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राजनीति

चुनाव आयोग पर डोटासरा का हमला: चुनाव आयोग में 14 आपत्तियों की रिपोर्ट पर डोटासरा का हमला, ज्ञानेश कुमार को हटाने और गिरफ्तार करने की मांग

Pradeep Beedawat

राजस्थान प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष गोविंद सिंह डोटासरा ने निर्वाचन आयुक्त सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी की कथित 14 लिखित आपत्तियों को लेकर मुख्य निर्वाचन आयुक्त ज्ञानेश कुमार पर गंभीर आरोप लगाए। उन्होंने SIR प्रक्रिया की समीक्षा तथा ज्ञानेश कुमार को पद से हटाने की मांग की। चुनाव आयोग ने अलग-अलग विचारों को सामान्य संस्थागत प्रक्रिया बताया है।

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HIGHLIGHTS

  • डोटासरा ने दो निर्वाचन आयुक्तों की 10 महीनों में 14 आपत्तियों से जुड़ी रिपोर्ट का हवाला दिया।फॉर्म-6 में बदलाव, मतदाता सूची के डिजिटल नियंत्रण और पश्चिम बंगाल की अपीलों पर सवाल उठाए।मुख्य निर्वाचन आयुक्त ज्ञानेश कुमार को पद से हटाने और गिरफ्तार करने की मांग की।SIR प्रक्रिया की पारदर्शी समीक्षा कराने की मांग भी रखी गई।राजस्थान निकाय चुनावों के वार्ड परिसीमन में बड़े मतदाता अंतर का आरोप लगाया।निर्वाचन आयोग ने मतभिन्नता और लिखित सुझावों को सामान्य संस्थागत प्रक्रिया बताया है।
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जयपुर, 24 सितंबर 2026 | राजस्थान प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष गोविंद सिंह डोटासरा ने मतदाता सूचियों के विशेष गहन पुनरीक्षण यानी SIR और निर्वाचन आयोग की आंतरिक निर्णय प्रक्रिया को लेकर मुख्य निर्वाचन आयुक्त ज्ञानेश कुमार पर गंभीर आरोप लगाए हैं। उन्होंने ज्ञानेश कुमार को तत्काल पद से हटाने, उनके खिलाफ कार्रवाई करने और उनके कार्यकाल में हुई SIR प्रक्रिया की पारदर्शी समीक्षा कराने की मांग की।

महत्वपूर्ण: भाजपा पर वोटों और जनादेश की कथित चोरी से जुड़े आरोप डोटासरा और कांग्रेस के राजनीतिक दावे हैं। इन आरोपों की किसी न्यायिक अथवा स्वतंत्र जांच में पुष्टि की जानकारी उपलब्ध नहीं है। निर्वाचन आयोग ने अपने सदस्यों की अलग-अलग राय को संस्थागत विचार-विमर्श का सामान्य हिस्सा बताया है।

दो आयुक्तों की 14 आपत्तियों का दिया हवाला

जयपुर स्थित प्रदेश कांग्रेस मुख्यालय में आयोजित प्रेसवार्ता को संबोधित करते हुए डोटासरा ने एक समाचार पत्र की जांच रिपोर्ट का उल्लेख किया। रिपोर्ट के अनुसार निर्वाचन आयुक्त सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी ने पिछले 10 महीनों के दौरान आयोग के विभिन्न निर्णयों पर कम से कम 14 बार लिखित आपत्तियां दर्ज कीं।

इन आपत्तियों में मतदाता सूची में नाम जोड़ने वाले फॉर्म-6 में कथित अनधिकृत बदलाव, मतदाता सूची से जुड़े डिजिटल सिस्टम का केंद्रीकरण, वैधानिक अधिकारियों की पहुंच सीमित करने और पश्चिम बंगाल में मतदाता सूची संबंधी अपीलें दायर करने जैसे विषय शामिल बताए गए हैं।

डोटासरा ने आरोप लगाया कि कई महत्वपूर्ण निर्णय निर्वाचन आयोग के तीनों सदस्यों की सामूहिक जानकारी और सहमति के बिना लिए गए। उन्होंने इसे आयोग की संवैधानिक निर्णय प्रक्रिया के विपरीत बताया।

