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राज्य

बारिश के बाद भी सूखा: रामगढ़ बांध में पानी का इंतजार अतिक्रमण बने बाधा

बलजीत सिंह शेखावत

जयपुर में भारी बारिश के बावजूद रामगढ़ बांध सूखा है। अतिक्रमण और एनीकट पानी की राह में रोड़ा बने हुए हैं। मामले पर हाईकोर्ट में 13 अगस्त को सुनवाई होगी।

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HIGHLIGHTS

  • लगातार बारिश के बाद भी रामगढ़ बांध में पानी की आवक नहीं।
  • मुख्य बाण गंगा नदी और सहायक नालों का बहाव रुका हुआ है।
  • नदी-नालों के बहाव क्षेत्र में अतिक्रमण पानी की राह में रोड़ा बने हैं।
  • अतिक्रमण मामले पर 13 अगस्त को राजस्थान हाईकोर्ट में सुनवाई होगी।
ramgarh dam jaipur awaits water amidst encroachments

जयपुर |

ग्रामीण क्षेत्र में पिछले दो दिनों से हो रही लगातार बारिश के बावजूद, ऐतिहासिक रामगढ़ बांध को अब भी पानी की आवक का बेसब्री से इंतजार है। बांध को जीवन देने वाली मुख्य बाण गंगा नदी समेत अन्य सहायक नदियां और नाले सूखे पड़े हैं, जिससे ग्रामीणों में निराशा का माहौल है।

बारिश का पानी बांध तक क्यों नहीं पहुंचा?

विशेषज्ञों के अनुसार, बारिश के बाद पहाड़ियों से बहकर आने वाला पानी नदी-नालों तक पहुंचने से पहले ही रास्ते में बने एनीकट और तालाबों में जमा हो रहा है।

इसके अलावा, नदी-नालों के बहाव क्षेत्र में बड़े पैमाने पर हुए अतिक्रमण भी पानी के प्राकृतिक प्रवाह में सबसे बड़ी बाधा बने हुए हैं।

अतिक्रमण पर हाईकोर्ट की सख्ती

इस मामले पर राजस्थान हाईकोर्ट ने सख्त रुख अपनाया है, लेकिन जमीनी स्तर पर स्थिति जस की तस बनी हुई है। ग्रामीणों का आरोप है कि प्रशासनिक कार्रवाई केवल कागजों तक ही सीमित है।

बाण गंगा से जुड़ने वाले छोटे-बड़े नालों पर भी कई जगह अतिक्रमण ने उनके प्राकृतिक बहाव को रोक दिया है।

विचाराधीन मामले और जमीनी हकीकत

अधिकारियों ने बताया कि कैचमेंट एरिया में अतिक्रमण से जुड़े कुल 277 रेफरेंस तैयार किए गए थे। इनमें से 197 पर निर्णय लिया जा चुका है, लेकिन लगभग 80 रेफरेंस अभी भी विचाराधीन हैं।

चिंता की बात यह है कि जिन मामलों में वर्षों पहले निर्णय हो चुका है, उन पर भी मौके पर कोई कार्रवाई नहीं हुई है। रिकॉर्ड में मामले निस्तारित दिखाए जा रहे हैं, लेकिन जमीनी हकीकत कुछ और ही बयां करती है।

अब सभी की निगाहें 13 अगस्त को हाईकोर्ट में होने वाली सुनवाई पर टिकी हैं, जहां प्रशासन को अपनी रिपोर्ट पेश करनी है। सबसे बड़ा सवाल यही है कि अदालती आदेशों की जमीनी स्तर पर पालना कब सुनिश्चित होगी।

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