जालोर: रविंद्र भाटी का चक्का जाम अल्टीमेटम: जालोर गणपत सिंह हत्याकांड: रविंद्र सिंह भाटी ने दी 'चक्का जाम' की चेतावनी, भजनलाल सरकार और प्रशासन को लिया आड़े हाथों

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Highlights

  • शिव विधायक रविंद्र सिंह भाटी ने आधी रात को जालोर कलेक्ट्रेट पहुंचकर पीड़ित परिवार से मुलाकात की।
  • 80 वर्षीय बुजुर्ग मां पिछले 17 दिनों से न्याय की मांग को लेकर भूख हड़ताल पर बैठी हैं।
  • भाटी ने प्रशासन को अल्टीमेटम देते हुए कहा कि मांगें न मानने पर पूरे जालोर में चक्का जाम किया जाएगा।
  • कैबिनेट मंत्री जोगेश्वर गर्ग के विवादित बयान पर भाटी ने तीखा पलटवार करते हुए उन्हें संवेदनहीन बताया।

जालोर | जालोर की धरती पर न्याय की गूंज अब और भी तेज हो गई है। मांडोली के बहुचर्चित गणपत सिंह हत्याकांड ने न केवल पुलिस प्रशासन की नींद उड़ा दी है, बल्कि राजस्थान की भजनलाल सरकार के लिए भी एक बड़ी राजनीतिक चुनौती पेश कर दी है। न्याय की आस में जालोर कलेक्ट्रेट के बाहर बीते 17-18 दिनों से एक 80 वर्षीय बुजुर्ग मां, एक मासूम बच्चा और एक बेबस पत्नी भूख हड़ताल पर बैठे हैं। इस दर्दनाक मंजर को देखने और पीड़ित परिवार की आवाज बनने के लिए शिव विधायक रविंद्र सिंह भाटी देर रात धरना स्थल पर पहुंचे। उनके इस दौरे ने जालोर के सियासी पारे को सातवें आसमान पर पहुंचा दिया है।

आधी रात को पहुंचे भाटी, प्रशासन में मचा हड़कंप

रविंद्र सिंह भाटी जब आधी रात को धरना स्थल पर पहुंचे, तो वहां मौजूद भीड़ और पीड़ित परिवार की आंखों में एक नई उम्मीद जागी। भाटी ने सबसे पहले भूख हड़ताल पर बैठी बुजुर्ग मां के पैर छुए और उनकी बिगड़ती सेहत पर गहरी चिंता जताई। भाटी के साथ पूर्व विधायक नारायण सिंह देवल, प्रवासी नेता राम सिंह चारणीम, भाजपा के पूर्व जिलाध्यक्ष रविंद्र सिंह बालावत और पूर्व जिला परिषद सदस्य मंगल सिंह सिराणा जैसे दिग्गज नेता भी मौजूद रहे। भाटी ने स्पष्ट किया कि यह लड़ाई अब केवल एक परिवार की नहीं, बल्कि पूरे समाज और न्याय व्यवस्था की है। उन्होंने प्रशासन को चेतावनी दी कि एक बुजुर्ग महिला का 17 दिनों तक सड़क पर बैठना लोकतंत्र के लिए शर्म की बात है।

लोकतंत्र और सिस्टम की विफलता पर तीखे सवाल

धरना स्थल से प्रशासन को संबोधित करते हुए रविंद्र सिंह भाटी ने कहा, 'आज के इस आधुनिक दौर में, जहां हम डिजिटल इंडिया और सुशासन की बात करते हैं, वहां एक पीड़ित परिवार को 17 दिनों तक कलेक्ट्रेट के सामने भूखे-प्यासे बैठना पड़ रहा है। यह हमारे सिस्टम की सबसे बड़ी विफलता है।' भाटी ने जालोर के जिला कलेक्टर और एसपी को उनकी नैतिक जिम्मेदारियों का अहसास कराते हुए कहा कि अधिकारियों को अपनी कुर्सी छोड़कर इन पीड़ितों के बीच आना चाहिए था। उन्होंने सवाल उठाया कि आखिर प्रशासन इतना संवेदनहीन कैसे हो सकता है कि उसे एक मां की तड़प दिखाई नहीं दे रही?

