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असम के दिग्गज फुटबॉलर का निधन: मैन ऑफ गोल्डन बूट गिलबर्टसन चांगमा का निधन, असम पुलिस और फुटबॉल जगत में शोक की लहर

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असम के मशहूर फुटबॉलर और 'मैन ऑफ गोल्डन बूट' के नाम से विख्यात गिलबर्टसन चांगमा का 71 वर्ष की आयु में निधन हो गया है। वह लंबे समय से डिमेंशिया से जूझ रहे थे और उन्होंने गुवाहाटी स्थित अपने आवास पर अंतिम सांस ली।

HIGHLIGHTS

  • गिलबर्टसन चांगमा को 'मैन ऑफ गोल्डन बूट' के नाम से जाना जाता था।
  • 71 वर्ष की आयु में गुवाहाटी में उन्होंने अंतिम सांस ली।
  • वह लंबे समय से डिमेंशिया (भूलने की बीमारी) से पीड़ित थे।
  • 1972 से उन्होंने असम पुलिस फुटबॉल टीम की कप्तानी की थी।
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गुवाहाटी | असम के खेल इतिहास का एक स्वर्णिम अध्याय आज समाप्त हो गया। फुटबॉल जगत के दिग्गज और 'मैन ऑफ गोल्डन बूट' के नाम से मशहूर गिलबर्टसन चांगमा अब हमारे बीच नहीं रहे।

शनिवार की सुबह गुवाहाटी के लिए एक दुखद खबर लेकर आई। पूर्व फुटबॉलर ने सुबह करीब 7.30 बजे अपने कहिलीपारा स्थित आवास पर अंतिम सांस ली। वह पिछले काफी समय से गंभीर स्वास्थ्य समस्याओं से जूझ रहे थे।

71 वर्षीय चांगमा डिमेंशिया यानी भूलने की बीमारी से पीड़ित थे। उनके निधन की खबर फैलते ही पूरे असम और खेल प्रेमियों में शोक की लहर दौड़ गई है। वह केवल एक खिलाड़ी नहीं, बल्कि एक युग के प्रतीक थे।

फुटबॉल के जादूगर का सफर

गिलबर्टसन चांगमा का जन्म 12 अप्रैल 1955 को डिब्रूगढ़ में हुआ था। बचपन से ही उनके पैरों में फुटबॉल का जादू था। उन्होंने अपनी प्रारंभिक शिक्षा के बाद खेल को ही अपना करियर बनाने का फैसला किया।

1971 में उन्होंने असम पुलिस में एक कांस्टेबल के रूप में अपने करियर की शुरुआत की थी। पुलिस विभाग में शामिल होने के बाद उनके खेल कौशल को एक नया मंच मिला। उन्होंने पुलिस टीम को नई ऊंचाइयों पर पहुंचाया।

जल्द ही वह असम पुलिस की फुटबॉल टीम की पहचान बन गए। उनकी फुर्ती और गोल करने की क्षमता ने उन्हें 'मैन ऑफ गोल्डन बूट' का खिताब दिलाया। मैदान पर उनकी मौजूदगी विरोधियों के लिए खौफ का कारण होती थी।

असम पुलिस टीम की कप्तानी

1972 में उन्हें असम पुलिस फुटबॉल टीम का कप्तान बनाया गया। उनके नेतृत्व में टीम ने कई ऐतिहासिक जीत हासिल कीं। उन्होंने न केवल राज्य स्तर पर बल्कि राष्ट्रीय स्तर पर भी अपनी छाप छोड़ी।

चांगमा का खेल के प्रति समर्पण अतुलनीय था। वह पुलिस विभाग में एक वरिष्ठ अधिकारी के पद तक पहुंचे। रिटायरमेंट के बाद वह कहिलीपारा में 10वीं असम पुलिस बटालियन के पास रहने लगे थे।

उनके निधन पर असम के मुख्यमंत्री और विभिन्न राजनीतिक दलों के नेताओं ने दुख व्यक्त किया है। राजनीतिक गलियारों में उन्हें एक अनुशासित अधिकारी और महान खिलाड़ी के रूप में याद किया जा रहा है।

राजनीतिक और सामाजिक प्रतिक्रिया

असम की राजनीति में भी चांगमा का गहरा सम्मान था। कई मंत्रियों ने उनके आवास पर जाकर उन्हें श्रद्धांजलि दी। राज्य सरकार ने उनके योगदान को याद करते हुए इसे खेल जगत की अपूरणीय क्षति बताया है।

विपक्षी दलों के नेताओं ने भी शोक संतप्त परिवार के प्रति अपनी संवेदनाएं व्यक्त की हैं। चांगमा ने युवाओं को खेलों की ओर प्रेरित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी। उनका जीवन संघर्ष और सफलता की एक मिसाल है।

खेल प्रेमियों का कहना है कि चांगमा जैसा खिलाड़ी सदियों में एक बार पैदा होता है। उन्होंने असम पुलिस की टीम को उस दौर में शीर्ष पर पहुंचाया जब संसाधन बहुत सीमित थे। उनकी तकनीक आज भी युवा खिलाड़ियों के लिए एक सीख है।

एक प्रेरणादायक विरासत

गिलबर्टसन चांगमा की विरासत केवल मैदान तक सीमित नहीं है। उन्होंने पुलिस बल में रहते हुए भी खेल भावना को जीवित रखा। उनके जाने से असम ने अपना एक अनमोल रत्न खो दिया है।

डिमेंशिया के कारण उनके अंतिम दिन काफी कष्टदायक रहे। हालांकि, उनकी बीमारी के दौरान भी उनके प्रशंसक और पूर्व साथी लगातार उनके संपर्क में थे। फुटबॉल के प्रति उनका जुनून उनकी यादों में हमेशा बना रहेगा।

आज शाम उनका अंतिम संस्कार राजकीय सम्मान के साथ किए जाने की संभावना है। इसमें खेल, पुलिस और राजनीति जगत की कई बड़ी हस्तियों के शामिल होने की उम्मीद है। पूरा असम आज अपने 'गोल्डन बूट' नायक को नम आंखों से विदाई दे रहा है।

चांगमा के परिवार में उनकी पत्नी और बच्चे हैं। उनके योगदान को देखते हुए खेल अकादमियों ने उनके नाम पर पुरस्कार शुरू करने की मांग की है। ताकि आने वाली पीढ़ियां उनके गौरवशाली इतिहास से परिचित हो सकें।

अंततः, गिलबर्टसन चांगमा का जाना एक शून्य पैदा कर गया है। लेकिन मैदान पर उनके द्वारा दागे गए गोल और उनकी कप्तानी के किस्से हमेशा सुनाए जाते रहेंगे। वह असम के खेल इतिहास में सदैव अमर रहेंगे।

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