जयपुर | राजस्थान की राजधानी जयपुर में स्थित विश्वविद्यालय परिसर के भीतर कैंटीन की सुविधा लंबे समय से बंद होने के कारण छात्रों में भारी आक्रोश व्याप्त है। इसके विरोध में छात्रनेता शुभम रेवाड़ के नेतृत्व में सैकड़ों छात्रों ने कुलगुरु सचिवालय के बाहर एक जोरदार और अनोखा प्रदर्शन आयोजित किया।
कैंटीन बंद: छात्रों का अनोखा प्रदर्शन: जयपुर: कैंटीन बंद होने पर छात्रनेता शुभम रेवाड़ का अनोखा प्रदर्शन, थाली बजाकर और चाय की स्टॉल लगाकर जताया विरोध
जयपुर विश्वविद्यालय में कैंटीन बंद होने के विरोध में छात्रनेता शुभम रेवाड़ ने अनोखा प्रदर्शन किया। छात्रों ने थाली बजाकर और चाय की स्टॉल लगाकर प्रशासन के खिलाफ रोष व्यक्त किया और मूलभूत सुविधाओं की मांग की।
HIGHLIGHTS
- छात्रों ने कुलगुरु सचिवालय के बाहर थाली बजाकर विरोध प्रदर्शन किया।
- कैंटीन बंद होने के कारण छात्रों ने परिसर में ही चाय की स्टॉल लगाई।
- कुलगुरु प्रो. अल्पना कटेजा पर छात्रों की समस्याओं की अनदेखी का आरोप।
- कैंटीन के साथ स्विमिंग पूल और इंटरनेशनल फेस्ट की भी मांग की गई।
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थाली बजाकर और चाय बेचकर विरोध
प्रदर्शन के दौरान छात्रों ने पारंपरिक तरीके से थाली बजाकर प्रशासन का ध्यान आकर्षित करने का प्रयास किया। इतना ही नहीं, विरोध स्वरूप छात्रों ने सचिवालय के बाहर ही अपनी चाय की स्टॉल लगा दी, जो पूरे परिसर में चर्चा का विषय बनी रही।
प्रशासन पर अनदेखी का आरोप
शुभम रेवाड़ ने मीडिया से बात करते हुए कहा कि कैंटीन बंद होने से छात्रों की दैनिक दिनचर्या बुरी तरह प्रभावित हो रही है। पढ़ाई के बीच में भोजन और जलपान जैसी मूलभूत सुविधाएं न मिलने से छात्रों को काफी कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है।
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भेदभावपूर्ण व्यवहार का विरोध
छात्रों ने आरोप लगाया कि विश्वविद्यालय का स्टाफ और प्रोफेसर तो बाहर से नाश्ता मंगवाकर अपनी आवश्यकताएं पूरी कर लेते हैं, लेकिन आम छात्रों के लिए कोई विकल्प नहीं बचा है। यह भेदभावपूर्ण व्यवहार अब छात्रों को स्वीकार्य नहीं है।
कुलगुरु की कार्यप्रणाली पर सवाल
छात्रों ने कुलगुरु प्रो. अल्पना कटेजा पर उदासीनता का आरोप लगाया। उनका कहना है कि प्रशासन छात्र हितों के बजाय अन्य राजनीतिक कार्यों में व्यस्त है। वर्तमान में प्रवेश और परीक्षा का समय है, फिर भी छात्रों की समस्याओं पर कोई ध्यान नहीं दिया जा रहा है।
आगामी आंदोलन की चेतावनी
प्रदर्शनकारियों ने कैंटीन शुरू करने के साथ-साथ बंद पड़े स्विमिंग पूल को खोलने और इंटरनेशनल फेस्ट के आयोजन की भी मांग रखी। छात्रों ने चेतावनी दी है कि यदि जल्द कार्रवाई नहीं हुई, तो वे भविष्य में उग्र आंदोलन के लिए बाध्य होंगे।
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