सरकार को खुला अल्टीमेटम: चक्का जाम की तैयारी

भाटी ने अपने संबोधन में भजनलाल सरकार और पुलिस प्रशासन को सीधा अल्टीमेटम दिया। उन्होंने कहा, 'मैं हमेशा शांति और कानून व्यवस्था का सम्मान करने वाला व्यक्ति हूं। मैं कभी नहीं चाहता कि आम जनता को परेशानी हो या कानून हाथ में लिया जाए। लेकिन अगर पुलिस डेढ़ साल बाद भी हत्यारों को नहीं पकड़ पाती है, तो यह अक्षमता की पराकाष्ठा है।' भाटी ने दहाड़ते हुए कहा कि अगर इस परिवार ने आदेश दिया, तो पूरे जालोर जिले का चक्का जाम कर दिया जाएगा। उन्होंने साफ किया कि इसके बाद होने वाली किसी भी अप्रिय स्थिति या कानून-व्यवस्था की गड़बड़ी के लिए पूरी तरह से जालोर प्रशासन और प्रदेश सरकार जिम्मेदार होगी।

मंत्री जोगेश्वर गर्ग पर भाटी का करारा हमला

हाल ही में कैबिनेट मंत्री जोगेश्वर गर्ग ने इस मामले पर एक विवादित बयान दिया था, जिसमें उन्होंने कहा था कि 'कई मामले नहीं भी खुलते'। इस पर रविंद्र सिंह भाटी ने तीखा प्रहार किया। भाटी ने कहा, 'दूसरों का दुख देखना बहुत आसान होता है, लेकिन जब खुद के घर में ऐसी घटना होती है, तब पता चलता है कि पीड़ा क्या होती है।' उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि सत्ता के नशे में चूर लोग एक 80 साल की मां के दर्द को नहीं समझ पा रहे हैं। भाटी के अनुसार, ऐसे संवेदनहीन लोगों की सत्ता में कोई जगह नहीं होनी चाहिए जो जनता के आंसू न पोंछ सकें।

मुख्यमंत्री के दौरे और जश्न पर उठाए सवाल

19 मार्च को राजस्थान दिवस के अवसर पर मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा का जालोर दौरा प्रस्तावित था। हालांकि, विरोध की आशंका को देखते हुए इसे स्थगित करने की खबरें आ रही हैं। इस पर भाटी ने कहा कि जिस जिले में एक मां न्याय के लिए तड़प रही हो, वहां किसी भी तरह का जश्न मनाना अनैतिक है। उन्होंने कहा कि सरकार को उत्सव मनाने से पहले पीड़ित को न्याय दिलाना चाहिए। भाटी ने पुलिस प्रशासन की तकनीक पर भी सवाल उठाए कि आज के जमाने में जब हर अपराधी का सुराग मिल सकता है, तो जालोर पुलिस डेढ़ साल से खाली हाथ क्यों बैठी है?

पुलिस और स्थानीय विधायकों की भूमिका संदिग्ध

रिपोर्ट्स के अनुसार, जालोर के एसपी शैलेंद्र सिंह इंदोलिया की कार्यप्रणाली पर भी अब सवाल उठने लगे हैं। भाटी ने संकेत दिया कि पुलिस की ढिलाई के कारण ही अपराधी अब तक आजाद घूम रहे हैं। वहीं, मांडोली गांव के स्थानीय विधायक रतन देवासी की चुप्पी को लेकर भी भाटी ने निशाना साधा। उन्होंने कहा कि स्थानीय जनप्रतिनिधियों को इस मामले में सबसे आगे आना चाहिए था, लेकिन उनकी खामोशी कई संदेह पैदा करती है। 

निष्कर्ष: न्याय की जंग होगी तेज

गणपत सिंह हत्याकांड अब केवल एक आपराधिक मामला नहीं रह गया है, बल्कि यह राजस्थान की राजनीति का एक बड़ा केंद्र बन गया है। रविंद्र सिंह भाटी की चेतावनी के बाद जालोर प्रशासन पर भारी दबाव है। यदि आने वाले दिनों में पुलिस कोई ठोस कार्रवाई नहीं करती है, तो जालोर में एक बड़ा जन आंदोलन देखने को मिल सकता है। भाटी ने साफ कर दिया है कि जब तक हत्यारे सलाखों के पीछे नहीं होंगे, यह आंदोलन थमेगा नहीं। अब देखना यह है कि क्या भजनलाल सरकार इस चेतावनी के बाद हरकत में आती है या फिर जालोर की सड़कों पर विरोध की यह आग और भड़केगी।

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