उज्जैन |
गुरु पूर्णिमा 29 को: गुरु पूर्णिमा 29 को: शिव पूजा और दान का विशेष महत्व
29 जुलाई को गुरु पूर्णिमा है, जो महर्षि वेद व्यास के जन्मदिन के रूप में मनाई जाती है। इस दिन गुरु पूजन, शिव अभिषेक और दान-पुण्य का विशेष महत्व है।
HIGHLIGHTS
- 29 जुलाई को आषाढ़ पूर्णिमा है, जिसे गुरु पूर्णिमा कहते हैं।
- इसी दिन महर्षि वेद व्यास का जन्म हुआ था, इसलिए यह गुरुओं के सम्मान का दिन है।
- इस दिन शिव पूजा, दान-पुण्य और पवित्र स्नान का विशेष महत्व है।
- गुरु पूर्णिमा के बाद 30 जुलाई से सावन का महीना शुरू हो जाएगा।
संबंधित खबरें
बुधवार, 29 जुलाई को आषाढ़ मास की पूर्णिमा मनाई जाएगी, जिसे गुरु पूर्णिमा के नाम से जाना जाता है। यह पर्व ज्ञान और मार्गदर्शन के प्रतीक गुरुओं के प्रति सम्मान और कृतज्ञता व्यक्त करने के लिए समर्पित है।
गुरु पूर्णिमा का महत्व
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इसी पावन तिथि पर महर्षि वेदव्यास का जन्म हुआ था। उन्होंने वेदों का विस्तार किया और महाभारत जैसे महाकाव्य की रचना की। इसी कारण इस पर्व को व्यास पूर्णिमा भी कहा जाता है।
यह दिन गुरु के प्रति सम्मान व्यक्त करने का सबसे बड़ा अवसर माना जाता है। गुरु ही हमारे जीवन में अज्ञान के अंधकार को मिटाकर ज्ञान का प्रकाश फैलाते हैं और सही मार्ग दिखाते हैं।
संबंधित खबरें
इस विशेष दिन पर लोग अपने गुरुओं का पूजन करते हैं, उनका आशीर्वाद लेते हैं और अपनी श्रद्धा के अनुसार उन्हें उपहार भेंट करते हैं। गुरु पूर्णिमा के ठीक बाद 30 जुलाई से पवित्र सावन मास का शुभारंभ हो जाएगा।
गुरु पूर्णिमा पर कैसे करें पूजा?
उज्जैन के ज्योतिषाचार्य पं. मनीष शर्मा के अनुसार, गुरु पूर्णिमा पर सुबह जल्दी उठकर स्नान करना चाहिए। स्नान करते समय सभी तीर्थों और पवित्र नदियों का ध्यान करना शुभ होता है।
यदि संभव हो, तो स्नान के पानी में थोड़ा सा गंगाजल मिला लेना चाहिए। ऐसा माना जाता है कि इससे घर पर ही तीर्थ स्नान के समान पुण्य फल प्राप्त होता है।
सूर्य देव की पूजा
स्नान के बाद सूर्योदय के समय तांबे के लोटे में जल, चावल और लाल फूल डालकर सूर्य देव को अर्घ्य दें। अर्घ्य देते समय 'ॐ सूर्याय नमः' मंत्र का जाप करना चाहिए।
माता-पिता और गुरु का सम्मान
माता-पिता को ही हमारा पहला गुरु माना जाता है, इसलिए उनका आशीर्वाद अवश्य लें। इसके बाद अपने गुरु से मिलकर उनका पूजन करें और श्रद्धा के अनुसार शॉल, श्रीफल या कोई अन्य उपहार भेंट करें।
गुरु पूर्णिमा पर करें शिव जी का अभिषेक
गुरु पूर्णिमा के दिन भगवान शिव की पूजा का विशेष महत्व माना गया है। इस दिन शिवलिंग का अभिषेक करना अत्यंत शुभ होता है।
शिवलिंग पर शुद्ध जल और दूध अर्पित करें। इसके बाद भगवान शिव को प्रिय बिल्व पत्र, धतूरा और आंकड़े के फूल चढ़ाएं।
भगवान को चंदन का तिलक लगाएं, धूप-दीप जलाएं और मिठाई का भोग लगाकर उनकी आरती करें। पूजा के दौरान 'ॐ नमः शिवाय' मंत्र का निरंतर जाप करते रहना चाहिए।
अन्य देवताओं की पूजा और मंत्र जाप
जो लोग भगवान शिव, विष्णु, श्रीराम, श्रीकृष्ण, गणेश या किसी अन्य देवता को अपना गुरु मानते हैं, वे इस दिन उनकी विशेष पूजा-अर्चना कर सकते हैं।
पूजा में अपनी श्रद्धा के अनुसार 'ॐ नमो भगवते वासुदेवाय', 'ॐ रामदूताय नमः', 'कृं कृष्णाय नमः' और 'ॐ रां रामाय नमः' जैसे मंत्रों का जाप किया जा सकता है।
मंत्र जाप के साथ ध्यान करने से मन को अद्भुत शांति मिलती है और आध्यात्मिक ऊर्जा का संचार होता है।
दान-पुण्य का भी है विशेष महत्व
गुरु पूर्णिमा पर दान-पुण्य करने का भी बड़ा महत्व है। वर्षा ऋतु को ध्यान में रखते हुए जरूरतमंद लोगों को अनाज, वस्त्र, छाता या आर्थिक सहायता देना पुण्यदायी माना गया है।
इसके अलावा, किसी मंदिर में पूजा सामग्री अर्पित करना भी शुभ माना जाता है। धार्मिक मान्यता है कि इस दिन किया गया दान लंबे समय तक शुभ फल प्रदान करता है।
तीर्थ दर्शन और पवित्र स्नान की परंपरा
इस दिन किसी प्राचीन मंदिर में दर्शन-पूजन करने और पवित्र नदी में स्नान करने की भी परंपरा है। यदि किसी पवित्र नदी तक जाना संभव न हो, तो घर पर ही स्नान के पानी में गंगाजल मिलाकर स्नान किया जा सकता है।
स्नान के बाद अपने घर के आसपास ही दान-पुण्य करना चाहिए। गाय को हरी घास खिलाएं, कुत्ते को रोटी दें और किसी तालाब में मछलियों के लिए आटे की गोलियां बनाकर डालें।
*Edit with Google AI Studio