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राजनीति

मदन राठौड़ का गहलोत पर बड़ा हमला: गहलोत आज भी पायलट को बच्चा समझते हैं: मदन राठौड़

जोगेन्द्र सिंह शेखावत

मदन राठौड़ ने कहा कि गहलोत सचिन पायलट को पूरा अपना नहीं मानते, केवल टांगें साथ मानते हैं।

HIGHLIGHTS

  • मदन राठौड़ ने कहा कि अशोक गहलोत आज भी सचिन पायलट को बालक समझते हैं।
  • भाजपा प्रदेशाध्यक्ष ने गहलोत के 'दो टांगें' वाले बयान पर जमकर तंज कसा।
  • राठौड़ ने दावा किया कि भाजपा पायलट का गहलोत से ज्यादा प्रचार कर रही है।
  • उन्होंने पुराने 'नकारा-निकम्मा' बयानों को याद दिलाकर कांग्रेस में दरार की ओर इशारा किया।
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जयपुर | राजस्थान की सियासत में इन दिनों बयानों के तीखे तीर खूब चल रहे हैं। भाजपा के प्रदेशाध्यक्ष मदन राठौड़ ने पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत के हालिया बयान पर जोरदार पलटवार किया है।

राठौड़ ने मीडिया से बात करते हुए कहा कि गहलोत की बातों से साफ झलकता है कि वे आज भी सचिन पायलट को एक बच्चा ही समझते हैं। उनके मन में पायलट के प्रति अभी भी बहुत मेल भरा हुआ है।

गहलोत और पायलट के रिश्तों पर तंज

दरअसल, यह पूरा विवाद अशोक गहलोत के उस बयान से शुरू हुआ जिसमें उन्होंने पायलट की वफादारी की बात कही थी। गहलोत ने दावा किया था कि पायलट की दोनों टांगें कांग्रेस में ही रहेंगी।

इसी बयान पर मदन राठौड़ ने चुटकी लेते हुए कहा कि गहलोत ने 'पूरे' पायलट की बात क्यों नहीं की? उन्होंने सिर्फ उनकी टांगों का ही जिक्र क्यों किया, यह एक बड़ा राजनीतिक सवाल है।

राठौड़ के अनुसार, गहलोत आज भी पायलट को एक ऐसा बालक मानते हैं जो किसी के भी बहकावे में आ सकता है। वे उन्हें एक स्वतंत्र और परिपक्व नेता के रूप में स्वीकार नहीं कर पा रहे हैं।

भाजपा मुख्यालय में हुई प्रदेश स्तरीय बैठक

मदन राठौड़ का यह बयान मंगलवार को जयपुर स्थित भाजपा प्रदेश मुख्यालय में आया। वहां पंडित दीनदयाल उपाध्याय प्रशिक्षण महाभियान की एक महत्वपूर्ण प्रदेश योजना बैठक आयोजित की गई थी।

इस बैठक में भाजपा के आगामी कार्यक्रमों और संगठनात्मक मजबूती पर विस्तार से चर्चा की गई। इसी दौरान पत्रकारों ने उनसे गहलोत और पायलट के बीच चल रही बयानबाजी पर उनकी राय मांगी थी।

राठौड़ ने बड़ी बेबाकी से जवाब देते हुए कहा कि जितना प्रचार हम सचिन पायलट का करते हैं, उतना तो खुद उनके अपने नेता अशोक गहलोत भी कभी नहीं करते हैं।

उन्होंने आगे कहा कि यह काफी अजीब है कि विरोधी दल में होने के बावजूद हम पायलट के गुणों की चर्चा कर रहे हैं। जबकि उनकी अपनी पार्टी के वरिष्ठ नेता उन्हें लगातार कमतर आंकते आए हैं।

पायलट के व्यक्तित्व और गुणों की चर्चा

राठौड़ ने भाजपा के प्रदेश प्रभारी डॉ. राधा मोहन दास अग्रवाल के बयान का भी पूरी तरह समर्थन किया। उन्होंने कहा कि पायलट का व्यक्तित्व बहुआयामी है और उनका चेहरा काफी सौम्य और प्रभावी है।

उन्होंने तर्क दिया कि किसी भी व्यक्ति के अच्छे गुणों की प्रशंसा करना राजनीति से ऊपर होना चाहिए। पायलट भले ही भाजपा में नहीं हैं, लेकिन उनकी कार्यशैली की खूबियों को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता।

"अशोक गहलोत आज भी सचिन पायलट को बच्चा ही समझते हैं। वो बालक नहीं हैं, लेकिन गहलोत के मन में उनके प्रति जो मेल है, वो उनके शब्दों से साफ दिखाई देता है।"

पुराने विवादों और अपमान की याद

बातचीत के दौरान राठौड़ ने गहलोत द्वारा सचिन पायलट के पिता के अपमान का मुद्दा भी उठाया। उन्होंने कहा कि जब उनके पिता का अपमान हुआ, तब पायलट ने अपना रौद्र रूप दिखाया था।

उन्होंने तंज कसते हुए याद दिलाया कि गहलोत ने पूर्व में पायलट को 'नकारा' और 'निकम्मा' तक कहा था। ये शब्द आज भी पायलट के मन में एक गहरी चुभन की तरह मौजूद होंगे।

राठौड़ ने कहा कि एक वरिष्ठ नेता होने के नाते गहलोत को अपने साथियों के बारे में अच्छी बातें बोलनी चाहिए। लेकिन उनके मन में तो पायलट के प्रति केवल कड़वाहट और जलन ही भरी हुई है।

डोटासरा और कांग्रेस की अंदरूनी कलह

इस दौरान राठौड़ ने प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष गोविंद सिंह डोटासरा पर भी निशाना साधा। उन्होंने कहा कि डोटासरा को ये गहरी राजनीतिक बातें समझ नहीं आतीं, क्योंकि उनकी समझ का दायरा सीमित है।

उन्होंने कहा कि राजनीति में कभी दोस्ती का धर्म निभाना पड़ता है तो कभी टांग अड़ाने का। गहलोत केवल टांग अड़ाने का धर्म निभाना जानते हैं और यही कांग्रेस की सबसे बड़ी आंतरिक समस्या है।

राठौड़ ने स्पष्ट किया कि भाजपा अपनी मजबूती पर काम कर रही है। वहीं कांग्रेस के भीतर का अंतर्कलह अब जनता के सामने पूरी तरह उजागर हो चुका है, जिसे छिपाना अब मुमकिन नहीं है।

निष्कर्ष: राजस्थान की बदलती राजनीति

मदन राठौड़ के इन तीखे बयानों ने राजस्थान की राजनीति में एक नई बहस छेड़ दी है। भाजपा अब कांग्रेस के आंतरिक मतभेदों को सार्वजनिक मंचों पर भुनाने का कोई भी मौका नहीं छोड़ रही है।

आने वाले दिनों में यह देखना दिलचस्प होगा कि गहलोत खेमा इन हमलों का क्या जवाब देता है। फिलहाल, सचिन पायलट को लेकर भाजपा का यह रुख प्रदेश के सियासी गलियारों में चर्चा का केंद्र बना हुआ है।

राजस्थान की जनता भी इन राजनीतिक बयानों के पीछे छिपे गहरे सियासी मायने तलाश रही है। क्या यह भाजपा की पायलट के प्रति सहानुभूति दिखाकर कांग्रेस को कमजोर करने की कोई नई सोची-समझी रणनीति है?

*Edit with Google AI Studio

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