झालावाड़ | राजस्थान के झालावाड़ जिले में भोपाल के कुख्यात गैंगस्टर मुख्तार मलिक की हत्या के मामले में अदालत ने ऐतिहासिक फैसला सुनाया है। एडीजे कोर्ट ने इस सुनियोजित हत्याकांड में अब्दुल बंटी और वसीम राजा सहित 11 आरोपियों को उम्रकैद की सजा दी है।
मुख्तार मलिक हत्याकांड: 11 को उम्रकैद: मुख्तार मलिक मर्डर केस: 11 दोषियों को उम्रकैद की सजा
गैंगस्टर मुख्तार मलिक की हत्या में झालावाड़ कोर्ट ने 11 को उम्रकैद और एक को 7 साल की सजा सुनाई है।
HIGHLIGHTS
- झालावाड़ की एडीजे कोर्ट ने 11 दोषियों को उम्रकैद और एक को 7 साल की सजा सुनाई।
- भोपाल के कुख्यात गैंगस्टर मुख्तार मलिक की भीमसागर बांध इलाके में हत्या हुई थी।
- वर्चस्व की लड़ाई और मछली ठेकेदारी विवाद को लेकर रची गई थी गहरी साजिश।
- कोर्ट में 44 गवाहों और 94 दस्तावेजों के आधार पर सुनाया गया ऐतिहासिक फैसला।
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यह मामला सिर्फ एक मर्डर का नहीं था, बल्कि अपराध की दुनिया में वर्चस्व कायम करने की एक खूनी जंग थी। पुलिस जांच में साफ हुआ कि मुख्तार मलिक को रास्ते से हटाने के लिए एक बहुत ही गहरी साजिश रची गई थी।
भीमसागर बांध पर रची गई थी मौत की साजिश
जांच की शुरुआत उस फोन कॉल से हुई थी, जिसने इस पूरे घटनाक्रम को जन्म दिया। मुख्तार और अब्दुल बंटी के बीच हुई तीखी बहस ने पुरानी रंजिश को चरम पर पहुंचा दिया था। यह कोई सामान्य विवाद नहीं था।
आरोपियों ने मुख्तार को ठिकाने लगाने के लिए भीमसागर बांध के सुनसान इलाके को चुना। यह जगह पानी के बीच और आबादी से दूर थी, जहां हमला करना आसान था। आरोपियों ने पहले से ही वहां पहुंचकर अपनी पोजीशन ले ली थी।
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सुनियोजित तरीके से किया गया घातक हमला
जैसे ही मुख्तार मलिक वहां पहुंचा, घात लगाकर बैठे हमलावरों ने उस पर हमला कर दिया। मुख्तार ने जंगल के रास्ते भागने की कोशिश की, लेकिन पहाड़ी इलाका होने के कारण वह ज्यादा दूर नहीं जा सका।
शुरुआत में यह विवाद मछली ठेकेदारी से जुड़ा बताया जा रहा था। हालांकि, जैसे-जैसे जांच की परतें खुलीं, यह स्पष्ट हो गया कि मछली ठेका तो सिर्फ एक बहाना था। असली मकसद इलाके में मुख्तार का वर्चस्व खत्म करना था।
वर्चस्व की लड़ाई और पुरानी रंजिश का नतीजा
मुख्तार मलिक भोपाल का एक कुख्यात नाम था, जिसके खिलाफ मध्य प्रदेश और उत्तर प्रदेश में करीब 60 आपराधिक मामले दर्ज थे। उसने अपराध की दुनिया में अपना एक बड़ा नेटवर्क तैयार कर लिया था।
अब्दुल बंटी और उसके साथी भी उसी इलाके में अपना दबदबा बनाना चाहते थे। वे इस वारदात के जरिए अपने विरोधियों को एक कड़ा संदेश देना चाहते थे। यह हत्या वर्चस्व के ऐलान का एक जरिया मात्र थी।
"अदालत ने अपने फैसले में स्पष्ट किया कि यह हत्या कोई आकस्मिक घटना नहीं थी, बल्कि आरोपियों द्वारा आपसी रंजिश में की गई एक सोची-समझी साजिश थी।"
पुलिस जांच और तकनीकी साक्ष्यों की भूमिका
पुलिस ने इस हाई-प्रोफाइल मामले में तकनीकी साक्ष्यों का सहारा लिया। कॉल डिटेल रिकॉर्ड और लोकेशन डेटा ने आरोपियों के झूठ की पोल खोल दी। डिजिटल सबूतों की मदद से पुलिस ने एक-एक कड़ी को आपस में जोड़ा।
इस मामले में कुल 14 आरोपियों को गिरफ्तार किया गया था। हर गिरफ्तारी के साथ साजिश की नई परतें सामने आती गईं। पुलिस की मुस्तैदी और मजबूत चार्जशीट ने कोर्ट में अभियोजन पक्ष का रास्ता आसान बना दिया।
कोर्ट का ऐतिहासिक फैसला और सजा का ऐलान
मामले की सुनवाई के दौरान कोर्ट में 44 गवाह पेश किए गए। इसके अलावा 94 अहम दस्तावेजों को सबूत के तौर पर रखा गया। बचाव पक्ष ने दलीलों के जरिए आरोपियों को बचाने की कोशिश की, लेकिन सफलता नहीं मिली।
करीब चार साल तक चली लंबी कानूनी प्रक्रिया के बाद अप्रैल 2026 में फैसला आया। कोर्ट ने 11 दोषियों को उम्रकैद और कोटा के शफीक को 7 साल की सजा सुनाई। साथ ही सभी दोषियों पर जुर्माना भी लगाया गया है।
इस फैसले से अपराध जगत में एक कड़ा संदेश गया है। गैंगवार और वर्चस्व की लड़ाई का अंत हमेशा सलाखों के पीछे ही होता है। मुख्तार मलिक केस ने साबित कर दिया कि अपराधी चाहे कितना भी शातिर हो, कानून से नहीं बच सकता।
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