कैलिफोर्निया | दुनिया की सबसे बड़ी टेक कंपनियों में से एक एपल (Apple) में एक बड़े युग का अंत और नए अध्याय की शुरुआत होने जा रही है। टिम कुक, जिन्होंने पिछले 15 वर्षों से कंपनी का नेतृत्व किया है, अब सीईओ के पद से हटने वाले हैं। उनकी जगह जॉन टर्नस को कंपनी का नया सीईओ नियुक्त किया गया है। यह बदलाव 1 सितंबर 2026 से प्रभावी होगा, जिससे कंपनी को एक सुचारु नेतृत्व परिवर्तन (Smooth Transition) के लिए पर्याप्त समय मिल सके। टिम कुक इस बदलाव के बाद कंपनी के बोर्ड ऑफ डायरेक्टर्स के एग्जीक्यूटिव चेयरमैन की भूमिका में नजर आएंगे।
टिम कुक के बाद जॉन टर्नस संभालेंगे एपल: टिम कुक के बाद जॉन टर्नस संभालेंगे एपल की कमान: 15 साल बाद बदल रहा कंपनी का CEO; कुक अब बनेंगे एग्जीक्यूटिव चेयरमैन
एपल ने अपने नेतृत्व में एक ऐतिहासिक बदलाव की घोषणा की है। टिम कुक 1 सितंबर 2026 को सीईओ पद से हट जाएंगे और उनकी जगह जॉन टर्नस लेंगे, जबकि कुक बोर्ड के एग्जीक्यूटिव चेयरमैन के रूप में कंपनी के साथ बने रहेंगे।
HIGHLIGHTS
- जॉन टर्नस 1 सितंबर 2026 से आधिकारिक रूप से एपल के नए सीईओ का पदभार संभालेंगे।
- टिम कुक 15 साल तक सीईओ रहने के बाद अब कंपनी के बोर्ड में एग्जीक्यूटिव चेयरमैन बनेंगे।
- जॉन टर्नस वर्तमान में हार्डवेयर इंजीनियरिंग के सीनियर वाइस प्रेसिडेंट हैं और 2001 से एपल के साथ हैं।
- कुक के कार्यकाल में एपल की मार्केट वैल्यू 350 बिलियन डॉलर से बढ़कर 4 ट्रिलियन डॉलर तक पहुंच गई है।
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टिम कुक का ऐतिहासिक कार्यकाल और विकास
टिम कुक का एपल के साथ सफर साल 1998 में शुरू हुआ था, जब वे सप्लाई चेन ऑपरेशंस के विशेषज्ञ के रूप में कंपनी में आए थे। 2011 में स्टीव जॉब्स के निधन के बाद, उन्होंने सीईओ की कमान संभाली। कुक के नेतृत्व में एपल ने वह ऊंचाइयां छुईं जिनकी कल्पना करना भी मुश्किल था। उनके कार्यकाल में कंपनी की मार्केट वैल्यू 350 बिलियन डॉलर (करीब ₹32 लाख करोड़) से बढ़कर आज 4 ट्रिलियन डॉलर (लगभग ₹350 लाख करोड़) के पार पहुंच गई है। यह उनके कुशल प्रबंधन और दूरदर्शी सोच का ही परिणाम है कि एपल आज दुनिया की सबसे मूल्यवान सार्वजनिक कंपनी है।
रेवेन्यू और मुनाफे में जबरदस्त उछाल
कुक ने केवल मार्केट कैप ही नहीं, बल्कि कंपनी के सालाना रेवेन्यू में भी भारी बढ़ोतरी की है। 2011 में कंपनी का रेवेन्यू 108 बिलियन डॉलर था, जो 2025 तक बढ़कर 416 बिलियन डॉलर (₹39 लाख करोड़) के पार पहुंचने का अनुमान है। उनके दौर में एपल ने केवल हार्डवेयर पर ध्यान नहीं दिया, बल्कि सर्विसेज सेक्टर जैसे एपल म्यूजिक, एपल टीवी+, और आईक्लाउड को भी एक बड़े बिजनेस मॉडल में बदल दिया। कुक ने यह साबित कर दिया कि एपल सिर्फ एक आईफोन कंपनी नहीं, बल्कि एक संपूर्ण इकोसिस्टम है।
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कौन हैं जॉन टर्नस: नए उत्तराधिकारी
