भीलवाड़ा | राजस्थान के राज्यपाल हरिभाऊ बागडे ने भीलवाड़ा के मेडिसिटी ग्राउंड में आयोजित एक भव्य कार्यक्रम में शिरकत की। यह आयोजन विश्व नवकार महामंत्र दिवस के उपलक्ष्य में किया गया था।
नवकार महामंत्र: आत्मशुद्धि का मार्ग: भीलवाड़ा में बोले राज्यपाल हरिभाऊ बागडे: नवकार महामंत्र आत्मशुद्धि और साधना का प्रतीक है
राज्यपाल हरिभाऊ बागडे ने भीलवाड़ा में विश्व नवकार महामंत्र दिवस पर शिरकत की। उन्होंने इस मंत्र को मानवीय मूल्यों और आध्यात्मिक उन्नति के लिए बेहद महत्वपूर्ण बताया।
HIGHLIGHTS
- राज्यपाल हरिभाऊ बागडे ने भीलवाड़ा में विश्व नवकार महामंत्र दिवस समारोह को संबोधित किया।
- नवकार महामंत्र को आत्मशुद्धि, आस्था और साधना का प्रतीक बताया गया।
- यह मंत्र अहिंसा, अपरिग्रह और अनेकांतवाद के सिद्धांतों पर आधारित है।
- सहकारिता मंत्री ने भगवान महावीर के 'जियो और जीने दो' के संदेश को याद किया।
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आत्मशुद्धि का प्रतीक है नवकार
राज्यपाल ने कहा कि नवकार महामंत्र किसी व्यक्ति विशेष की स्तुति नहीं है। यह हमारी संस्कृति में रची-बसी आत्मशुद्धि और साधना का एक सशक्त माध्यम है।यह मंत्र इंसान को भीतर से मजबूत बनाता है। यह हमें उच्चतर जीवन मूल्यों की ओर बढ़ने की प्रेरणा देता है, जिससे जीवन में सकारात्मक बदलाव आता है।
प्राचीन सिद्धांतों पर आधारित
राज्यपाल के अनुसार, यह विश्व के सबसे प्राचीन और पावन मंत्रों में से एक है। यह अहिंसा, अपरिग्रह और अनेकांतवाद जैसे महान सिद्धांतों की नींव पर टिका है।वर्तमान वैश्विक हालातों में इसकी प्रासंगिकता और बढ़ गई है। यह समाज में शांति, समृद्धि और सुरक्षा का संदेश फैलाने में सहायक सिद्ध होता है।
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जियो और जीने दो का संदेश
कार्यक्रम में सहकारिता मंत्री गौतम कुमार दक भी मौजूद रहे। उन्होंने दुनिया में चल रहे युद्धों पर चिंता जताई और भगवान महावीर के संदेशों को याद किया।उन्होंने कहा कि 'जियो और जीने दो' का सिद्धांत आज की मानवता के लिए सबसे जरूरी है। तीर्थंकरों ने हमें आंतरिक शत्रुओं पर विजय पाना सिखाया है।राज्यपाल ने अंत में सभी से आत्मोन्नति की दिशा में अग्रसर होने का आह्वान किया। उन्होंने क्रोध और मोह जैसे विकारों को त्यागने की बात कही।
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