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फैट बैंकिंग: खूबसूरती का नया निवेश: फैट बैंकिंग: अब भविष्य की खूबसूरती के लिए सहेजें शरीर की चर्बी

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कॉस्मेटिक सर्जरी में नया ट्रेंड ‘फैट बैंकिंग’ आया है, जहां लोग भविष्य के लिए चर्बी सहेज रहे हैं।

HIGHLIGHTS

  • फैट बैंकिंग में लिपोसक्शन के जरिए शरीर की अतिरिक्त चर्बी निकालकर सुरक्षित रखी जाती है।
  • इस चर्बी को -190 डिग्री सेल्सियस पर क्रायोप्रिजर्वेशन तकनीक से फ्रीज किया जाता है।
  • भविष्य में झुर्रियां भरने या अंगों को सुडौल बनाने के लिए इसी फैट का उपयोग होता है।
  • इस प्रक्रिया की शुरुआती लागत 10 लाख रुपये तक हो सकती है, साथ ही सालाना फीस अलग है।
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न्यूयॉर्क | सौंदर्य जगत में ‘फैट बैंकिंग’ एक क्रांतिकारी बदलाव बनकर उभरा है। अब लोग बुढ़ापे में भी जवान दिखने के लिए अपनी अतिरिक्त चर्बी को सुरक्षित रखवा रहे हैं। यह प्रक्रिया उन लोगों के बीच लोकप्रिय हो रही है जो सिंथेटिक फिलर्स से बचना चाहते हैं।

क्या है फैट बैंकिंग और यह कैसे काम करती है?

फैट बैंकिंग एक ऐसी प्रक्रिया है जिसमें लिपोसक्शन के माध्यम से शरीर से अतिरिक्त चर्बी निकाली जाती है। यह चर्बी आमतौर पर पेट, जांघों या कूल्हों से ली जाती है।

इस निकाली गई चर्बी को आधुनिक क्रायोप्रिजर्वेशन तकनीक के जरिए बेहद कम तापमान पर स्टोर किया जाता है। न्यूयॉर्क की डॉ. क्लाउडिया किम के अनुसार, यह एक 'जीवित टिश्यू' बैंक की तरह काम करता है।

भविष्य में जब भी मरीज को चेहरे की झुर्रियां भरने या अंगों को सुडौल बनाने की जरूरत होती है, तो इसी वसा का उपयोग किया जाता है। इससे दोबारा दर्दनाक लिपोसक्शन से नहीं गुजरना पड़ता।

प्राकृतिक खूबसूरती की चाहत और सुरक्षा के मानक

विशेषज्ञों का मानना है कि मरीज सिलिकॉन इंप्लांट्स के बजाय अपने ही शरीर के हिस्से का इस्तेमाल करना ज्यादा प्राकृतिक मानते हैं। इससे बाहरी तत्वों के प्रति शरीर की एलर्जी का खतरा कम रहता है।

"मरीजों को यह विचार काफी पसंद आता है कि वे किसी बाहरी कृत्रिम तत्व के बजाय अपने ही शरीर की चर्बी का इस्तेमाल कर रहे हैं।" - डॉ. कैरिन ग्रॉसमैन, डर्मेटोलॉजिस्ट

जोखिम और इस प्रक्रिया पर आने वाला भारी-भरकम खर्च

यह प्रक्रिया जितनी आकर्षक है, उतनी ही महंगी भी है। फैट हार्वेस्टिंग यानी चर्बी निकालने की शुरुआती लागत 5 से 10 लाख रुपये तक हो सकती है। इसके अलावा, सालाना स्टोरेज फीस अलग से देनी होती है।

तकनीकी रूप से इसमें कई जोखिम भी शामिल हैं। डॉ. किम कहती हैं कि यदि स्टोर की गई कोशिकाएं मर जाती हैं, तो शरीर में संक्रमण, गांठ या टेढ़ापन जैसी समस्याएं पैदा हो सकती हैं।

भविष्य की संभावनाएं और वैज्ञानिक आधार

अमेरिका जैसे देशों में अब मृत व्यक्तियों द्वारा दान की गई चर्बी का भी उपयोग फिलर्स के रूप में हो रहा है। हालांकि, अपनी खुद की चर्बी को स्टोर करना सबसे प्रभावी माना जाता है।

फैट बैंकिंग भविष्य की सुंदरता के लिए एक महंगा लेकिन आधुनिक निवेश साबित हो सकता है। हालांकि, किसी भी निष्कर्ष पर पहुंचने से पहले इसके वैज्ञानिक आधार और संभावित स्वास्थ्य जोखिमों को समझना अनिवार्य है।

*Edit with Google AI Studio

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