LAC) पर भारी सैन्य जमावड़ा हो गया था।
सीमा पर शांति से सामान्य होंगे संबंध?
नई दिल्ली ने स्पष्ट कर दिया था कि जब तक सीमा पर शांति स्थापित नहीं होती, तब तक द्विपक्षीय संबंधों को सामान्य गति देना संभव नहीं होगा। हालांकि, अक्टूबर 2024 में देपसांग और डेमचोक क्षेत्र में गश्त को लेकर बनी सहमति ने तनाव कम करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम उठाया।
इसके बाद कजान में हुए BRICS सम्मेलन के दौरान भी मोदी और शी की मुलाकात हुई थी। अब दिल्ली में होने वाली यह संभावित बैठक इस बात का संकेत दे सकती है कि दोनों देश टकराव को रोकने के लिए बनाए गए संवाद तंत्र को आर्थिक संबंधों तक विस्तार देने के लिए तैयार हैं।
व्यापार और निवेश की असली परीक्षा
भारत और चीन के बीच गहरे राजनीतिक मतभेदों के बावजूद, दोनों देशों की आर्थिक निर्भरता समाप्त नहीं हुई है। भारतीय उद्योगों में चीन से आयातित मशीनरी, इलेक्ट्रॉनिक सामान, औद्योगिक उपकरण और कई महत्वपूर्ण कच्चे माल का बड़े पैमाने पर उपयोग होता है।
वहीं, भारत ने 2020 के बाद से चीनी निवेश और संवेदनशील तकनीकी क्षेत्रों में चीनी कंपनियों की भूमिका पर अपनी निगरानी काफी बढ़ा दी है।
भारत उठा सकता है ये मुद्दे
BRICS शिखर सम्मेलन के दौरान, भारत निवेश संबंधी बाधाओं, कस्टम्स प्रक्रियाओं और हाई-टेक उत्पादों की उपलब्धता जैसे महत्वपूर्ण मुद्दों को उठा सकता है। दुर्लभ-पृथ्वी चुंबकों जैसी आवश्यक औद्योगिक सामग्रियों की आपूर्ति में आने वाली बाधाएं भारतीय ऑटो उद्योग सहित कई अन्य क्षेत्रों के लिए एक बड़ी चिंता का विषय बनी हुई हैं।
बदल चुका है BRICS का स्वरूप
जिस BRIC की अवधारणा को अर्थशास्त्री जिम ओ'नील ने 2001 में चार उभरती अर्थव्यवस्थाओं - ब्राजील, रूस, भारत और चीन - के लिए गढ़ा था, वह अब एक बहुत बड़ा और प्रभावशाली मंच बन चुका है।
11 देशों का शक्तिशाली मंच
दक्षिण अफ्रीका के जुड़ने के बाद यह समूह BRICS बना। 2024 में मिस्र, इथियोपिया, ईरान और संयुक्त अरब अमीरात इसके नए सदस्य बने। इंडोनेशिया 2025 में इसका पूर्ण सदस्य बना। आज यह समूह 11 देशों का एक शक्तिशाली मंच है, जो दुनिया की लगभग आधी आबादी और वैश्विक GDP के लगभग 40 प्रतिशत का प्रतिनिधित्व करता है।