फॉर्म-6 में बदलाव पर उठाए सवाल

डोटासरा ने कहा कि नए मतदाताओं के पंजीकरण के लिए उपयोग होने वाले फॉर्म-6 में SIR से जुड़े नए प्रश्न शामिल किए गए। आवेदनकर्ताओं से यह जानकारी मांगी गई कि उनका अथवा उनके माता-पिता या दादा-दादी का नाम पिछली गहन पुनरीक्षण वाली मतदाता सूची में था या नहीं।

उन्होंने दावा किया कि निर्वाचन आयुक्तों ने इस बदलाव को लेकर कानूनी और प्रक्रियागत आपत्ति दर्ज कराई थी। प्रकाशित रिपोर्ट के अनुसार दोनों आयुक्तों का मत था कि वैधानिक फॉर्म में बदलाव के लिए निर्धारित कानूनी प्रक्रिया और नियमों में संशोधन आवश्यक है।

मतदाता सूची के डिजिटल नियंत्रण का मुद्दा

डोटासरा ने आरोप लगाया कि मतदाता सूची में नाम जोड़ने और हटाने से संबंधित डिजिटल व्यवस्था का नियंत्रण केंद्रीकृत किया गया। उन्होंने कहा कि परंपरागत रूप से निर्वाचक पंजीकरण अधिकारियों के पास मतदाता सूची से जुड़े पोर्टल का आवश्यक एक्सेस रहता है, लेकिन नई व्यवस्था में उनकी पहुंच सीमित होने के मामले सामने आए।

प्रकाशित रिपोर्ट में भी निर्वाचन आयुक्तों की ओर से मतदाता सूची के सॉफ्टवेयर और आईटी व्यवस्था के केंद्रीकरण पर चिंता जताए जाने का उल्लेख है। आयुक्तों ने कथित तौर पर सवाल उठाया कि किसी तकनीकी अधिकारी को वैधानिक निर्वाचन अधिकारियों की पहुंच सीमित करने का अधिकार कैसे दिया जा सकता है।

पश्चिम बंगाल की अपीलों पर कांग्रेस के आरोप

डोटासरा ने पश्चिम बंगाल की SIR प्रक्रिया का उल्लेख करते हुए बड़ी संख्या में मतदाताओं के नाम हटाए जाने और बाद में अपीलों के माध्यम से बहाल किए जाने का दावा किया। उन्होंने आयोग की ओर से मतदाताओं के पक्ष में आए फैसलों के खिलाफ पुनः अपील किए जाने की प्रक्रिया पर भी सवाल उठाया।

उन्होंने पूछा कि इन अपीलों की अनुमति किस स्तर पर दी गई और क्या निर्वाचन आयोग के दोनों अन्य सदस्यों को इस निर्णय की जानकारी दी गई थी। पश्चिम बंगाल के आंकड़ों और अपील प्रक्रिया पर अलग-अलग सार्वजनिक रिपोर्ट सामने आई हैं, इसलिए कांग्रेस के सभी संख्यात्मक दावों की स्वतंत्र पुष्टि अपेक्षित है।

आयोग में सामूहिक निर्णय प्रक्रिया की मांग

डोटासरा ने वर्ष 1995 के सुप्रीम कोर्ट के एक निर्णय का हवाला देते हुए कहा कि तीन सदस्यीय निर्वाचन आयोग में निर्णय सर्वसम्मति अथवा बहुमत के आधार पर होना चाहिए। उन्होंने कहा कि किसी एक पदाधिकारी का निर्णय पूरे आयोग का फैसला नहीं माना जा सकता।

मुख्य निर्वाचन आयुक्त और अन्य निर्वाचन आयुक्तों से संबंधित वर्ष 2023 के कानून में भी आयोग का कामकाज जहां तक संभव हो सर्वसम्मति से करने तथा मतभेद होने पर बहुमत से निर्णय लेने का प्रावधान है।

