जयपुर | राजस्थान की राजधानी जयपुर और इसके आसपास के रेल मार्ग इन दिनों शराब तस्करों के लिए एक सुरक्षित गलियारे के रूप में उभर रहे हैं।
जयपुर-गुजरात 'स्मगलिंग एक्सप्रेस': जयपुर: ट्रेनों में शराब तस्करी का बड़ा खुलासा, RPF अलर्ट
सड़कों पर सख्ती के बाद ट्रेनों को बनाया तस्करी का रास्ता, जयपुर मंडल में 9 लाख की शराब जब्त।
HIGHLIGHTS
- जयपुर रेल मंडल में जनवरी से अब तक 19 मामलों में 9 लाख की अवैध शराब जब्त।
- तस्करों के निशाने पर भुज-बरेली, आश्रम और साबरमती एक्सप्रेस जैसी लंबी दूरी की ट्रेनें।
- ट्रेनों के टॉयलेट पैनल और वॉशबेसिन के पीछे छिपाई जा रही है अवैध शराब की खेप।
- हरियाणा और दिल्ली से तस्करी कर ड्राई स्टेट गुजरात भेजी जा रही है विदेशी शराब।
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सड़कों पर पुलिस की कड़ी नाकाबंदी के बाद, तस्करों ने अब रेलवे की भीड़भाड़ का फायदा उठाकर अपनी अवैध गतिविधियों को नया मोड़ दिया है।
जयपुर रेल मंडल के आंकड़ों के अनुसार, जनवरी से अब तक 19 अलग-अलग मामलों में लगभग 9 लाख रुपये की शराब जब्त की गई है।
तस्करों ने जयपुर, गांधीनगर और फुलेरा जैसे महत्वपूर्ण स्टेशनों को शराब की सप्लाई के लिए मुख्य ट्रांजिट पॉइंट के रूप में चुना है।
जांच में यह खुलासा हुआ है कि शराब की अधिकांश खेप दिल्ली और हरियाणा से तस्करी कर सीधे गुजरात जैसे ड्राई स्टेट भेजी जा रही है।
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तस्करी के लिए अपनाए जा रहे हैं शातिर तरीके
शराब तस्कर अब पारंपरिक तरीकों को छोड़कर बेहद शातिर और चौंकाने वाले तरीके अपना रहे हैं ताकि वे सुरक्षाकर्मियों की नजरों से बच सकें।
रेलवे सुरक्षा बल (RPF) की जांच में पाया गया है कि ट्रेनों के टॉयलेट और वॉशबेसिन की पैनलिंग के पीछे शराब की बोतलें छिपाई जा रही हैं।
इसके अलावा, तस्कर अब लग्जरी ट्रॉली बैग्स का इस्तेमाल कर रहे हैं और खुद को सभ्य यात्रियों के रूप में पेश करते हैं ताकि शक न हो।
कई बार तस्कर फर्जी नाम और पते पर पार्सल बुक कर देते हैं, जिससे माल पकड़े जाने पर अपराधी की पहचान करना मुश्किल हो जाता है।
यदि रेलवे प्रशासन शराब की खेप पकड़ भी लेता है, तो उसे 'लावारिस' घोषित कर दिया जाता है क्योंकि कोई भी उस पर दावा नहीं करता।
इस तरह की कार्यप्रणाली से तस्करी के असली मास्टरमाइंड हमेशा कानून के लंबे हाथों से दूर रहने में सफल हो जाते हैं।
अधिकारियों का कहना है कि तस्करों का यह नेटवर्क काफी संगठित है और इसमें कई राज्यों के अपराधी आपस में जुड़े हुए हैं।
भुज-बरेली और आश्रम एक्सप्रेस पहली पसंद
तस्करों द्वारा उन ट्रेनों को अधिक प्राथमिकता दी जा रही है जो दिल्ली और हरियाणा को सीधे गुजरात के विभिन्न शहरों से जोड़ती हैं।
भुज-बरेली एक्सप्रेस, आश्रम एक्सप्रेस और साबरमती एक्सप्रेस जैसी लंबी दूरी की ट्रेनें तस्करों के लिए सबसे पसंदीदा माध्यम बन चुकी हैं।
इन ट्रेनों में सफर करने वाले यात्रियों की संख्या बहुत अधिक होती है, जिससे चेकिंग के दौरान तस्करों के घुलने-मिलने की संभावना बढ़ जाती है।
