जयपुर | राजस्थान की राजधानी जयपुर के ऐतिहासिक रामनिवास बाग से कीमती चंदन के पेड़ों की चोरी का मामला एक बार फिर सुर्खियों में है। इस बार भारत के नियंत्रक और महालेखा परीक्षक (CAG) ने इस मामले में जेडीए की कार्यप्रणाली पर गहरी नाराजगी जताई है।
जयपुर: 90 लाख के चंदन चोरी का खुलासा: जयपुर रामनिवास बाग से 90 लाख के चंदन पेड़ चोरी: कैग ने जेडीए को लगाई फटकार, सुरक्षा एजेंसी से वसूली के आदेश
जयपुर के रामनिवास बाग से तीन कीमती चंदन के पेड़ चोरी होने पर कैग ने सख्त रुख अपनाया है। ऑडिट में सुरक्षा एजेंसी की मिलीभगत और जेडीए अफसरों की लापरवाही सामने आई है।
HIGHLIGHTS
- रामनिवास बाग से 90 लाख रुपये की कीमत के तीन रियासतकालीन चंदन के पेड़ चोरी हुए।
- कैग ने सुरक्षा एजेंसी और जेडीए के अधिकारियों के बीच मिलीभगत की आशंका जताई है।
- वन संरक्षक की रिपोर्ट में सिक्योरिटी एजेंसी और जेडीए इंस्पेक्टर को सीधे तौर पर दोषी माना गया।
- लापरवाही के बावजूद सुरक्षा एजेंसी का ठेका बार-बार बढ़ाए जाने पर कैग ने गंभीर सवाल उठाए हैं।
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कैग ने जयपुर विकास प्राधिकरण को फटकार लगाते हुए पूछा है कि आखिर 90 लाख रुपये के नुकसान की वसूली अब तक क्यों नहीं की गई? इस पूरे घटनाक्रम में सुरक्षा एजेंसी और स्थानीय अधिकारियों की मिलीभगत की गंभीर आशंका जताई गई है।
क्या है पूरा मामला?
रामनिवास बाग के सावन-भादौ पार्क में रियासतकालीन चंदन के कई बेशकीमती पेड़ लगे हुए थे। ऑडिट रिपोर्ट के अनुसार, यहां से तीन बड़े और बहुमूल्य चंदन के पेड़ काटकर चोरी कर लिए गए। यह चोरी एक बार में नहीं, बल्कि अलग-अलग समय पर हुई।
हैरानी की बात यह है कि जिस जगह से पेड़ चोरी हुए, वहां सुरक्षा का कड़ा पहरा था। इसके बावजूद चोरों ने बड़े आराम से पेड़ों को काटकर गायब कर दिया। कैग ने इसे सुरक्षा में बड़ी चूक और एजेंसी की मिलीभगत करार दिया है।
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सुरक्षा एजेंसी की संदिग्ध भूमिका
रामनिवास बाग की सुरक्षा का जिम्मा 'सहारा एक्स-सर्विसमैन वेलफेयर कॉ-ऑपरेटिव सोसायटी लिमिटेड' के पास था। इस एजेंसी को 17 जून 2019 को एक साल के लिए ठेका दिया गया था। अनुबंध की शर्तों में स्पष्ट था कि किसी भी नुकसान की भरपाई एजेंसी करेगी।
जुलाई 2019 में पहले दो पेड़ चोरी हुए, जिसकी रिपोर्ट 26 जुलाई को दर्ज कराई गई। इसके ठीक सात महीने बाद, जनवरी 2020 में तीसरा पेड़ भी काट लिया गया। सुरक्षा गार्डों की मौजूदगी में लगातार हुई इन चोरियों ने सुरक्षा व्यवस्था की पोल खोल दी है।
कैग की तल्ख टिप्पणियां
कैग ने अपनी रिपोर्ट में कहा है कि इतनी बड़ी लापरवाही के बाद भी जेडीए ने सुरक्षा एजेंसी के खिलाफ सख्त कदम नहीं उठाए। उल्टे, गंभीर शिकायतों के बावजूद एजेंसी का कार्यकाल बार-बार बढ़ाया जाता रहा, जो कि नियमों का सीधा उल्लंघन है।
रिपोर्ट में साफ कहा गया है कि अनुबंध की शर्त संख्या-8 के तहत जेडीए को नुकसान की पूरी वसूली करनी चाहिए थी। वहीं शर्त संख्या-10 के अनुसार, संतोषजनक काम न होने पर कंपनी को तत्काल ब्लैकलिस्ट किया जाना चाहिए था, जो अधिकारियों ने नहीं किया।
90 लाख का भारी नुकसान
चोरी हुए पेड़ों की कीमत का आकलन वन संरक्षक और जेडीए के वरिष्ठ उद्यानविज्ञ ने किया है। बताया गया कि चोरी हुआ एक-एक पेड़ करीब 60 साल पुराना था। बाजार में इसकी कीमत और गुणवत्ता के आधार पर 10 हजार रुपये प्रति किलो का भाव तय किया गया है।
इस हिसाब से एक पेड़ की औसत कीमत 30 लाख रुपये बैठती है। तीन पेड़ों की कुल कीमत 90 लाख रुपये आंकी गई है। कैग ने अब कड़े आदेश दिए हैं कि यह पूरी राशि सुरक्षा एजेंसी से वसूली जाए और संबंधित लापरवाह अधिकारियों पर सख्त एक्शन लिया जाए।
जांच में खुली अधिकारियों की पोल
वन संरक्षक ने 1 फरवरी 2021 को भेजी अपनी जांच रिपोर्ट में सुरक्षा एजेंसी के साथ-साथ जेडीए इंस्पेक्टर को भी दोषी पाया था। जेडीए के अतिरिक्त आयुक्त ने भी माना था कि सुरक्षाकर्मियों की मिलीभगत के बिना इतनी बड़ी चोरी संभव नहीं है।
जांच में यह भी सामने आया कि एजेंसी के सुरक्षाकर्मी आम नागरिकों से अवैध वसूली में लगे रहते थे। वे समय पर सुपरवाइजर नहीं तैनात करते थे। इन गंभीर शिकायतों के बाद भी जेडीए प्रशासन मेहरबान बना रहा और कंपनी की सिक्योरिटी डिपॉजिट तक नहीं रोकी गई।
अब आगे क्या होगा?
कैग की इस रिपोर्ट के बाद जेडीए के गलियारों में हड़कंप मचा हुआ है। अब उच्चाधिकारियों को जवाब देना होगा कि उन्होंने कार्रवाई में इतनी देरी क्यों की। कैग ने स्पष्ट आदेश दिए हैं कि जल्द से जल्द 90 लाख रुपये की वसूली की प्रक्रिया पूरी की जाए।
यह मामला न केवल आर्थिक नुकसान का है, बल्कि जयपुर की ऐतिहासिक धरोहर की सुरक्षा में हुई बड़ी लापरवाही का भी है। अब देखना यह है कि क्या जेडीए प्रशासन दोषी एजेंसी पर नकेल कस पाता है या फिर फाइलें इसी तरह दबती रहेंगी।
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