51 वर्षीय जॉन टर्नस वर्तमान में एपल में हार्डवेयर इंजीनियरिंग के सीनियर वाइस प्रेसिडेंट हैं। उन्होंने साल 2001 में एपल की प्रोडक्ट डिजाइन टीम में शामिल होकर अपने करियर की शुरुआत की थी। टर्नस का अनुभव और कंपनी के प्रति उनकी निष्ठा ही उन्हें इस पद का सबसे योग्य दावेदार बनाती है। दिलचस्प बात यह है कि टर्नस की उम्र लगभग उतनी ही है, जितनी टिम कुक की थी जब उन्होंने 2011 में सीईओ का पद संभाला था। टर्नस ने यूनिवर्सिटी ऑफ पेंसिल्वेनिया से मैकेनिकल इंजीनियरिंग की डिग्री हासिल की है और वे एक तकनीकी विशेषज्ञ के रूप में जाने जाते हैं।
स्टीव जॉब्स और टिम कुक के साथ काम का अनुभव
टर्नस ने अपने करियर के दौरान न केवल टिम कुक के मार्गदर्शन में काम किया, बल्कि उन्हें कंपनी के संस्थापक स्टीव जॉब्स के साथ भी काम करने का सौभाग्य मिला है। उन्होंने आईपैड, एयरपॉड्स, आईफोन और एपल वॉच जैसे क्रांतिकारी उत्पादों के विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। हाल ही में लॉन्च हुए मैकबुक नियो (MacBook Neo) और एम-सीरीज चिप्स के ट्रांजिशन में भी उनकी भूमिका प्रमुख रही है। टर्नस को कंपनी के भीतर एक शांत लेकिन प्रभावी लीडर के रूप में देखा जाता है, जिनकी पकड़ इंजीनियरिंग और डिजाइन दोनों पर मजबूत है।
जॉन टर्नस के सामने आने वाली बड़ी चुनौतियां
भले ही टर्नस को एक मजबूत कंपनी विरासत में मिल रही है, लेकिन उनके सामने चुनौतियां भी कम नहीं हैं। सबसे बड़ी चुनौती आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) के क्षेत्र में है। वर्तमान में गूगल और माइक्रोसॉफ्ट जैसी कंपनियां एआई की रेस में एपल से काफी आगे निकल चुकी हैं। टर्नस को यह सुनिश्चित करना होगा कि 'एपल इंटेलिजेंस' के जरिए कंपनी इस रेस में फिर से शीर्ष पर पहुंचे। इसके अलावा, अमेरिका और यूरोप में चल रहे एंटी-ट्रस्ट (एकाधिकार) मामले भी उनके लिए एक बड़ी कानूनी सिरदर्दी साबित हो सकते हैं।
सप्लाई चेन और वैश्विक राजनीति का असर
टिम कुक ने एपल की मैन्युफैक्चरिंग को चीन से बाहर निकालकर भारत और वियतनाम जैसे देशों में शिफ्ट करने की जो प्रक्रिया शुरू की है, उसे टर्नस को आगे बढ़ाना होगा। अमेरिका और चीन के बीच बढ़ते व्यापारिक तनाव और ट्रंप प्रशासन की नई नीतियों के बीच, सप्लाई चेन को सुरक्षित और स्थिर रखना एक बड़ी चुनौती होगी। भारत जैसे उभरते बाजारों में एपल की पकड़ मजबूत करना और वहां रिटेल नेटवर्क का विस्तार करना भी टर्नस की प्राथमिकताओं में शामिल होगा। आलोचकों का यह भी मानना है कि एपल में अब पहले जैसा 'इनोवेशन' नहीं दिख रहा है, जिसे टर्नस को गलत साबित करना होगा।
अगले 4 महीनों की ट्रांजिशन योजना
