जयपुर | राजस्थान की धरती अपनी कला और संस्कृति के लिए पूरी दुनिया में प्रसिद्ध है। हाल ही में जयपुर की पारंपरिक जरदोजी कला और अजरख प्रिंट ने कांस फिल्म फेस्टिवल के रेड कार्पेट पर अपनी चमक बिखेरी।
कांस में जयपुर की जरदोजी: कांस फिल्म फेस्टिवल में जयपुर की जरदोजी और अजरख का जलवा
जयपुर की डिजाइनर नीलम जैन की ड्रेस पहन इशिता मंगल ने कांस में बिखेरा राजस्थान की कला का जादू।
HIGHLIGHTS
- जयपुर के ब्रांड 'गेरू जयपुर' की ड्रेस प्रतिष्ठित कांस फिल्म फेस्टिवल में प्रदर्शित हुई।
- मॉडल इशिता मंगल ने अजरख प्रिंट और जरदोजी वर्क वाला विशेष गाउन पहनकर ध्यान खींचा।
- डिजाइनर नीलम जैन ने पारंपरिक अजरख साड़ी को मॉडर्न फ्यूजन गाउन का रूप दिया।
- एक हस्तनिर्मित ड्रेस को तैयार करने में 4-5 कारीगरों को करीब 5 से 6 दिन का समय लगता है।
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जयपुर के प्रसिद्ध फैशन ब्रांड ‘गेरू जयपुर’ की संस्थापक और डिजाइनर नीलम जैन द्वारा तैयार की गई एक विशेष ड्रेस ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सुर्खियां बटोरी हैं। इस परिधान को मॉडल इशिता मंगल ने पहना।
इस ड्रेस की सबसे बड़ी खासियत इसका पारंपरिक और आधुनिक मेल था। इसमें गुजरात की अजरख हैंड ब्लॉक प्रिंटिंग और जयपुर की बारीक जरदोजी कला का अद्भुत संगम देखने को मिला।
राजस्थान की हस्तकला का वैश्विक उदय
कांस फिल्म फेस्टिवल जैसे प्रतिष्ठित मंच पर भारतीय हस्तशिल्प का पहुंचना एक बड़ी उपलब्धि है। नीलम जैन ने बताया कि यह उनके लिए केवल एक डिजाइनिंग प्रोजेक्ट नहीं था।
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उन्होंने इसे जयपुर के उन गुमनाम कारीगरों की मेहनत को दुनिया के सामने लाने का एक बड़ा जरिया माना। यह ड्रेस पूरी तरह से हस्तनिर्मित थी और इसमें मशीन का प्रयोग नहीं हुआ।
इस परिधान को एक लंबे गाउन स्टाइल में तैयार किया गया था। पारंपरिक अजरख प्रिंट के कपड़े पर जयपुर के कारीगरों ने बारीक जरदोजी की बूटियां और हाथ से एम्ब्रॉयडरी की थी।
अजरख और जरदोजी का अनूठा संगम
नीलम जैन ने बताया कि उन्होंने अजरख प्रिंट की साड़ी को एक आधुनिक गाउन के रूप में बदला। यह प्रयोग फैशन की दुनिया में काफी चर्चा का विषय बना हुआ है।
अजरख प्रिंट अपनी जटिल ज्यामितीय आकृतियों और प्राकृतिक रंगों के लिए जाना जाता है। जब इसे जयपुर की शाही जरदोजी के साथ जोड़ा गया, तो इसका आकर्षण और बढ़ गया।
ड्रेस में आरी वर्क और पर्ल हैंड एम्ब्रॉयडरी का भी इस्तेमाल किया गया। यह काम इतना बारीक था कि इसे देखने वालों ने कारीगरों की कला की जमकर सराहना की।
पांच दिन की मेहनत और कारीगरों का हुनर
आज के डिजिटल और मशीनरी युग में हाथ से काम करना एक बड़ी चुनौती बन गया है। नीलम जैन के अनुसार, एक हस्तनिर्मित कपड़े को तैयार करना धैर्य का काम है।
अजरख प्रिंट की प्रक्रिया बहुत लंबी होती है। एक कपड़े को तैयार करने में करीब 5 से 6 दिन का समय लगता है। इसमें कई चरणों में रंगाई और छपाई होती है।
पांच से छह मीटर कपड़े पर काम करने के लिए चार से पांच कारीगर एक साथ जुटते हैं। इसमें ब्लॉक प्रिंटिंग और रेजिस्ट डाई तकनीक का कुशलता से प्रयोग किया जाता है।
नीलम ने कहा कि हस्तनिर्मित कपड़े महंगे होने का मुख्य कारण उनमें लगने वाला समय और मेहनत है। मशीनी कपड़ों में वह जान और बारीकी कभी नहीं आ सकती।
चुनौती: पारंपरिक साड़ी से मॉडर्न गाउन तक