जयपुर मंडल के रेलवे स्टेशनों पर आरपीएफ की टीमें लगातार गश्त कर रही हैं, लेकिन तस्कर हर बार नए लूपहोल ढूंढ लेते हैं।
गांधीनगर जयपुर स्टेशन हाल के दिनों में तस्करी के खिलाफ कार्रवाई का केंद्र रहा है, जहां कई बड़ी खेप पकड़ी गई हैं।
18 अप्रैल को गांधीनगर स्टेशन पर भुज-बरेली ट्रेन से 99 बोतल शराब और 56 बीयर कैन बरामद किए गए थे, जो एक बड़ी सफलता थी।
इस मामले में गुजरात के भावनगर निवासी प्रदीप भाई को गिरफ्तार किया गया था, जो हरियाणा से शराब लेकर जा रहा था।
इससे पहले 13 अप्रैल को हरियाणा निवासी निखिल सिंह को 48 बोतल विदेशी शराब के साथ गांधीनगर स्टेशन से गिरफ्तार किया गया था।
नशीले पदार्थों की तस्करी में भी भारी इजाफा
शराब के साथ-साथ ट्रेनों के जरिए नशीले पदार्थों जैसे डोडा चूरा की तस्करी के मामले भी तेजी से सामने आ रहे हैं।
हाल ही में आरपीएफ जयपुर ने दो अलग-अलग स्टेशनों पर कार्रवाई करते हुए करीब 16 किलोग्राम डोडा चूरा बरामद किया है।
पहली कार्रवाई ढेहर के बालाजी स्टेशन पर की गई, जहां एक तस्कर के पास से 8.100 किलोग्राम डोडा चूरा जब्त किया गया।
दूसरी कार्रवाई फुलेरा स्टेशन पर हुई, जहां हरियाणा निवासी गुरप्रीत को 8.300 किलोग्राम नशीले पदार्थ के साथ गिरफ्तार किया गया है।
ये घटनाएं दर्शाती हैं कि रेल मार्ग केवल शराब ही नहीं, बल्कि हर तरह के अवैध मादक पदार्थों की तस्करी का जरिया बन रहा है।
पुलिस अब इन तस्करों के बैकवर्ड और फॉरवर्ड लिंकेज की जांच कर रही है ताकि मुख्य सरगनाओं तक पहुंचा जा सके।
तस्करी के इस बढ़ते जाल को तोड़ने के लिए आरपीएफ और आबकारी विभाग संयुक्त रूप से रणनीति तैयार कर रहे हैं।
रेलवे सुरक्षा बल का कड़ा रुख और अभियान
ट्रेनों में बढ़ती इन अवैध गतिविधियों को देखते हुए आरपीएफ ने अब एक विशेष निगरानी अभियान शुरू करने का निर्णय लिया है।
संदिग्ध यात्रियों और लावारिस दिखने वाले सामानों की सघन तलाशी के लिए अतिरिक्त जाब्ता तैनात किया गया है।
रेलवे अधिकारियों ने यात्रियों से भी अपील की है कि वे किसी भी संदिग्ध व्यक्ति या लावारिस वस्तु की सूचना तुरंत सुरक्षा हेल्पलाइन पर दें।
आबकारी विभाग के साथ मिलकर आरपीएफ अब उन संवेदनशील ट्रेनों की सूची तैयार कर रही है जिनमें तस्करी की घटनाएं अधिक होती हैं।
ट्रेनों में इस तरह की घटनाओं की रोकथाम के लिए विशेष अभियान चलाया जा रहा है। सख्ती से कार्रवाई की जा रही है। यात्री भी ऐसी गतिविधियों की सूचना दे सकते हैं।
यह बयान जयपुर मंडल के वरिष्ठ मंडल सुरक्षा आयुक्त ओंकार सिंह ने दिया है, जो इस पूरे अभियान की निगरानी कर रहे हैं।
पुलिस का मानना है कि इस तरह के कड़े कदमों से आने वाले दिनों में तस्करी के इस नेटवर्क को पूरी तरह से ध्वस्त किया जा सकेगा।
निष्कर्षतः, जयपुर रेल मंडल में तस्करी एक गंभीर चुनौती है, जिससे निपटने के लिए तकनीक और सतर्कता दोनों की जरूरत है।
यदि समय रहते इन 'सेफ कॉरिडोर्स' को बंद नहीं किया गया, तो यह न केवल राजस्व की हानि होगी बल्कि सुरक्षा के लिए भी खतरा बन सकता है।
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