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राजस्थान

आसाराम को झटका, उम्रकैद बरकरार: आसाराम को हाईकोर्ट से झटका, उम्रकैद बरकरार, करना होगा सरेंडर

desk

जोधपुर हाईकोर्ट ने आसाराम की उम्रकैद बरकरार रखी, मेडिकल बेल खत्म, अब जेल जाना होगा।

HIGHLIGHTS

  • राजस्थान हाईकोर्ट ने आसाराम की उम्रकैद की सजा को बरकरार रखा है।
  • कोर्ट ने उन्हें गैंगरेप की धारा से बरी किया, लेकिन अन्य आरोप कायम हैं।
  • मेडिकल ग्राउंड पर मिली अंतरिम जमानत खत्म, अब सरेंडर करना होगा।
  • 2013 के नाबालिग यौन शोषण मामले में निचली अदालत का फैसला सही पाया।
asaram bapu life imprisonment upheld rajasthan high court

जोधपुर | राजस्थान हाईकोर्ट की जोधपुर पीठ ने नाबालिग से यौन उत्पीड़न के मामले में आसाराम बापू को एक और बड़ा कानूनी झटका दिया है। अदालत ने उनकी उम्रकैद की सजा को बरकरार रखने का फैसला सुनाया है।

बुधवार को जस्टिस अरुण मोंगा और जस्टिस योगेंद्र कुमार पुरोहित की डिवीजन बेंच ने यह महत्वपूर्ण फैसला सुनाया। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि आसाराम को अब जेल में ही रहना होगा।

अदालत ने आसाराम समेत तीन अन्य आरोपियों की अपीलों पर विस्तार से सुनवाई की। इस सुनवाई के बाद बेंच ने निचली अदालत द्वारा दी गई आजीवन कारावास की सजा में कोई बदलाव नहीं किया।

हाईकोर्ट का सख्त रुख और सरेंडर का आदेश

हालांकि अदालत ने तकनीकी आधार पर आसाराम को गैंगरेप की धारा से बरी कर दिया है। लेकिन अन्य गंभीर आपराधिक धाराओं में उनकी दोषसिद्धि को पूरी तरह बरकरार रखा गया है।

आसाराम वर्तमान में स्वास्थ्य कारणों से मिली अंतरिम जमानत पर जेल से बाहर हैं। हाईकोर्ट के इस ताज़ा फैसले के बाद उन्हें तत्काल पुलिस या जेल प्रशासन के सामने सरेंडर करना होगा।

कोर्ट परिसर में सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए गए थे ताकि फैसले के बाद किसी भी प्रकार की अप्रिय स्थिति न बने। समर्थकों की भीड़ को देखते हुए पुलिस बल तैनात रहा।

क्या था पूरा मामला और 2013 की घटना?

यह पूरा विवाद अगस्त 2013 में शुरू हुआ था। जोधपुर स्थित आसाराम के आश्रम में पढ़ने वाली एक नाबालिग छात्रा ने उन पर यौन उत्पीड़न और दुष्कर्म के गंभीर आरोप लगाए थे।

छात्रा की शिकायत के बाद पुलिस ने आसाराम को गिरफ्तार किया था। इसके बाद लंबी कानूनी लड़ाई चली और विशेष पॉक्सो कोर्ट ने 25 अप्रैल 2018 को उन्हें दोषी करार दिया था।

निचली अदालत ने आसाराम को मरते दम तक जेल में रहने यानी आजीवन कारावास की सजा सुनाई थी। इसी फैसले को आसाराम ने हाईकोर्ट में चुनौती दी थी, जिस पर अब फैसला आया है।

मैराथन सुनवाई और वकीलों की दलीलें

राजस्थान हाईकोर्ट में इस मामले की सुनवाई 16 फरवरी से 20 अप्रैल 2026 तक लगातार डे-टू-डे आधार पर चली थी। दोनों पक्षों ने अपनी ओर से जोरदार दलीलें पेश की थीं।

बचाव पक्ष के वकीलों ने तर्क दिया था कि पीड़िता और उसके परिवार के बयानों में काफी विरोधाभास है। उन्होंने इसे एक साजिश के तहत फंसाने वाला मामला करार दिया था।

वहीं अभियोजन पक्ष ने मजबूती से पक्ष रखते हुए कहा कि पॉक्सो कानून के तहत पीड़िता का बयान ही सबसे बड़ा साक्ष्य है। सरकारी वकीलों ने गवाहों पर हुए हमलों का भी जिक्र किया।

निचली अदालत द्वारा दी गई सजा में कोई बदलाव नहीं किया जाएगा, उन्हें न्यायिक प्रक्रिया का पालन करते हुए सरेंडर करना होगा।

स्वास्थ्य और आयु का हवाला नहीं आया काम

86 वर्षीय आसाराम ने अपनी बढ़ती उम्र और बीमारियों का हवाला देकर कई बार राहत की मांग की थी। सुप्रीम कोर्ट के निर्देश पर उन्हें कुछ समय के लिए इलाज हेतु जमानत मिली थी।

लेकिन हाईकोर्ट ने अब साफ कर दिया है कि अपराध की गंभीरता को देखते हुए सजा में ढील नहीं दी जा सकती। कानून सभी के लिए समान है और न्याय प्रक्रिया का सम्मान जरूरी है।

आसाराम को जनवरी 2023 में गुजरात के गांधीनगर की एक अदालत ने भी महिला अनुयायी से दुष्कर्म मामले में उम्रकैद सुनाई थी। ऐसे में उनकी मुश्किलें अब और बढ़ने वाली हैं।

हाईकोर्ट के इस फैसले से पीड़िता के परिवार को बड़ी राहत मिली है। कानूनी विशेषज्ञों का मानना है कि यह फैसला यौन अपराधों के खिलाफ न्याय प्रणाली के भरोसे को और मजबूत करेगा।

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