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भारत

भारत-रूस के बीच बड़ी गैस डील: होर्मुज संकट के बीच भारत का मास्टरस्ट्रोक, अर्जेंटीना के बाद अब रूस से होगी LNG और LPG की बंपर सप्लाई

मानवेन्द्र जैतावत मानवेन्द्र जैतावत

ईरान युद्ध के कारण होर्मुज जलडमरूमध्य में उत्पन्न ऊर्जा संकट को देखते हुए भारत ने रूस के साथ बड़ी डील की तैयारी की है। अर्जेंटीना के बाद अब रूस भारत को बड़े पैमाने पर LNG और LPG की आपूर्ति करेगा, जिससे देश की ऊर्जा सुरक्षा सुनिश्चित होगी।

HIGHLIGHTS

  • ईरान युद्ध के कारण होर्मुज जलडमरूमध्य में आपूर्ति बाधित होने से वैश्विक ऊर्जा संकट गहरा गया है।
  • भारत ने ऊर्जा सुरक्षा के लिए रूस और अर्जेंटीना जैसे वैकल्पिक देशों से संपर्क साधा है।
  • रूसी समाचार एजेंसी TASS के अनुसार, मॉस्को भारत को भारी मात्रा में LNG और LPG देने को तैयार है।
  • यह समझौता भारत की घरेलू गैस जरूरतों को पूरा करने और खाड़ी देशों पर निर्भरता कम करने में सहायक होगा।
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नई दिल्ली | पश्चिम एशिया में जारी भीषण सैन्य संघर्ष ने पूरी दुनिया के सामने एक गंभीर ऊर्जा संकट खड़ा कर दिया है। ईरान और इजरायल के बीच छिड़ी जंग के कारण वैश्विक तेल और गैस आपूर्ति का मुख्य मार्ग, होर्मुज जलडमरूमध्य, वर्तमान में पूरी तरह बाधित हो चुका है।

इस कठिन स्थिति को देखते हुए भारत ने अपनी ऊर्जा सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए तेजी से रणनीतिक कदम उठाए हैं। अर्जेंटीना के बाद अब भारत का सबसे भरोसेमंद और पुराना मित्र रूस एक बार फिर संकटमोचक बनकर सामने आया है। दोनों देशों के बीच गैस आपूर्ति को लेकर सहमति बन गई है।

रूस से होगी गैस की भारी सप्लाई

रूसी समाचार एजेंसी TASS की ताजा रिपोर्ट के अनुसार, भारत और रूस के बीच LNG और LPG की आपूर्ति बढ़ाने को लेकर बातचीत एक निर्णायक मोड़ पर पहुंच गई है। मॉस्को ने भारत की बढ़ती ऊर्जा जरूरतों को पूरा करने के लिए जहाजों के जरिए भारी मात्रा में गैस भेजने की तत्परता दिखाई है।

सूत्रों का कहना है कि दोनों देशों के बीच हुई हालिया उच्च स्तरीय चर्चाओं में ऊर्जा सहयोग को विस्तार देने पर व्यापक सहमति बनी है। इसमें न केवल तरलीकृत प्राकृतिक गैस (LNG) बल्कि घरेलू उपयोग में आने वाली LPG की सप्लाई पर भी विशेष ध्यान दिया गया है।

होर्मुज संकट का भारत पर असर

ईरान युद्ध के लंबा खिंचने की आशंकाओं के बीच होर्मुज जलडमरूमध्य का बंद होना भारत के लिए चिंता का विषय था। खाड़ी देशों से होने वाली तेल और गैस की सप्लाई का एक बड़ा हिस्सा इसी रास्ते से होकर गुजरता है। इस मार्ग के बाधित होने से पेट्रोल और गैस की कीमतों में उछाल का खतरा मंडरा रहा था।

हालांकि, भारत ने समय रहते वैकल्पिक स्रोतों की तलाश शुरू कर दी थी। पहले लैटिन अमेरिकी देश अर्जेंटीना ने भारत की मदद का हाथ बढ़ाया और अब रूस के साथ होने वाला यह समझौता भारत के लिए गेम-चेंजर साबित होने वाला है। इससे भारत की खाड़ी देशों पर निर्भरता काफी हद तक कम हो जाएगी।

रणनीतिक साझेदारी को मिली मजबूती

विशेषज्ञों का मानना है कि रूस के साथ बढ़ता ऊर्जा सहयोग भारत की रणनीतिक जरूरतों के बिल्कुल अनुरूप है। पिछले कुछ महीनों में भारत ने रूस से कच्चे तेल के आयात में भी रिकॉर्ड बढ़ोतरी की है। अब गैस क्षेत्र में यह नया सहयोग दोनों देशों के द्विपक्षीय संबंधों को एक नई ऊंचाई पर ले जाएगा।

इस वार्ता में निजी और सार्वजनिक क्षेत्र की कंपनियों की भागीदारी भी बढ़ाई जा रही है। इससे आने वाले समय में दीर्घकालिक आपूर्ति समझौतों और निवेश के नए अवसर खुलेंगे। भारत अपनी ऊर्जा स्रोतों के विविधीकरण की रणनीति पर मजबूती से काम कर रहा है ताकि वैश्विक तनाव का असर घरेलू बाजार पर न पड़े।

घरेलू उपभोक्ताओं को मिलेगी राहत

भारत में घरेलू ईंधन के रूप में LPG की मांग लगातार बढ़ रही है। रूस से होने वाली इस सप्लाई से यह सुनिश्चित होगा कि वैश्विक संकट के बावजूद भारत के घरों में रसोई गैस की कमी नहीं होगी। सरकार का लक्ष्य है कि अंतरराष्ट्रीय अस्थिरता के बीच भी देश के भीतर ऊर्जा की कीमतें स्थिर बनी रहें।

आने वाले हफ्तों में इस समझौते की आधिकारिक घोषणा और शिपमेंट की समय-सारणी तय होने की उम्मीद है। रूस ने स्पष्ट किया है कि वह भारत की ऊर्जा सुरक्षा को मजबूत करने के लिए हर संभव मदद करेगा। यह सहयोग न केवल आर्थिक बल्कि भू-राजनीतिक दृष्टि से भी भारत की स्थिति को वैश्विक मंच पर और मजबूत बनाता है।

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