नीलम जैन ने साझा किया कि एक सुबह उनके पास कांस फिल्म फेस्टिवल के लिए ड्रेस तैयार करने का संदेश आया। शुरुआत में यह काम थोड़ा चुनौतीपूर्ण महसूस हुआ।
उनका ब्रांड मुख्य रूप से भारतीय एथनिक वियर यानी साड़ी और सूट पर काम करता है। लेकिन कांस के लिए उन्हें एक वेस्टर्न गाउन लुक तैयार करना था।
नीलम की टीम ने इस चुनौती को स्वीकार किया। उन्होंने सोचा कि अगर उनका क्राफ्ट इतने बड़े मंच तक पहुंच रहा है, तो उन्हें पीछे नहीं हटना चाहिए।
यह हमारे कारीगरों के लिए सम्मान की बात है कि उनकी बनाई कलाकृति को दुनिया के सबसे बड़े फिल्म समारोह में सराहा गया।
नीलम जैन: सपनों की वापसी और 'गेरू जयपुर'
नीलम जैन की अपनी यात्रा भी काफी प्रेरणादायक है। उन्होंने ‘गेरू जयपुर’ की शुरुआत अपने जीवन के एक ऐसे मोड़ पर की जब उनके बच्चे बड़े हो चुके थे।
नीलम पहले भी डिजाइनिंग से जुड़ी थीं, लेकिन परिवार और बच्चों की पढ़ाई के कारण उन्होंने अपना स्टूडियो बंद कर दिया था। बच्चों के प्रोत्साहन ने उन्हें दोबारा खड़ा किया।
उनके बच्चों ने उनसे कहा कि अब समय है कि वह अपने सपनों को जिएं। इसके बाद उन्होंने राजस्थान की कला को आधुनिक रंग देने का संकल्प लिया और काम शुरू किया।
आज ‘गेरू जयपुर’ न केवल राजस्थान बल्कि पूरे देश में पारंपरिक कला को आधुनिक अंदाज में पेश करने के लिए पहचाना जाता है। यह ब्रांड हस्तशिल्प को बढ़ावा दे रहा है।
डिजिटल युग में हस्तकला की चुनौतियां
ऑनलाइन मार्केट में हस्तनिर्मित उत्पादों को बेचना आसान नहीं है। डिजिटल प्लेटफॉर्म पर मशीन से बने सस्ते उत्पाद हस्तकला को कड़ी टक्कर देते हैं।
नीलम जैन का मानना है कि लोग अब धीरे-धीरे हस्तकला की अहमियत समझ रहे हैं। वे अब लक्जरी और क्वालिटी को ज्यादा महत्व देने लगे हैं, जो अच्छी बात है।
ऑनलाइन मार्केटप्लेस ने अब ‘लक्जरी हैंडक्राफ्ट’ श्रेणी बनाकर कारीगरों को नया मंच दिया है। इससे असली शिल्पकारों को उनकी मेहनत का सही दाम और पहचान मिल रही है।
इशिता मंगल: भारतीय शिल्प की नई आवाज
मॉडल और अभिनेत्री इशिता मंगल फैशन जगत में एक जाना-माना नाम हैं। वह एक डिजिटल इंफ्लुएंसर और स्टाइल कमेंटेटर के तौर पर अपनी अलग पहचान रखती हैं।
इशिता अक्सर भारतीय हस्तशिल्प और टेक्सटाइल को बढ़ावा देती नजर आती हैं। उन्होंने कांस में इस ड्रेस को पहनकर यह साबित किया कि भारतीय पारंपरिक कला अंतरराष्ट्रीय है।
उनके सोशल मीडिया पर लाखों फॉलोअर्स हैं, जो उनके स्टाइलिंग सेंस के दीवाने हैं। उन्होंने भारतीय शिल्प को आधुनिक फैशन के साथ जोड़कर एक नई मिसाल पेश की है।
कांस में उनके इस लुक ने फैशन डिजाइनरों और आलोचकों का ध्यान खींचा। यह राजस्थान के शिल्पकारों के लिए एक बड़ी जीत की तरह देखा जा रहा है।
भविष्य की राह और कारीगरों का सम्मान
जयपुर की इस सफलता ने यह स्पष्ट कर दिया है कि भारतीय कला में वैश्विक स्तर पर चमकने की पूरी क्षमता है। बस जरूरत है सही मंच और प्रोत्साहन की।
नीलम जैन जैसे डिजाइनर और इशिता मंगल जैसे कलाकार जब एक साथ आते हैं, तो कला का जादू सर चढ़कर बोलता है। इससे आने वाली पीढ़ी को भी प्रेरणा मिलती है।
राजस्थान की जरदोजी और गुजरात का अजरख अब केवल स्थानीय बाजार तक सीमित नहीं हैं। ये कलाएं अब दुनिया के सबसे बड़े फैशन आयोजनों का हिस्सा बन रही हैं।
अंत में, यह कहना गलत नहीं होगा कि जयपुर के कारीगरों की उंगलियों का जादू अब सात समंदर पार भी अपनी महक फैला रहा है। यह हमारे सांस्कृतिक गौरव की जीत है।
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