जयपुर | राजस्थान और हरियाणा सरकार के बीच हुए ऐतिहासिक समझौते से रीजनल रैपिड ट्रांजिट सिस्टम (आरआरटीएस) परियोजना को नई संजीवनी मिली है। अब 'नमो भारत' हाई-स्पीड ट्रेन के माध्यम से राजस्थान का अलवर और भिवाड़ी क्षेत्र सीधे दिल्ली से जुड़ जाएगा।
दिल्ली-अलवर रैपिड रेल: नमो भारत ट्रेन अब 160 की रफ्तार से दौड़ेगी रेल
राजस्थान में नमो भारत ट्रेन का विस्तार, दिल्ली से अलवर के बीच 160 किमी की रफ्तार से दौड़ेगी रैपिड रेल।
HIGHLIGHTS
- दिल्ली-अलवर कॉरिडोर 196 किलोमीटर लंबा होगा जिसमें 22 स्टेशन होंगे।
- राजस्थान के हिस्से में 91 किलोमीटर ट्रैक और 6 प्रमुख स्टेशन बनेंगे।
- नमो भारत ट्रेनों की अधिकतम रफ्तार 160 किलोमीटर प्रति घंटा होगी।
- यह सिस्टम मेट्रो, रेलवे और एयरपोर्ट के साथ इंटरलिंक किया जाएगा।
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यह परियोजना दिल्ली से अलवर के बीच के सफर को न केवल तेज बनाएगी, बल्कि सुरक्षित यात्रा की गारंटी भी देगी। इससे एनसीआर के प्रमुख औद्योगिक क्षेत्रों जैसे नीमराणा और बावल को सीधा लाभ मिलने की उम्मीद है।
दिल्ली-अलवर कॉरिडोर का रूट और स्टेशन
सराय काले खां से शुरू होकर यह कॉरिडोर मुनिरका, एरोसिटी और गुरुग्राम होते हुए बावल तक पहुंचेगा। इसके बाद यह मार्ग शाहजहांपुर, नीमराणा और खैरथल से होते हुए अलवर शहर तक विस्तृत होगा।
राजस्थान के हिस्से में इस परियोजना की कुल लंबाई 91 किलोमीटर निर्धारित की गई है। इस ट्रैक पर कुल 6 मुख्य स्टेशन बनाए जाएंगे, जो स्थानीय यात्रियों के लिए आवागमन को बेहद सुगम बना देंगे।
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औद्योगिक विकास और रोजगार के अवसर
भिवाड़ी और नीमराणा जैसे औद्योगिक हब के जुड़ने से राजस्थान में निवेश के नए द्वार खुलेंगे। हाई-स्पीड कनेक्टिविटी होने से कंपनियों को लॉजिस्टिक्स और कर्मचारियों के आवागमन में बड़ी सुविधा प्राप्त होगी।
विशेषज्ञों का मानना है कि इस कॉरिडोर के निर्माण से राजस्थान के सीमावर्ती जिलों में आर्थिक गतिविधियों में तेजी आएगी। इसके साथ ही स्थानीय युवाओं के लिए रोजगार के हजारों नए अवसर भी सृजित होंगे।
मेट्रो से तीन गुना अधिक होगी रफ्तार
नमो भारत ट्रेनों की सबसे बड़ी खासियत इनकी गति है। यह ट्रेनें 160 किलोमीटर प्रति घंटा की रफ्तार से दौड़ेंगी। यह गति दिल्ली मेट्रो की तुलना में लगभग तीन गुना अधिक मापी गई है।
यह कॉरिडोर पूरी तरह से समर्पित और एलिवेटेड ट्रैक पर बनाया जाएगा। इससे सड़क मार्ग पर होने वाले ट्रैफिक जाम का ट्रेनों के संचालन पर कोई प्रभाव नहीं पड़ेगा और समय की बचत होगी।
"यह परियोजना एनसीआर में परिवहन के एक नए युग की शुरुआत करेगी, जिससे दिल्ली और राजस्थान के बीच आवागमन सुगम और सुरक्षित होगा।"
इंटर-ऑपरेबल नेटवर्क की सुविधा
इस नेटवर्क की एक और बड़ी विशेषता इसका इंटर-ऑपरेबल होना है। यात्री बिना ट्रेन बदले दिल्ली के सराय काले खां स्टेशन से मेरठ या पानीपत कॉरिडोर की तरफ आसानी से सफर कर सकेंगे।
इस पूरे सिस्टम को भारतीय रेलवे के स्टेशनों, बस टर्मिनलों, एयरपोर्ट और दिल्ली मेट्रो के साथ जोड़ा जाएगा। यह मल्टी-मोडल कनेक्टिविटी यात्रियों को एक स्थान से दूसरे स्थान तक निर्बाध पहुंच प्रदान करेगी।
एकीकृत परिवहन योजना का लक्ष्य
दिल्ली राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र की एकीकृत परिवहन योजना के तहत तीन मुख्य कॉरिडोर्स विकसित किए जा रहे हैं। इसमें दिल्ली-मेरठ रूट पहले ही शुरू हो चुका है और अब अलवर रूट पर काम तेज है।
पूरे प्रोजेक्ट के तहत 196 किलोमीटर लंबा नेटवर्क और 22 मुख्य स्टेशन प्रस्तावित हैं। राजस्थान सरकार इस परियोजना के विस्तार को लेकर काफी गंभीर है और भूमि अधिग्रहण की प्रक्रिया भी तेज की गई है।
राजस्थान में नमो भारत रेल का आगमन इंफ्रास्ट्रक्चर के क्षेत्र में एक क्रांतिकारी कदम साबित होगा। यह न केवल सफर के समय को कम करेगा, बल्कि राज्य के भविष्य को नई ऊंचाइयों पर ले जाएगा।
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