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राजस्थान

कोटा अस्पताल का औचक निरीक्षण: कोटा: गायत्री राठौड़ ने अस्पतालों में जांची स्वास्थ्य सेवाएं

प्रमुख शासन सचिव ने जेके लोन और एमबीएस अस्पताल का निरीक्षण कर दिए कड़े निर्देश।

HIGHLIGHTS

  • प्रमुख शासन सचिव गायत्री राठौड़ ने कोटा के जेके लोन और एमबीएस अस्पताल का दौरा कर व्यवस्थाएं जांचीं।
  • हाई रिस्क प्रेग्नेंसी के मामलों में विशेष मॉनिटरिंग और हर घंटे मरीज की निगरानी के निर्देश दिए गए।
  • नर्सिंग प्रशिक्षण में लापरवाही बरतने वाले निजी कॉलेज को नोटिस जारी करने का सख्त आदेश दिया गया।
  • मरीजों को संवेदनशील और गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराना राज्य सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता है।
gayatri rathore inspects kota hospitals health services review

कोटा | राजस्थान की चिकित्सा एवं स्वास्थ्य विभाग की प्रमुख शासन सचिव श्रीमती गायत्री राठौड़ ने कोटा के प्रमुख अस्पतालों का औचक निरीक्षण किया। उन्होंने चिकित्सा सेवाओं की गुणवत्ता और उपचार प्रणाली की बारीकी से समीक्षा की।

इस दौरान उन्होंने स्पष्ट किया कि मरीजों के प्रति संवेदनशीलता बरतना सरकार की प्राथमिकता है। स्वास्थ्य सेवाओं में किसी भी प्रकार की लापरवाही को अब बिल्कुल भी स्वीकार नहीं किया जाएगा।

जेके लोन अस्पताल का गहन निरीक्षण

प्रमुख शासन सचिव ने जेके लोन अस्पताल के लेबर रूम, पोस्ट ऑपरेटिव वार्ड और पीडियाट्रिक वार्ड का दौरा किया। उन्होंने वहां भर्ती मरीजों और उनके परिजनों से सीधे संवाद किया।

उन्होंने मरीजों से अस्पताल की साफ-सफाई, दवाओं की उपलब्धता और स्टाफ के व्यवहार के बारे में फीडबैक लिया। अधिकांश महिलाओं ने अस्पताल की उपचार सेवाओं पर संतोष व्यक्त किया है।

राठौड़ ने पैथोलॉजी लैब की कार्यप्रणाली को भी करीब से देखा और परखा। उन्होंने अस्पताल प्रशासन से डॉक्टर और मरीजों के अनुपात की विस्तृत जानकारी भी मौके पर ही प्राप्त की।

अधीक्षक डॉ. निर्मला शर्मा ने बताया कि अस्पताल में पर्याप्त स्टाफ और आवश्यक दवाएं उपलब्ध हैं। मरीजों को बेहतर उपचार देने के लिए प्रशासन पूरी तरह से प्रतिबद्ध है।

हाई रिस्क प्रेग्नेंसी पर विशेष निगरानी के निर्देश

गायत्री राठौड़ ने प्रसूताओं और नवजात शिशुओं की नियमित स्क्रीनिंग करने के सख्त निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि जटिलताओं की पहचान शुरुआती दौर में होना बहुत जरूरी है।

हाई रिस्क प्रेग्नेंसी के मामलों में विशेष मॉनिटरिंग सुनिश्चित करने को कहा गया है। इससे गंभीर परिस्थितियों को समय रहते टाला जा सकता है और जच्चा-बच्चा सुरक्षित रहेंगे।

उन्होंने चिकित्सकों को निर्देशित किया कि प्रसव पूर्व और प्रसव पश्चात देखभाल को प्रभावी बनाएं। मरीजों की स्थिति पर निरंतर नजर रखना ही मृत्यु दर को कम करने का उपाय है।

चिकित्सा सेवाओं का उद्देश्य केवल उपचार तक सीमित नहीं होना चाहिए। हमें मरीजों को एक सुरक्षित और विश्वासपूर्ण वातावरण प्रदान करना होगा ताकि वे जल्दी स्वस्थ हो सकें।

