कोटा | नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (NTA) ने जेईई-मेन 2026 के आंकड़े जारी कर दिए हैं। इन आंकड़ों ने इस साल कई चौंकाने वाले तथ्य सामने रखे हैं।
जीरो पर्सेंटाइल पर भी एडवांस का मौका!: JEE Main Result 2026: जीरो पर्सेंटाइल पर भी एडवांस दे सकेंगे छात्र, जानें अपनी रैंक पर कौन-सा NIT या IIIT मिलेगा; पूरा एनालिसिस
जेईई मेन 2026 के नतीजों में चौंकाने वाला खुलासा हुआ है। दिव्यांग श्रेणी के छात्र जीरो पर्सेंटाइल पर भी एडवांस के लिए पात्र हुए हैं, वहीं एक्सपर्ट ने बताया है कि आपकी रैंक पर कौन सा कॉलेज मिल सकता है।
HIGHLIGHTS
- जेईई-मेन 2026 में दिव्यांग श्रेणी के छात्र 0.0023186 पर्सेंटाइल पर भी एडवांस के लिए पात्र घोषित किए गए हैं।
- कुल 16.04 लाख यूनीक उम्मीदवारों ने रजिस्ट्रेशन कराया था, जिनमें से 15.38 लाख छात्रों ने परीक्षा दी।
- 5 हजार से कम एआईआर वाले छात्रों को तिरछी, वारंगल और जयपुर जैसे टॉप 5 एनआईटी में कोर ब्रांच मिल सकती है।
- टाई होने पर रैंक निर्धारण के लिए इस बार 7 नए मापदंड अपनाए गए हैं, जिसमें गणित के स्कोर को प्राथमिकता दी गई है।
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सबसे बड़ी खबर यह है कि इस बार जीरो पर्सेंटाइल पर भी छात्र जेईई एडवांस देने के लिए पात्र घोषित किए गए हैं। यह विशेष छूट दिव्यांग (PwD) श्रेणी के छात्रों को मिली है।
जेईई-मेन के आधार पर देश के शीर्ष ढाई लाख विद्यार्थियों को एडवांस परीक्षा के लिए चुना गया है। इसमें हर वर्ग के लिए अलग-अलग कटऑफ निर्धारित की गई है।
श्रेणीवार कटऑफ का पूरा गणित
इस साल सामान्य श्रेणी के लिए कटऑफ 93.4123549 पर्सेंटाइल रही है। आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग (EWS) के लिए यह 82.4164528 पर्सेंटाइल है।
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अन्य पिछड़ा वर्ग (OBC) की कटऑफ 80.9232583 रही। अनुसूचित जाति (SC) के लिए 63.9172792 और अनुसूचित जनजाति (ST) के लिए 52.0174712 पर्सेंटाइल कटऑफ गई है।
हैरानी की बात दिव्यांग श्रेणी में दिखी। यहां मात्र 0.0023186 पर्सेंटाइल पर भी छात्र एडवांस के लिए क्वालीफाई कर गए हैं। यानी लगभग शून्य स्कोर पर भी मौका मिला है।
रिकॉर्ड तोड़ रजिस्ट्रेशन और उपस्थिति
करियर काउंसलिंग एक्सपर्ट अमित आहूजा ने बताया कि इस साल प्रतिस्पर्धा बहुत कड़ी थी। दोनों सेशन मिलाकर कुल 16,04,854 यूनीक कैंडिडेट पंजीकृत हुए थे।
इनमें से 15,38,468 विद्यार्थियों ने वास्तव में परीक्षा दी। लगभग 10.34 लाख विद्यार्थी ऐसे थे जिन्होंने जनवरी और अप्रैल दोनों सत्रों में अपनी किस्मत आजमाई।
लिंग आधारित आंकड़ों को देखें तो 10.06 लाख छात्र और 5.31 लाख छात्राओं ने परीक्षा दी। यह आंकड़ा इंजीनियरिंग के प्रति बढ़ते रुझान को दर्शाता है।
आपकी रैंक पर कौन सा कॉलेज?
एक्सपर्ट्स के अनुसार, जिनकी ऑल इंडिया रैंक (AIR) 5 हजार से कम है, उन्हें टॉप-5 NIT मिलेंगे। इनमें तिरछी, वारंगल, सूरतकल, इलाहाबाद और जयपुर शामिल हैं।
इन संस्थानों में कंप्यूटर साइंस और इलेक्ट्रॉनिक्स जैसी कोर ब्रांच मिलने की प्रबल संभावना है। साथ ही ट्रिपलआईटी इलाहाबाद में भी मौका मिल सकता है।
जिन छात्रों की रैंक 5 हजार से 10 हजार के बीच है, उन्हें कालीकट, सूरत, नागपुर और भोपाल जैसे एनआईटी में कोर ब्रांच मिल सकती है।
10 से 20 हजार रैंक वालों के लिए जालंधर, दिल्ली, गोवा और हमीरपुर के द्वार खुले हैं। इन्हें ट्रिपलआईटी ग्वालियर और लखनऊ में भी अच्छी ब्रांच मिल सकती है।
मिडिल रैंक वालों के लिए विकल्प
20 से 30 हजार रैंक वाले छात्रों को पटना, रायपुर, सिल्चर और आंध्र प्रदेश के एनआईटी मिल सकते हैं। इसके अलावा नए ट्रिपलआईटी जैसे पुणे और नागपुर भी विकल्प हैं।
30 से 60 हजार रैंक वालों को घबराने की जरूरत नहीं है। उन्हें नॉर्थ ईस्ट के एनआईटी जैसे सिक्किम, मणिपुर और मेघालय में प्रवेश मिल सकता है।
साथ ही नए खुले ट्रिपलआईटी जैसे धारवाड़, कल्याणी और उना में भी सीटें मिलने की संभावना बनी रहती है। यह सब कैटेगरी पर भी निर्भर करेगा।
रैंक निर्धारण के नए नियम
तीन साल बाद एनटीए ने टाई-ब्रेकिंग नियमों में बड़ा बदलाव किया है। अब उम्र के बजाय प्रदर्शन के अनुपात को महत्व दिया जा रहा है।
अगर दो छात्रों के कुल अंक समान हैं, तो सबसे पहले गणित का स्कोर देखा जाता है। उसके बाद फिजिक्स और फिर केमिस्ट्री के अंकों का मिलान होता है।
यदि फिर भी टाई रहता है, तो सही और गलत उत्तरों के अनुपात को देखा जाता है। जिस छात्र ने कम गलतियां की होंगी, उसे बेहतर रैंक दी जाएगी।
यही कारण है कि इस साल 300 में से 300 अंक लाने वाले सभी छात्रों को संयुक्त रूप से ऑल इंडिया रैंक-1 प्रदान की गई है।
एडवांस की तैयारी के लिए सुझाव
अब जबकि कटऑफ जारी हो चुकी है, सफल छात्रों को एडवांस पर ध्यान केंद्रित करना चाहिए। एडवांस का पैटर्न मेन से बिल्कुल अलग और चुनौतीपूर्ण होता है।
छात्रों को सलाह दी जाती है कि वे पिछले वर्षों के पेपर हल करें। कॉन्सेप्ट की गहराई में जाना ही आईआईटी की सीट पक्की करने का एकमात्र रास्ता है।
जो छात्र क्वालीफाई नहीं कर पाए, उनके लिए स्टेट इंजीनियरिंग कॉलेज और प्राइवेट यूनिवर्सिटी के विकल्प अभी भी खुले हुए हैं।
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