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राजस्थान

जयपुर की बहनें साइकिल पर: जयपुर की दो बहनें साइकिल से जाएंगी अमेरिका, देंगी शांति का संदेश

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जयपुर की 10वीं की छात्रा सावी शेखावत अपनी 8 वर्षीय बहन के साथ विश्व शांति और परमाणु निरस्त्रीकरण का संदेश लेकर 18 हजार किमी की साइकिल यात्रा पर अमेरिका जाएंगी।

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HIGHLIGHTS

  • जयपुर की 10वीं की छात्रा सावी शेखावत अपनी 8 वर्षीय बहन के साथ साइकिल यात्रा पर निकलेंगी।
  • यह यात्रा 18,000 किलोमीटर लंबी होगी और अमेरिका में समाप्त होगी।
  • यात्रा का मुख्य उद्देश्य विश्व शांति और परमाणु निरस्त्रीकरण का संदेश देना है।
  • दोनों बहनें परमाणु हथियार संपन्न देशों के राष्ट्राध्यक्षों को ज्ञापन सौंपेंगी।
jaipur sisters cycle to america for nuclear disarmament mission

जयपुर की बेटियों का साहसिक मिशन

जयपुर | राजधानी जयपुर की 10वीं कक्षा की छात्रा सावी शेखावत अपनी आठ वर्षीय छोटी बहन के साथ एक ऐतिहासिक यात्रा पर निकलने की तैयारी में हैं। ये दोनों बहनें विश्व शांति और परमाणु निरस्त्रीकरण का महत्वपूर्ण संदेश लेकर 18 हजार किलोमीटर लंबी साइकिल यात्रा पर अमेरिका जाएंगी।

यह साहसिक यात्रा जयपुर के प्रसिद्ध हवामहल से शुरू होगी और इसका समापन अमेरिका में होगा, जिसमें लगभग 10 से 11 महीने का समय लगने का अनुमान है।

क्या है यात्रा का उद्देश्य?

गुरुवार को जोधपुर के सर्किट हाउस में पत्रकारों से बातचीत के दौरान सावी ने अपनी इस अनूठी योजना का खुलासा किया। उन्होंने बताया कि इस यात्रा का प्राथमिक उद्देश्य परमाणु हथियार रखने वाले देशों को अपने हथियारों को चरणबद्ध तरीके से खत्म करने के लिए प्रेरित करना है।

उनका लक्ष्य दुनिया को परमाणु हथियारों के खतरे से मुक्त बनाना है। इस अभियान के तहत, दोनों बहनें उन सभी देशों के राष्ट्राध्यक्षों को एक ज्ञापन सौंपेंगी जिनके पास परमाणु हथियार हैं, और उनसे इन विनाशकारी हथियारों को खत्म करने की अपील करेंगी।

इन देशों से होकर गुजरेगा रास्ता

यात्रा का प्रस्तावित मार्ग काफी लंबा और चुनौतीपूर्ण है। दोनों बहनें अपनी साइकिल यात्रा के दौरान चीन, रूस, बेलारूस, पोलैंड, जर्मनी और बेल्जियम जैसे देशों से होकर गुजरेंगी और अंत में अमेरिका पहुंचेंगी।

उन्होंने अपनी योजना के बारे में बताते हुए कहा कि वे प्रतिदिन लगभग 90 से 100 किलोमीटर की दूरी तय करने का लक्ष्य रखेंगी।

कैसे मिली इस अभियान की प्रेरणा?

सावी ने बताया कि पर्यावरण संरक्षण और प्रकृति के प्रति प्रेम उन्हें अपने परिवार से विरासत में मिला है। उनका परिवार हाथी के गोबर से पर्यावरण के अनुकूल कागज बनाने का काम करता है, जिससे बचपन से ही उनके घर में पर्यावरण संरक्षण का माहौल रहा है।

इसी माहौल ने उन्हें प्रकृति और वैश्विक चुनौतियों के प्रति संवेदनशील बनाया। सावी के अनुसार, जब वह आठवीं कक्षा में थीं, तब उन्होंने पहली बार परमाणु बमों से होने वाले विनाश के बारे में पढ़ा था।

इस जानकारी ने उन पर गहरा प्रभाव डाला और उन्होंने इस विषय पर गहन शोध किया। शोध के बाद वह इस निष्कर्ष पर पहुंचीं कि परमाणु हथियार पूरी मानव सभ्यता के लिए सबसे बड़ा खतरा हैं।

प्रधानमंत्री मोदी से भी मांगा समय

इस बड़े अभियान को सफल बनाने में सावी की छोटी बहन, उनके माता-पिता और पूरा परिवार उनका साथ दे रहा है। सावी शेखावत ने जोधपुर सर्किट हाउस में पूर्व सांसद मानवेंद्र सिंह को भी अपनी साइकिल यात्रा के बारे में जानकारी दी।

इसके अलावा, सावी ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को एक ई-मेल भेजकर मुलाकात के लिए समय मांगा है, ताकि वह उन्हें भी इस महत्वपूर्ण विषय पर एक ज्ञापन सौंप सकें। सावी का दृढ़ विश्वास है कि यह यात्रा केवल एक अभियान नहीं, बल्कि एक सुरक्षित और शांतिपूर्ण भविष्य के लिए एक आवश्यक पहल है।

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