ज्ञानेश कुमार को हटाने की मांग

डोटासरा ने कहा कि कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे और लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी के नेतृत्व में पार्टी मुख्य निर्वाचन आयुक्त ज्ञानेश कुमार को पद से हटाने की मांग करती है। उन्होंने ज्ञानेश कुमार की गिरफ्तारी की मांग भी रखी।

उन्होंने कहा कि ज्ञानेश कुमार के कार्यकाल में हुई SIR प्रक्रिया, मतदाता सूची में किए गए बदलावों और मतदाता नाम जोड़ने अथवा हटाने से संबंधित निर्णयों की पारदर्शी एवं स्वतंत्र समीक्षा होनी चाहिए।

डोटासरा की गिरफ्तारी संबंधी मांग एक राजनीतिक वक्तव्य है। किसी व्यक्ति की गिरफ्तारी जांच एजेंसी, उपलब्ध साक्ष्य और कानूनी प्रक्रिया के आधार पर ही हो सकती है।

निर्वाचन आयोग ने क्या कहा?

दो निर्वाचन आयुक्तों की लिखित आपत्तियों से संबंधित रिपोर्ट सामने आने के बाद निर्वाचन आयोग ने कहा कि अलग-अलग विचार और सुझाव किसी भी संस्था की निर्णय प्रक्रिया का सामान्य हिस्सा होते हैं। आयोग के अनुसार लिखित टिप्पणियां, तकनीकी सुझाव और आंतरिक नियंत्रण नियमित संस्थागत प्रक्रियाएं हैं।

हालांकि प्रकाशित रिपोर्टों में कहा गया है कि आयोग ने उठाई गई प्रत्येक आपत्ति पर अलग-अलग विस्तृत जवाब सार्वजनिक नहीं किया।

राजस्थान निकाय चुनाव के परिसीमन पर भी सवाल

डोटासरा ने राजस्थान के नगर निकाय चुनावों में वार्ड परिसीमन को लेकर भी भाजपा और राज्य सरकार पर आरोप लगाए। उन्होंने दावा किया कि वार्डों की मतदाता संख्या में नियमों से कहीं अधिक अंतर रखा गया, जिससे चुनावी परिणाम प्रभावित हुए।

उन्होंने दावा किया कि अलग-अलग वार्डों की मतदाता संख्या में जोधपुर में 227.7 प्रतिशत, अजमेर में 144.7 प्रतिशत, जयपुर में 139.1 प्रतिशत, कोटा में 66.6 प्रतिशत और भरतपुर में 55.5 प्रतिशत तक अंतर रहा। ये आंकड़े कांग्रेस की ओर से प्रेसवार्ता में प्रस्तुत किए गए हैं। संबंधित निर्वाचन अथवा प्रशासनिक अधिकारियों की प्रतिक्रिया उपलब्ध नहीं है।

एक प्रकाशित विश्लेषण में भी जयपुर, जोधपुर और कोटा में कांग्रेस को भाजपा के मुकाबले कुल मिलाकर अधिक मत मिलने के बावजूद कम वार्ड हासिल होने तथा कांग्रेस समर्थक मतों के कुछ वार्डों में अधिक केंद्रित होने की बात सामने आई थी। हालांकि यह विश्लेषण अपने आप में किसी अवैध परिसीमन को प्रमाणित नहीं करता।

भाजपा पर जनादेश प्रभावित करने का आरोप

डोटासरा ने आरोप लगाया कि नगर निकाय चुनावों में मतदाताओं को डराने, प्रलोभन देने और प्रशासनिक शक्तियों के दुरुपयोग के माध्यम से जनादेश प्रभावित करने का प्रयास किया गया। उन्होंने इसे राष्ट्रीय स्तर पर कांग्रेस की ओर से लगाए जा रहे मतदाता सूची में गड़बड़ी के आरोपों से जोड़ा।

भाजपा अथवा राज्य सरकार की ओर से इस प्रेसवार्ता में लगाए गए आरोपों पर तत्काल प्रतिक्रिया उपलब्ध नहीं हुई। निष्पक्ष रिपोर्टिंग के लिए संबंधित पक्षों की प्रतिक्रिया सामने आने पर उसे भी खबर में शामिल किया जाना आवश्यक होगा।

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