बच्चों के स्वास्थ्य के प्रति संवेदनशीलता

पीडियाट्रिक वार्ड में भर्ती बच्चों के परिजनों से उन्होंने आत्मीयता के साथ बातचीत की। उन्होंने कहा कि शिशु स्वास्थ्य सेवाओं में त्वरित निर्णय और सतर्कता अत्यंत आवश्यक है।

स्क्रीनिंग व्यवस्था को मजबूत करने के लिए उन्होंने अधिकारियों को पाबंद किया। बीमारियों की प्रारंभिक अवस्था में पहचान ही बच्चों के बेहतर उपचार का एकमात्र प्रभावी रास्ता है।

किशोर स्वास्थ्य कार्यक्रम को गति देने पर जोर

मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी को किशोर स्वास्थ्य कार्यक्रम पर विशेष ध्यान देने को कहा गया। किशोरों की बीमारियों और परामर्श के लिए संसाधनों का उचित विकास किया जाए।

राठौड़ ने कहा कि स्वास्थ्य सेवाओं का मकसद समग्र स्वास्थ्य विकास होना चाहिए। इसमें युवाओं का मानसिक और शारीरिक स्वास्थ्य भी एक महत्वपूर्ण कड़ी के रूप में शामिल है।

नर्सिंग प्रशिक्षण की गुणवत्ता पर जताई कड़ी नाराजगी

एमबीएस कॉलेज के निरीक्षण के दौरान प्रमुख शासन सचिव ने काफी कड़ा रुख अपनाया। प्रशिक्षणरत नर्सिंग स्टाफ की दक्षता में कमी पाए जाने पर उन्होंने गहरा असंतोष जाहिर किया।

उन्होंने कहा कि नर्सिंग स्टाफ चिकित्सा तंत्र की रीढ़ की हड्डी के समान होता है। उनकी ट्रेनिंग में किसी भी तरह का समझौता मरीजों की जान को जोखिम में डालना है।

लापरवाह निजी नर्सिंग कॉलेज के विरुद्ध तुरंत नोटिस जारी करने के आदेश दिए गए। राठौड़ ने स्पष्ट किया कि पूर्ण दक्षता और अनुभव के बिना कोई भी प्रमाण पत्र न दें।

प्रशिक्षणार्थियों को हमेशा वरिष्ठ चिकित्सकों की निगरानी में ही कार्य करना चाहिए। इससे उन्हें वास्तविक अनुभव मिलेगा और वे भविष्य में बेहतर स्वास्थ्य सेवाएं देने में सक्षम हो सकेंगे।

चिकित्सा अधिकारियों के साथ महत्वपूर्ण समीक्षा बैठक

कोटा संभाग के उच्च अधिकारियों के साथ बैठक में उन्होंने सख्त लहजे में संदेश दिया। प्रसूताओं की मृत्यु की घटनाओं को उन्होंने बेहद दुखद और चिंताजनक करार दिया।

"प्रदेश में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति किसी भी कीमत पर स्वीकार्य नहीं है। सभी अधिकारियों को अपनी जिम्मेदारी और संवेदनशीलता के साथ व्यवस्थाओं में सुधार लाना होगा।"

मेडिकल कॉलेज के प्राचार्य और अधीक्षकों को व्यवस्थाओं में सुधार के निर्देश दिए। ट्रीटमेंट प्रोटोकॉल की शत-प्रतिशत पालना करना अब सभी अस्पतालों के लिए अनिवार्य कर दिया गया है।

पोस्ट ऑपरेटिव प्रोटोकॉल के तहत हर घंटे मरीज की निगरानी करने को कहा गया। ड्यूटी पर तैनात चिकित्सक की सीधी जवाबदेही तय की जाएगी ताकि कोई लापरवाही न हो।

निरीक्षण के दौरान जिला कलक्टर पीयूष समारिया और निदेशक डॉ. रवि प्रकाश शर्मा भी मौजूद रहे। सभी अधिकारियों को आपसी समन्वय के साथ कार्य करने की हिदायत दी गई है।

इस निरीक्षण का मुख्य उद्देश्य कोटा संभाग की स्वास्थ्य सेवाओं को पुनर्गठित करना है। गायत्री राठौड़ के सख्त निर्देशों से अब व्यवस्थाओं में बड़े बदलाव की उम्मीद की जा रही है।

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