जयशंकर का बुल्गारिया दौरा: व्यापार, रक्षा और AI सहयोग पर जोर, वैश्विक चुनौतियों पर भारत का स्पष्ट संदेश
संबंधित खबरें
भारतीय विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने अपने बुल्गारिया दौरे के दौरान बुल्गारिया की विदेश मंत्री वेलिस्लावा पेत्रोवा चमोवा से मुलाकात की। दोनों नेताओं के बीच द्विपक्षीय संबंधों को मजबूत बनाने तथा व्यापार, निवेश, रक्षा, सेमीकंडक्टर और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) जैसे क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने पर चर्चा हुई।
मीडिया को संबोधित करते हुए जयशंकर ने कहा कि दुनिया वर्तमान समय में अत्यंत अस्थिर और अनिश्चित दौर से गुजर रही है। उन्होंने कहा कि वैश्विक स्तर पर बड़े संघर्ष, आर्थिक सुरक्षा से जुड़ी चिंताएं और आतंकवाद का लगातार खतरा सभी देशों के लिए चुनौती बने हुए हैं।
उन्होंने भारत का रुख स्पष्ट करते हुए कहा कि "यह युद्ध का युग नहीं है। मौजूदा विवादों और संघर्षों का समाधान केवल संवाद और कूटनीति के माध्यम से ही संभव है।"
जयशंकर ने आर्थिक जोखिमों से निपटने के लिए मजबूत और विविधीकृत सप्लाई चेन की आवश्यकता पर बल दिया। उन्होंने कहा कि वैश्विक व्यापार के लिए समुद्री मार्गों का सुरक्षित और निर्बाध बने रहना बेहद महत्वपूर्ण है। आतंकवाद के मुद्दे पर उन्होंने कहा कि दुनिया के सभी देशों को "जीरो टॉलरेंस" की नीति अपनानी चाहिए।
संबंधित खबरें
भारत-बुल्गारिया साझेदारी को मिलेगा नया आयाम
विदेश मंत्री ने कहा कि वर्तमान वैश्विक परिस्थितियों में भारत और बुल्गारिया के बीच सहयोग को "डी-रिस्क और डायवर्सिफाई" करना आवश्यक है। उन्होंने यूरोपीय संघ के साथ भारत के मुक्त व्यापार समझौते (FTA) का भी उल्लेख किया और कहा कि इससे दोनों देशों के आर्थिक संबंधों को नई गति मिल सकती है।
जयशंकर ने कहा कि भारत और बुल्गारिया अपनी दीर्घकालिक मित्रता को आधुनिक और भविष्य-केंद्रित साझेदारी में बदलने के लिए प्रतिबद्ध हैं।
फिनलैंड दौरे पर जाएंगे जयशंकर
बुल्गारिया यात्रा के बाद विदेश मंत्री फिनलैंड का दौरा करेंगे। वहां वे प्रतिष्ठित "कुलतारंता वार्ता" में हिस्सा लेंगे और फिनलैंड के शीर्ष नेतृत्व के साथ विभिन्न द्विपक्षीय और वैश्विक मुद्दों पर चर्चा करेंगे।
मिडिल ईस्ट में बढ़ा तनाव
इस बीच, मिडिल ईस्ट में तनाव एक बार फिर बढ़ने की खबरें सामने आई हैं। रिपोर्टों के अनुसार अमेरिका और ईरान के बीच सैन्य टकराव की स्थिति बनी हुई है। बताया जा रहा है कि अमेरिका ने ईरान के बंदर अब्बास सहित कुछ अन्य क्षेत्रों में सैन्य ठिकानों को निशाना बनाया, जिसके जवाब में ईरान ने जॉर्डन, कुवैत और बहरीन स्थित अमेरिकी सैन्य अड्डों पर मिसाइल हमले किए।