टिम कुक और जॉन टर्नस अगले कुछ महीनों तक साथ मिलकर काम करेंगे। कुक ने स्पष्ट किया है कि वे अगस्त के अंत तक सीईओ के रूप में सक्रिय रहेंगे ताकि टर्नस को कंपनी की बारीकियों को समझने में मदद मिल सके। एग्जीक्यूटिव चेयरमैन के रूप में कुक का ध्यान ग्लोबल पॉलिसी मेकर्स के साथ संबंधों को बेहतर बनाने और कंपनी की दीर्घकालिक रणनीतियों पर होगा। कुक ने अपने बयान में कहा कि एपल का नेतृत्व करना उनके जीवन का सबसे बड़ा सम्मान रहा है और उन्हें पूरा भरोसा है कि टर्नस कंपनी को और भी नई ऊंचाइयों पर ले जाएंगे।
बोर्ड में अन्य महत्वपूर्ण बदलाव
इस नेतृत्व परिवर्तन के साथ ही एपल के बोर्ड में भी कुछ बदलाव किए गए हैं। पिछले 15 वर्षों से नॉन-एग्जीक्यूटिव चेयरमैन रहे आर्थर लेविंसन अब 'लीड इंडिपेंडेंट डायरेक्टर' की भूमिका में होंगे। लेविंसन ने टर्नस की तारीफ करते हुए कहा कि उनका गहरा तकनीकी ज्ञान और बेहतरीन प्रोडक्ट्स बनाने का जुनून एपल के भविष्य के लिए संजीवनी साबित होगा। बोर्ड ने सर्वसम्मति से इस उत्तराधिकार योजना (Succession Plan) को मंजूरी दी है, जो दर्शाता है कि कंपनी के भीतर टर्नस को लेकर काफी सकारात्मकता है।
पर्यावरण और गोपनीयता पर निरंतरता
एपल ने हमेशा से पर्यावरण संरक्षण और यूजर्स की प्राइवेसी को अपनी प्राथमिकता बताया है। टिम कुक के समय में कंपनी ने अपने कार्बन फुटप्रिंट को 60% तक कम करने में सफलता पाई है। जॉन टर्नस ने भी सस्टेनेबिलिटी पर काफी काम किया है, जिसमें रीसायकल एल्युमीनियम और 3D प्रिंटेड टाइटेनियम का इस्तेमाल शामिल है। टर्नस के नेतृत्व में यह उम्मीद की जा रही है कि एपल अपने 'कार्बन न्यूट्रल 2030' के लक्ष्य को समय से पहले ही हासिल कर लेगी। इसके साथ ही, डेटा प्राइवेसी के सख्त नियमों को भी बरकरार रखा जाएगा।
एपल के 50 साल के सफर के 7 सारथी
एपल के इतिहास में अब तक कुल सात सीईओ रह चुके हैं। माइकल स्कॉट से शुरू हुआ यह सफर माइक मार्ककुला, जॉन स्कली, माइकल स्पिंडलर, गिल एमेलियो और फिर स्टीव जॉब्स तक पहुंचा। स्टीव जॉब्स ने कंपनी को दिवालिया होने से बचाया और उसे एक वैश्विक ब्रांड बनाया। उनके बाद टिम कुक ने इसे एक ट्रिलियन-डॉलर साम्राज्य में तब्दील किया। अब जॉन टर्नस आठवें सीईओ के रूप में इस प्रतिष्ठित सूची में शामिल होने जा रहे हैं। उनका कार्यकाल यह तय करेगा कि क्या एपल आने वाले दशकों में भी अपनी तकनीकी बादशाहत कायम रख पाएगी।
निष्कर्ष और भविष्य की राह
एपल आज दुनिया भर के 200 से ज्यादा देशों में सक्रिय है और इसके 2.5 बिलियन से ज्यादा डिवाइस उपयोग में हैं। टिम कुक का जाना एक युग का अंत जरूर है, लेकिन जॉन टर्नस के रूप में कंपनी को एक ऐसा लीडर मिला है जो एपल की संस्कृति और डीएनए को अच्छी तरह समझता है। टर्नस के पास न केवल एक इंजीनियर का दिमाग है, बल्कि एक विजनरी लीडर का दिल भी है। दुनिया भर के निवेशकों और एपल प्रेमियों की नजरें अब 2026 पर टिकी हैं, जब आधिकारिक तौर पर यह सत्ता परिवर्तन संपन्न होगा।
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